13 Moral Stories in Hindi With Moral / शिक्षाप्रद 13 हिंदी कहानियां जरूर पढ़ें

13 Moral Stories in Hindi

13 Moral Stories in Hindi मित्रों इस पोस्ट में 13 Moral Stories in Hindi For Kids की 13 Best Moral Stories in Hindi दी गयी हैं।  आपको सभी Hindi Kahani Kids  बहुत ही पसंद आएँगी।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

संदेह ( 13 Moral Stories in Hindi For Class 10 )

 

 

 

 

1 – हमें अपने जीवन में  Doubt के लिए जगह छोड़नी ही नहीं चाहिए। जिस तरह दो भाइयों के बीच, पति-पत्नी के बीच या और किसी के बीच संदेह उत्पन्न होने पर स्थिति विकट हो जाती है। संभलना मुश्किल हो जाता है और परिणाम कष्ट दायक रूप ले लेता है। आप लोगों के मन में यही सवाल उठता होगा कि यह कैसे हो सकता है ? यह बताने के लिए एक छोटी सी कहानी का सहारा लिया गया है।

 

 

 

 

मनोहर अपनी पत्नी मृदुला के साथ बैठे परिहास कर रहे थे, संध्या का समय था। बाहर चिड़ियों का कलरव था, साँझ के धुंधुलके में एक भूरे रंग का कुत्ता आ रहा था। मनोहर और मृदुला आपस में उस कुत्ते के रंग को लेकर उलझ पड़े, सांझ का धुंधुलका था इसलिए कुत्ते का रंग स्पष्ट नहीं हो पाया।

 

 

 

हिंदी मोरल कहानियां 

 

 

 

 

 

मृदुला ने गौर से देखा तो कुत्ते का रंग भूरा था, लेकिन मनोहर ने उसे काले रंग का बता दिया। जिस पति-पत्नी में कभी भी कोई बहस नहीं हुई, आज उसी पति-पत्नी को संदेह के कारण ही मानसिक पीड़ा का शिकार होना पड़ा। ठीक वैसे ही जैसे शंकर जी और सती के बीच संदेह ने अपनी जगह बना ली थी। परिणाम स्वरूप शंकर जी सती का परित्याग कर दिया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – संबंध जैसा भी हो दो के बीच Doubt के लिए स्थान ही नहीं होना चाहिए, अगर संदेह हो भी जाय तब उसे दूर कर देना चाहिए। जिसप्रकार पवन पुत्र ने अपना बड़ा स्वरूप दिखाकर सीता जी का संदेह दूर किया था। साक्ष्य दिखाकर संदेह को भगाना चाहिए।

 

 

 

 

 

रैपिड ऐक्शन ( 13 Moral Stories in Hindi For Class 9 )

 

 

 

2 – किसी के जिंदगी में भी ऐसा अवसर आ सकता है जब उसे थोड़ा भी समय नहीं मिलता कि वह सोच सके और फैसला करे। जो उस घड़ी में खुद फैसला ले सकता है उसे ही Successful माना जाता है। अगर आपने तुरंत फैसला नहीं लिया तो आपके लिए निश्चित ही मुश्किल हो सकती है। बात आती है उस छोटे मेढक की जो रमन के पास उस पतीले में कूद गया, जिसमे पानी भरा हुआ था।

 

 

 

 

पानी की समस्या होने कारण रमन उस पानी को फेंक नहीं सकता था। इसलिए उसने उस छोटे मेढक को निकालने का प्रयास किया, लेकिन मेढक फिर से कूदकर उस पानी भरे पतीले में आ गया। रमन जितना प्रयास करता कि उस छोटे से मेढक को बाहर निकाले, वह छोटा मेढक भी उतना ही जिद पकड़ चुका था कि पतीले से बाहर नहीं जाना है।

 

 

 

 

वह छोटा  सा मेढक बार-बार रमन का प्रयास विफल कर देता था। रमन को खीझ आनी स्वाभाविक थी। उसने पतीले का पानी जलती हुई अंगीठी पर रख दिया कि शायद मेढक निकल जाय, लेकिन जिद्दी मेढक उसी में तैरता ही रहा।

 

 

 

 

पानी थोड़ा और गर्म हो चुका था लेकिन मेढक ने कोई प्रयास नहीं किया। उल्टे वह अपने शरीर की ऊर्जा को गर्म पानी से मुकाबला करने लायक बनाता गया।

 

 

 

 

कुछ समय के उपरांत पानी का तापमान और बढ़ गया जो मेढक के सहन शक्ति से बाहर था। अब मेढक ने अपनी जान बचाने के लिये उछाल भरना चाहा लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मेढक मर चुका था।

 

 

 

 

Moral Of This Story – जहां सोचने समझने का वक़्त ना हो, वहां समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। तुरंत भाग लेना चाहिए। अगर मेंढक भी तुरंत पानी के गर्म होते ही भाग जाता तो निश्चित ही बच जाता। 

 

 

 

 

 

पढ़ना लिखना और सीखना

 

 

 

 

3- अगर आप से पूछा जाय कि पढ़ने लिखने और सीखने में आप किसे अधिक महतपूर्ण मानते है, तो आपका क्या जवाब होगा ? यही ना, कि अन्य लोगों की तरह ही कि पढ़ लिखकर अपना रुतबा दिखा सकते है। आज की यह 13 Moral Stories in Hindi Pdf इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

सामने वाले को अपनी डिग्री दिखाकर प्रभावित कर सकते है। लेकिन जब बात आपकी नौकरी की आयेगी, तब वहां जो कुछ कला आपने सीखी हुई है वही आपका कार्य आसान करेगी।

 

 

 

 

अगर आपने Bachelor of Arts , B.sc तक की पढ़ाई की हुई है। जो कि इस समय सामान्य बात है और आपको कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है जो इस समय अतिआवश्यक है।

 

 

 

अगर किसी ने १० वीं पास करके कंप्यूटर सीखा हुआ है तो वह मौका उस १० वीं पास और कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले के पास चला जाएगा। इसलिए सीखने का महत्व और भी बढ़ जाता है।

 

 

 

 

बड़ी-बड़ी डिग्री लेकर नौजवान बेरोजगार होकर घूम रहे है और १० वीं पास कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले अपनी जीविका कमा रहे है। आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

मोहन और सोहन घनिष्ठ मित्र थे।  दोनों मध्य वर्गीय परिवारों से आते थे। दोनों के माता-पिता सामान्य आय वाले थे। मोहन १० वीं के बाद अपनी पढ़ाई को स्थगित कर दिया और घर वालों से कंप्यूटर सीखने की इच्छा जाहिर की।

 

 

 

 

सोहन के पिता भी ज्यादा पढ़ाने के स्थिति में नहीं थे, लेकिन सोहन के समझाने से और भी अन्य लोगों के कहने से कि ( पढ़ाई करने के पश्चात् ) समाज में इज्जत बढ़ जाएगी। उन्होंने सोहन को अपनी परेशानी की परवाह न करते हुए उसे Ba, B.sc और न जाने कितनी डिग्री दिलवा दी।

 

 

 

 

 

अब समस्या यह थी कि सोहन जहां भी नौकरी के लिए जाता वहां उसके जैसे और उससे भी तेज तर्रार नौजवान बेरोजगारों की लाइनें लगी रहती थी। ( यहां हमारा उद्देश्य पढ़ाई से हतोत्साहित करना नहीं है। बेरोजगारी की समस्या का समाधान ढूंढने की कोशिश  हो रही है। ) और छोटी सी नौकरी वह करना नहीं चाहता था क्योंकि उसे अपनी डिग्री की इज्जत मिट्टी में मिलने का डर था।

 

 

 

 

जबकि मोहन के सामने अवसरों की भरमार रहती थी। वह कहीं भी जाता था उसका कंप्यूटर ज्ञान डिग्री वालों पर बीस साबित होती थी। मोहन आज सुखी है और सोहन परेशान है।

 

 

 

 

यहां उद्देश्य स्पष्ट होता है अगर आपके पास पढ़ाई के साथ-साथ कौशल, चाहे जिस क्षेत्र का है तो आप अवश्य ही Success होंगे अन्यथा बेरोजगारी की एक कड़ी आप भी बन जाएंगे।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – पढ़ाई के साथ ही कुछ ना कुछ कौशल अवश्य सीखना चाहिए। आज के समय में इसीलिए बहुत से स्कूलों में  कम्यूटर की शिक्षा दी जा रही है और भारत सरकार का कौशल विकास कार्यक्रम भी चल रहा है। 

 

 

 

 

 

सुविचार ( Moral Stories in Hindi  For Class 8 ) 

 

 

 

 

4- मित्रों कभी हमें अपना भूतकाल नहीं भूलना चाहिए।  अगर भूतकाल में कुछ गलत हुआ हो तो उसे सुधारने की कोशिश करो और अगर अच्छा हुआ हो तो उसे आगे बढ़ाओ। 

 

 

 

कई लोग ऐसे होते हैं जो पहले गरीब होते हैं और फिर भगवान की कृपा से अमीर हो जाते हैं, लेकिन अपने गरीबी के दिन को भूल जाते हैं, ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए।  मित्रों आज की कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

रघु एक धार्मिक व्यक्ति था। लेकिन बहुत गरीब था। वह कोई भी कार्य करने से पहले अपने गुरु जी विचार-विमर्श जरूर करता था। वह एक दिन अपने गुरु से आज्ञा लेकर शहर के लिए प्रस्थान किया, इस उद्देश्य के साथ शायद उसकी गरीबी पर अंकुश लग सके।

 

 

 

 

रघु ने शहर में एक छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। वह छोटा व्यवसाय का पौधा आज एक वृक्ष बन चुका था। जिसकी छत्र छाया में रघु आराम से रहता था। उसके मन में मंदिर बनवाने का विचार उत्पन्न हुआ। उसने घर आकर अपनी जिज्ञासा अपने गुरु को बताई।

 

 

 

 

उसने गुरु जी से कहा, ” गुरु जी मैं एक ऐसा मंदिर बनवाना चाहता हूँ जहां भगवान की पूजा के साथ-साथ समाज के दुर्बल व्यक्तियों की सहायता होती रहे। ”

 

 

 

 

गुरु जी यह विचार जानकर अति प्रसन्न हुए। उन्होंने रघु से कहा, “यह मंदिर तुम जहां व्यवसाय करते हो वहां भी बनवा सकते हो और उस क्षेत्र की जनता की सेवा कर सकते हो।” उसने ऐसा ही मंदिर बनवाया और कई सारे ट्रस्ट में भी दान करने लगा।

 

 

 

Moral Of This Story- अपना बीता हुआ कल कभी भी मत भूलो। 

 

 

 

 

प्रयास हिंदी प्रेरक कहानी 

 

 

 

 

5 – मित्रों हमें जिंदगी में हमेशा कुछ ना कुछ सीखते  रहना चाहिए। अगर आपमें सीखने की ललक रहेगी तो आप कहीं से भी और किसी से भी सीख सकते हैं और सफल हो सकते हैं।  आज की यह  Moral Stories in Hindi  इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

मुंशीलाल कुछ बच्चों को शिक्षा देने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन बच्चों की उम्र कम होने के कारण अपने प्रयास में विफल हो जाते थे। एक दिन वह खीझ गए और घूमने निकल दिए। इसलिए कि थोड़ा घूमकर आने से उनकी झुंझलाहट थोड़ा कम हो जाती और उन बच्चों को सिखाने का प्रयास अधिक हो पता।

 

 

 

 

रास्ते में जाते हुए मुंशीलाल को एक घर मिला।  उस घर के सामने एक औरत अपने छोटे बच्चे को चलने के लिए प्रेरित कर रही थी। बच्चा खड़ा तो पूर्ण रूप से हो जाता था, लेकिन चलने के लिए जैसे ही एक पैर आगे बढ़ाता औरत थोड़ा पीछे खिसक जाती और बच्चा गिर जाता था।

 

 

 

 

औरत के दो-तीन प्रयास के बाद वह बच्चा दो कदम चला औरत फिर पीछे हट गई। ध्यान  देने की बात यह है कि वह औरत बच्चे को उल्टा होकर सिखा रही थी। साथ ही बच्चे की सुरक्षा भी कर रही थी।

 

 

 

 

यह देखकर मुंशीलाल को Idea मिल चुका था। दूसरे दिन मुंशीलाल ने सभी बच्चों को उल्टा ” क ” बनाकर सिखाना चालू किया। उनके ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था सभी बच्चों ने सतप्रतिशत उत्तर दिया था। अर्थात सभी बच्चों को सीधा लिखना आ गया था।

 

 

 

 

Moral Of This Story – सीखने का अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहिए हर समय सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

 

 

 

रास्ता ( 13 Moral Stories in Hindi  For Class 8 ) 

 

 

 

 

 

6- मित्रों सबके Life  में अनेकों  Problmes आती हैं, लेकिन जो उनसे लड़ता है, डटकर मुकाबला करता है, वही विजयी होता है।  आज की यह Moral Stories Hindi  इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

प्रवीण आज एक Success व्यक्ति है और लोग उसके Struggle और लगन की मिसाल देते थे। प्रवीण के Life में परेशानी भी बहुत आई, जिससे वह ज्यादा पढ़ लिख नहीं सका था।

 

 

 

 

घर पर बहुत आर्थिक तंगी थी।  इस वजह से वह भाग कर एक शहर में आया। उसने किसी तरह से एक मंदिर के सामने छोटा सा व्यवसाय शुरू किया, लेकिन समस्याओं ने यहाँ भी उसका साथ नहीं छोड़ा।

 

 

 

 

जिस मंदिर के सामने प्रवीण का व्यवसाय था। उस मंदिर का पुजारी बहुत ही गुस्से वाला व्यक्ति था। उसने प्रवीण को वहां से हटवा दिया वह परेशान होकर अपने घर लौट आया।

 

 

 

 

व्यवसाय का अनुभव होने के कारण उसने एक बार पुनः कोशिस किया। इस बार उसे परेशानियों के बीच से ही रास्ता मिल गया, जिससे उसे सफलता मिलने लगी।

 

 

 

Moral Of This Story – परेशानी होने के बाद भी जो खड़ा रहता है वही Success होता है।

 

 

 

 

सतर्क प्रेरक कहानी हिंदी में 

 

 

 

 

 

7- मित्रों हमेशा आने वाली समस्यायों को लेकर सतर्क रहो।  मेहनत करने से आपको निश्चित ही Success मिलेगी, लेकिन उस सफलता पर कोई ग्रहण ना लगे, इसके लिए आपको हमेशा सतर्क रहना चाहिए।  आज की यह कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

एक बगीचे में एक बकरी रहती थी। कुछ दिन बाद उसकी एक सियार से दोस्ती हो गई। सियार अपने स्वभाव के अनुरूप बहुत ही धूर्त था। एक दिन सियार ने बकरी से कहा, “बकरी बहन चलो हम दोनों मिलकर खेती करेंगे और उसमे की उपज को आधा-आधा बांट लेंगे। इससे  हम दोनों के दिन आराम से कट जायेंगे।

 

 

 

 

 

बकरी सियार की बातों से सहमत हो गई। बरसात हुई तो बकरी ने सोचा यह खेती के लिए उपयुक्त समय है। बकरी ने सियार से कहा, “सियार भैया, बरसात हो चुकी है। चलो, धान की खेती करने के लिए खेत की तैयारी करना है। ”

 

 

 

 

 

सियार (  Jackal ) ने बकरी से कहा, ” हमें एक पंचायत में जाना है, तुम खेत तैयार कर लो।” बकरी गई खेत को भली-भातिं तैयार कर दिया। लेकिन बकरी सियार की धूर्तता से अनभिज्ञ नहीं थी। इसलिए उसने गब्बर और झब्बर नाम के दो कुत्ते के बच्चे को अपनी सुरक्षा के लिए पाल रखा था।

 

 

 

 

खेत तैयार करने पश्चात् उसमे धान का बीज डालने का समय आया। बकरी ( goat )  ने सियार से कहा, “सियार भैया चलो खेत में बीज डाल देते है। ”

 

 

 

 

सियार ने बकरी से कहा, “बकरी बहन तुम जाकर बीज डाल दो, मैं पंचायत में जा रहा हूँ।” बकरी ने जाकर खेत में बीज डाल दिया। कुछ समय के पश्चात् धान के पौधे निकल आये।

 

 

 

 

बकरी ने सियार से कहा, “सियार भैया, धान के पौधों की रोपाई करनी है। चलो साथ में चलकर रोपाई कर लेते है। लेकिन सियार ने फिर वही बात दुहराई, “हमें पंचायत से ही फुर्सत नहीं है। तुम जाकर धान की रोपाई करा दो।”

 

 

 

 

बकरी ने धान की रोपाई करवा दिया।  उसके बाद पौधों के निराई का समय आया। बकरी ने पुनः सियार से आग्रह किया कि चलकर पौधों की निराई करा दो। लेकिन हर बार की तरह सियार फिर पंचायत में जाने का बहाना करके खेत में निराई करने नहीं गया।

 

 

 

 

बकरी ने खेत की निराई भी करवा दिया। खेत में धान की फसल लहलहा रही थी। जिसे देखकर बकरी बहुत खुश थी। समय आने पर फसल पककर तैयार हो गई और फसल के कटाई का समय आ गया।

 

 

 

 

बकरी ने सियार से कहा, “सियार भैया फसल पक गई है। चलो कटाई करवा दो। इसपर सियार ने कहा, “बकरी बहन इस समय मैं बहुत ही व्यस्त हूँ। हर जगह हम लोगों की पंचायत चल रही है। उसमे हमारा उपस्थित रहना अनिवार्य है। इसलिए तुम ही फसल की कटाई करा दो।”

 

 

 

 

बकरी ने फसल की कटाई करवा के उसे खलिहान में इकट्ठा रखवा दिया। बकरी ने पुनः सियार से कहा, “फसल काटकर खलिहान में रखी हूँ चलकर उसकी मड़ाई करवा दो।”

 

 

 

 

सियार ने बकरी से कहा, “तुम ही मड़ाई करवा दो, मैं पंचायत में जा रहा हूँ।” बकरी ने फसल की मड़ाई करवा दिया। धान और पुलाव को अलग-अलग रखवा दिया। फिर उसने सियार से कहा, “सियार भैया, अब अगर पंचायत से फुर्सत मिल गई हो तो फसल का बटवारा कर दो। अपना हिस्सा लेके हमें हमारा हिस्सा दे दो।”

 

 

 

 

इसपर सियार ने बकरी से कहा, “हां, अब पंचायत ख़त्म हो चुकी है। अतः कल ही फसल का बटवारा कर दूंगा,  तैयार रहना।” बकरी को समझते देर नहीं लगी। वह समझ चुकी थी दाल में कुछ काला है। इसलिए वह पहले से ही तैयार थी।

 

 

 

 

 

बकरी ने अपने पालतू कुत्तों को सब बात बताते हुए कहा, “तुम दोनों तैयार रहना, मैं जैसे ही तुम दोनों को बुलाऊं, उसी पल उस धूर्त सियार को सबक सिखा देना।”

 

 

 

 

दूसरे दिन सियार अपने तीन साथियों को लेकर आया और बकरी को आवाज दी, “आओ अपना हिस्सा ले जाओ।” बकरी ने बाहर आकर देखा तो सियार ने धान का दाना अपनी तरफ और पुलाव को बकरी की तरफ रखा हुआ था।

 

 

 

 

 

यह दृश्य देखकर बकरी थोड़ा रुष्ट होकर बोली, “सारी मेहनत मैंने की, लेकिन फिर भी मैंने तुम्हे हिस्सा बांटने के  लिए कहा और तुम पूरा अनाज लेकर हमें सिर्फ पुलाव दे रहे हो, ऐसा नहीं होना चाहिए।”

 

 

 

 

सियार ने बकरी से कहा, “ऐसा ही होगा, क्योकि हम अनाज खाते है और तुम पुलाव खाती हो।  इसलिए तुम्हे सिर्फ पुलाव ही मिलेगा।” यह सुनकर बकरी सोच में पड़ गई और बैठकर जुगाली करने लगी।

 

 

 

 

 

तभी दूसरा सियार बोला, ” यह हम लोगों को हमला करने की सोच रही है। इसे सबक सीखाना चाहिए।” हां इसे सबक सीखाना ही चाहिए सभी एक साथ बोल उठे।

 

 

 

 

बकरी को खतरे का आभास हो चुका था। उसने तुरंत ही गब्बर और झब्बर को आवाज लगाई, “गब्बर झब्बर क्या कर रहे हो ?” उसी समय सियारों के ऊपर आफत आई।

 

 

 

 

गब्बर झब्बर सियारों के ऊपर बाज बनकर झपट पड़े। परिणाम स्वरूप सभी सियारों का बुरा हाल हो गया। उन्होंने दुबारा उस तरफ आंख उठाने का साहस नहीं किया। बकरी ने पूरा अनाज और पूरा पुलाव रख लिया। बकरी को उसकी मेहनत का फल मिला और सियार को उसकी धूर्तता का दंड मिला।

 

 

 

 

13 Moral Stories in Hindi Writing

 

 

 

 

 

8- रामू एक बार कपड़े की दुकान में गया। दुकानदार ने रामू से पूछा, “तुम्हे कौन सा कपड़ा चाहिए ?” रामू ने दुकनदार से कहा, “मैं आपके पास कपड़ा खरीदने नहीं आया हूँ।”

 

 

 

 

दुकानदार ने कहा, “फिर क्यों आये हो यहां ?”

 

 

 

 

रामू ने दुकानदार से कहा, “क्या, आप हमें अपने पास नौकरी देकर हमारी कुछ आर्थिक सहायता करेंगे ?”

 

 

 

 

दुकानदार ने रामू से कहा, “मैं तुम्हे अपने पास नौकरी नहीं दे सकता हूँ, क्योंकि इस समय धंधा नहीं चल रहा है। धंधे में गिरावट है। लेकिन मैं तुम्हे यह ५ रुपये दे रहा हूँ, इसे रख लो काम आएंगे।”

 

 

 

 

 

रामू ने दुकानदार से कहा, “मैं अपनी मेहनत से कमाया हुआ पैसा ही लेता हूँ। किसी के द्वारा दिया गया पैसा एहसान के रूप में नहीं लेता।” यह कहकर रामू वहां से चला गया।

 

 

 

 

रामू एक बाजार से होकर जा रहा था। उसी बाजार में राजा अपने राजगुरु और दो सेवकों के साथ निरीक्षण करते हुए जा रहे थे और राजगुरु को एक ऐसे युवक की तलाश थी जो कर्मठ और ईमानदार हो और किसी भी कार्य को करने के लिए प्रयासरत हो।

 

 

 

 

राजगुरु ने राजा को एक मृत चूहे की तरफ इशारा करते हुए बोले, “राजन, अगर कोई कर्मठ व्यक्ति होगा तो वह इस चूहे से भी पैसा कमा सकता है।”

 

 

 

 

राजा ने कहा, “यह आप क्या कह रहे है ? ”  पीछे खड़े दो नौकरों ने कहा, ” इस मृत से कोई पैसा कैसे कमा सकता है ?” यह कहकर राजा और दोनों नौकर हंसने लगे।

 

 

 

 

उन लोगो की बातें सुनकर राजगुरु ने कुछ नहीं कहा। राजा अपने गुरु और नौकर के साथ चले गए। लेकिन रामू ने राजगुरु की बातों को सुन लिया था। उसने मृत चूहे को ध्यान से देखा और अपने हाथ में उठाकर चल दिया।

 

 

 

 

रास्ते में एक आदमी आ रहा था। उसके साथ एक बिल्ली भी थी। बिल्ली ने चूहे को देखा तो उसके मुंह में पानी आ गया और वह उतावली होकर उछल कूद मचाने लगी।

 

 

 

 

बिल्ली का मालिक रामू से कहा, “क्या तुम चूहा बेचोगे।  मैं इसे अपनी बिल्ली के लिए खरीदना चाहता हूँ ?”

 

 

 

 

इसपर रामू ने कहा, “मैं आपको यह चूहा 2  रुपये में दे सकता हूँ।” बिल्ली ( Cat ) के मालिक ने रामू को 2  रुपये दिए और चूहा  ( Rat ) अपने बिल्ली के लिए ले लिया। अब रामू के पास दो रुपये थे। उसने 2  रुपये का फूल लिया और एक मंदिर के सामने जाकर बैठ गया।

 

 

 

 

वहां उसके सारे फूल बिक गए। जससे उसे 6  रुपये का फायदा हुआ। अब रामू के पास 8 रुपये थे। एक रुपये में उसने अपनी क्षुधा तृप्त की और 5 रुपये में उसने बर्तन खरीदकर शर्बत बनाया, फिर उसे घूम-घूमकर बेचने लगा। गर्मी का मौसम था। उसका शर्बत भी लगभग बिक गया था, बस थोड़ा सा रह गया था।

 

 

 

 

 

वह घर जा रहा था। उसने देखा दो किसान लकड़ी काट रहे थे। रामू ने उन किसानों से कहा, “आप लोग गर्मी से प्यासे हो, यह शर्बत पीलो।” किसान हिचक रहे थे।

 

 

 

 

रामू ने किसानो से कहा, “मैं इस शर्बत का पैसा नहीं लूंगा। आप लोगों की सेवा करने के लिये दे रहा हूँ।” दोनों  किसानों ने शर्बत पी लिया।  उन्हें गर्मी से बहुत राहत महसूस हो रही थी।

 

 

 

 

दोनों किसानों ने रामू से कहा, “अगर कभी जरूरत पड़े तो निःसंकोच हम लोगों के पास आ जाना।”

 

 

 

 

रामू अपने घर चला गया। दूसरे दिन वह पहाड़ की तरफ जा रहा था। तभी उसकी नजर एक आदमी पर गई जो अपने दस गधों ( Donkeys ) पर गट्ठर लादे हुए खड़ा था और गधों को हांकने का प्रयास कर रहा था। लेकिन उसके गधे भूख के कारण अपनी जगह से एक इंच भी चलने को तैयार नहीं थे।

 

 

 

 

रामू उस आदमी के पास पहुंचकर पूछा, “क्या मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ ?”

 

 

 

 

उस आदमी ने जो देखने में मोटा और डकैत की तरह लग रहा था, उसने रामू से कहा, “मेरे गधे भूखे होने के कारण चल नहीं पा रहे है और हमें जल्दी से शहर पहुंचना है। अगर कहीं से हरी घास का प्रबंध कर दो तो, हमारे इन गधों की भूख मिट जाएगी और मैं जल्दी से शहर जा सकूंगा। उसके बदले में मैं तुम्हे 200 स्वर्ण मुद्रा दूंगा।”

 

 

 

 

 

रामू ने सुन रखा था। इस पहाड़ियों में स्वर्ण भंडार है। रामू ने कहा, “ठीक है। आप आधे घंटे रुकिए, मैं अभी गधों के लिये हरा चारा लेकर आता हूँ।” रामू दौड़ते हुए उन दोनों किसानों के पास गया और कहा, “हमें हरी घास का दस गट्ठर चाहिए उसका कितना मूल्य लोगे ?”

 

 

 

 

 

दोनों किसान एक साथ बोले तुमने हमें इतनी गर्मी में शर्बत पिलाया था तो हम तुम्हारे लिए घास का गट्ठर भी नहीं दे सकते क्या ? किसान रामू से बोले, “यह हमारे पास दो बैल है उनके ऊपर अपनी आवश्यकता के लिए जितना गट्ठर चाहिए लादकर ले जाओ और फिर हमारे बैल को लौटा देना।”

 

 

 

 

 

रामू ने दोनों बैलों के ऊपर हरी घास का गट्ठर लादकर उस गधे वाले मोटे आदमी के पास पहुंचा। रामू को अपने पास आया देखकर वह मोटा आदमी बहुत प्रसन्न हुआ और अपने गधों को हरी घास खिलाई और रामू को 200 स्वर्ण मुद्रा दे दिया।

 

 

 

 

रामू ने मोटे आदमी से पूछा, “क्या मैं आपको शहर तक छोड़ दूँ ?”

 

 

 

 

इसपर मोटे आदमी ने रामू से कहा, “मैं चला जाऊंगा और उसने रामू को धन्यवाद कहा।”

 

 

 

 

रामू दोनों बैल लेकर किसानों के पास आया और किसानों के मना करने पर भी दस स्वर्ण मुद्राए दे दी। रामू दूसरे दिन राजदरबार में उपस्थित हुआ। राजा अपने गुरु के साथ किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। रामू ने राजा और राजगुरु को प्रणाम किया और फिर पूछा, ” आपने  हमें पहचाना ?”

 

 

 

 

राजगुरु ने कहा, “मैं तुम्हे नहीं पहचानता हूँ।” रामू ने राजगुरु से कहा, “आज मैं उस मरे हुए चूहे के कारण ही 200 स्वर्ण मुद्रा का मालिक हूँ और मैं आपको दक्षिणा देने आया हूँ।”

 

 

 

 

राजगुरु बहुत खुश हुए और  राजा से कहा, “राजन, हमें जिस योग्य और कर्मठ युवक की तलाश थी। वह आज पूरी हो गई है।”

 

 

 

 

राजगुरु ने फिर राजा से कहा, “अब मैं बृद्ध हो चुका हूँ और आपके राज्य की नीतियां बनाने में कठिनाई होती है। मैं चाहता हूँ यह प्रभार रामू को सौंप दिया जाय क्योंकि अब हमें हरिनाम और विश्राम दोनों की आवश्यकता है।”

 

 

 

 

राजा ने कहा, “आप उचित कह रहे है। आज से आपका कार्य भार रामू को  जाएगा। ” रामू की युक्ति से राजा ने पहाड़ियों में छुपे हुए स्वर्ण को अपने अधिकार में ले लिया और न्याय के साथ प्रजा का पालन करने लगे।

 

 

 

 

Moral Of This Story – किसी भी कार्य को लगन और धैर्य के साथ करना चाहिए।

 

 

 

 

धरती हिंदी प्रेरक कहानियां 

 

 

 

9- क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि जिस नारी को आज का समाज उपेक्षित नजरों से दृष्टिपात करता है। वह सदैव प्रत्येक रूप में हमेशा से ही मानव की भलाई के लिए ही कार्य किया करती है। उस धरती की तरह जिसकी गोद में मानव जन्म लेकर उसे उजाड़ने का प्रयास कर रहा है।

 

 

 

 

जिस प्रकार एक नन्ही बालिका किसी की बेटी,  किसी की बहन,  किसी की माँ,  किसी की दादी,  किसी की नानी होती है और अपनी छत्र छाया में अनेक लोगों को सुख प्रदान करती है और अपने ऊपर आये हुए दुख की परवाह भी नहीं करती।

 

 

 

 

उसी तरह यह धरती है, जिसके द्वारा मानव जीवन का पालन हो रहा है। मानव ने इस धरती  के हृदय को छलनी कर दिया है फिर भी धरती  उसे आश्रय देती है।

 

 

 

 

कहीं पेड़ की कटाई हो रही है, कहीं बड़ी फैक्ट्री का निर्माण, कहीं आकाश को छूती हुई मीनारें,  कही पाताल को नापने के लिए खुदाई की जा रही है।

 

 

 

 

इससे धरती को कितनी पीड़ा होती है, इसका अंदाजा किसी को नहीं है। थोड़ा सा चोट लगने पर सभी लोग डॉक्टर के पास जाते है। लेकिन यह धरती  किससे अपनी व्यथा कहे।

 

 

 

 

मानव को  नहीं पता है या खुद जानते हुए अनजान बन रहे है। जिस दिन धरती और नारी का अस्तित्व समाप्त हुआ, उसी क्षण संपूर्ण मानव जाति के साथ सब कुछ विलीन हो जायेगा।

 

 

 

 

Moral Of This Story – सभी लोगों का सम्मिलित प्रयास नारी और धरती  के उत्थान के लिये होना चाहिए, ना कि उसके पतन के लिए।

 

 

 

 

मेहनत का फल  ( 13 Moral Stories in Hindi Short )

 

 

 

10- किसी भी कार्य की Success  प्राप्त करने के लिए  Hard Work तो करनी ही पड़ेगी। साथ में थोड़ा या लंबा इंतजार भी करना पड़ सकता है, तभी आपके कार्य का मूल्यांकन हो सकेगा। समय बीतने के साथ ही आपकी कला निखरती जाएगी और उसका पूर्ण मूल्यांकन हो सकेगा।

 

 

 

 

जैसे एक माली जो फूल का पौधा लगता है। उसे सिंचाई, खाद के साथ-साथ सुरक्षा भी करनी पड़ती है, तब वह फूल तैयार होता है और उसके बाद ही सिरमौर बनता है।

 

 

 

 

रामू एक बहुत अच्छा Carpenter था। उसकी स्थिति अच्छी नहीं थी। वह एक सेठ के पास काम करने के लिए गया। उस सेठ के पास पहले से ही कई कारीगर थे, फिर भी सेठ ने रामू को अपने यहां रख लिया।

 

 

 

 

रामू उम्रदराज था और पहले वाले सभी कारीगर रामू से कम उम्र के थे। लेकिन वह सब सेठ के पास पहले से काम कर रहे थे इसलिए खुद को रामू से सीनियर समझ रहे थे। सेठ रामू को छोटा-छोटा ही काम देता था लेकिन सेठ की निगाहें रामू को परख चुकी थी, फिर भी सेठ को उचित अवसर की तलाश थी।

 

 

 

 

 

सेठ के अन्य नौकरों का व्यवहार रामू के प्रति उपेक्षा का था, लेकिन रामू हताश नहीं था। उसे अपने अनुभव और कला पर पूर्ण विश्वास था। सेठ के पास एक Party  का order आया, उसे चलने वाला १० लकड़ी का घोड़ा चाहिए था।  वह कीमत भी मुंहमांगी देने को तैयार था। सेठ ने ऑर्डर ले लिया और एडवांस भी २० हजार मिल गया था। सब कुछ ६० हजार में तय हो चुका था।

 

 

 

 

पहले के सभी कारीगरों के प्रयास से घोड़ा तो ऐसा बन गया कि अभी दौड़ पड़ेगा। लेकिन उन घोड़ों को चलना आता ही नहीं था तो दौड़ेंगे कैसे ? बड़ी विचित्र समस्या थी, अगर घोड़े चलेंगे तो ४० हजार और मिलेंगे अगर नहीं चलेंगे तो २० हजार देने पड़ जाएगे लकड़ी का नुकसान अलग होगा।

 

 

 

 

अब सेठ ने रामू को बुलाया और सारी बात बताई। रामू तो पहले से ही तैयार था, क्योंकि उसे कई वर्षों का अनुभव था और गुण विरासत में मिला था। रामू ने सभी घोड़ों के पेट में अपनी कला से चाभी फिट किया सभी घोड़े चलने लगे। सेठ का फायदा हुआ, पहले वाले कारीगर नतमस्तक थे।

 

 

 

 

Moral Of This Story –  विरासत को अगर मेहनत से संभाला जाए तो वह जरूर ही लाभदायक होता है। 

 

 

 

 

देखो और इंतजार करो

 

 

 

11- Life के किसी भी समस्या का हल जब नहीं निकलता है या कोई भी सामाजिक स्थिति का पूरा प्रयास करने के बाद भी नहीं सुलझती है, तब देखते रहना या इंतजार करते रहने के शिवाय कोई रास्ता भी नहीं बचता और उचित समय आने पर उस समस्या का निवारण कर देना चाहिए।

 

 

 

 

सोनू एक हट्टा-कट्टा पढ़ा लिखा नौजवान था। उसकी एक Private company में अच्छे Position पर Job लगी हुई थी। Payment  भी अच्छी थी, लेकिन समस्या यह थी कि उसे हर समय उन दो केकड़ों का सामना करना पड़ रहा था, जो उसकी टांग को पकड़े हुए थे। सोनू से एक सीनियर था, उन्हें डर था कि सोनू अपनी काबिलियत के दम पर उसे पीछे छोड़ सकता है।

 

 

 

 

इसलिए उसने सोनू से जूनियर को उसे परेशान करने के लिए रख दिया था। जबकि सोनू के मन में अपने सीनियर के लिए सम्मान और जूनियर के लिए प्यार ही था।

 

 

 

पढ़े लिखे लोगों की लड़ाई भी अजीब तरीके से होती है। Silent War कोई तू-तू , मैं-मैं नहीं, कोई चिल्लाहट नहीं, सभी अपना कार्य सही तरीके से कर रहे थे।

 

 

 

 

तीन के बीच में War चालू था वह भी एकदम  Silent . सोनू अपने सीनियर और जूनियर से बात करके देख चुका था कोई फायदा नहीं हुआ। एक दिन कंपनी के मालिक प्रबोध शर्मा जो ऐसी ही चार बड़ी कंपनी के मालिक थे, सोनू के Junior और Senior को एक साथ ही अपनी दो अलग-अलग company में उसी व्यवस्था पर तैनात कर दिया क्योंकि उसे इस Silent War के बारे में पता चल गया था और उसने एक झटके में ही सारा विवाद ख़त्म कर दिया। 

 

 

 

 

Moral Of This Story – उलझने से समस्या का अंत नहीं होता और बढ़ ही जाती है।

 

 

 

 

 

 

 

प्रकाश और किरण ( 13 Moral Stories in Hindi  ) 

 

 

 

 

12- जहां प्रकाश होगा वहां किरण भी होगी और जहां किरण दिखेगी वहां प्रकाश का होना अनिवार्य है। दोनों एक दूसरे के पूरक है, एक के बिना दूसरे की पहचान मुश्किल है।

 

 

 

 

प्रयाग फ़ूड लिमिटेड नामक कंपनी में किरण Head manager थी और सुचित्रा पैकिंग लिमिटेड में प्रकाश भी  Manager था। दोनों की Life में कोई अभाव नहीं था। दोनों ही Talented थे और अपने-अपने कार्य को बहुत ही सतर्क होकर करते थे। कंपनी से लेकर घर तक कोई शिकायत नहीं थी।

 

 

 

 

 

लेकिन जब बात बिगड़नी होती है तब दाल में नमक कम है की शिकायत उत्पन्न हो जाती है। दोनों की Payment में सिर्फ और सिर्फ One Thousand  रुपये का अंतर था।

 

 

 

 

यह बात किरण को हमेशा ही चुभती थी, जबकि प्रकाश हमेशा ही किरण को समझाता थी कि रुपये  के सिक्कों को सीधा देखो या उल्टा वह रुपया ही रहेगा।

 

 

 

 

तुम्हारी Payment कम है तो क्या हुआ पैसा आएगा तो अपने घर में ही, लेकिन किरण को यह बात समझ में आती ही नहीं थी। यह समस्या प्रकाश ने अपने ससुर मुरारी लाल को बता दिया था।

 

 

 

 

अचानक से मुरारी लाल अपने बेटी के घर आ धमके। उन्हें देखकर किरण को अचरज हुआ क्योंकि मुरारी लाल बगैर सुचना के आते ही नहीं थे। अपने आने के पहले सूचित अवश्य कर देते थे इसीलिए किरण हैरान हो रही थी।

 

 

 

 

एक दो दिन रुकने के पश्चात् मुरारी लाल ने अपने घर जाने की इच्छा जाहिर की।  किरण के रोकने पर मुरारी लाल ने कहा, “यह तुम्हारा घर तो है नहीं तुम्हारा अपना घर होता तब मैं कुछ दिन अवश्य रुक जाता।”

 

 

 

 

किरण ने कहा, “आप कैसी बात कर रहे है पिता जी यह हमारा घर नहीं है तो किसका है ?  क्या मैं और प्रकाश अलग-अलग हैं, जो आप इसे हमारा घर नहीं समझ रहे है। जबकि किरण और प्रकाश एक है और जहां प्रकाश है वहीं किरण का भी निवास है।”

 

 

 

 

 

“फिर तो दोनों में Tension ही नहीं होनी चाहिए।” मुरारी लाल ने कहा। किरण को सब अमझ में आ गया था। इसके बाद सारा विवाद ख़त्म हो गया और प्रकाश और किरण बहुत ही ख़ुशी से रहने लगे।

 

 

 

 

Moral Of This Story – समस्या कोई भी हो उसका समाधान तुरंत होना चाहिए, अन्यथा बढ़ने के साथ ही समाधान मुश्किल हो जाता है।

 

 

 

 

मुरली की आवाज ( 13 Moral Stories in Hindi For Class 5 ) 

 

 

 

 

13- बांस की एक छोटी शाखा अपने परिवार से बिछड़ने के बाद भी कलाकार के तरासने के साथ ही उसके होंठो से लगकर कितनी सुंदर और सुरीली आवाज निकालती है, जो आज भी लोगों को और सभी जीवों को अपनी तरफ खींच लेती है या कहे कि सभी मुरली की आवाज की तरफ खींचे चले आते है।

 

 

 

 

शायद इसी मधुर आवाज का प्रभाव रहा होगा जो योगेश्वर श्रीकृष्ण के द्वारा बजाये जाने पर सभी खिंचे हुए उनके पास चले आते थे। यहां तक लोग कहते है कि योगेश्वर के द्वारा बजाई हुई मुरली की तान पर भोलेनाथ भी झूमने पर विवश हो गये थे। कहीं भी घर में या बाहर मीठी आवाज से सफलता की संभावना अधिक होती है।

 

 

 

 

विपुल एक पढ़ा-लिखा लड़का था। अपने बुद्धिमानी के कारण ही वह टोक्यो इंटेरनेशनल कंपनी के सहायक प्रबंधक के पद को शोभित कर रहा था।

 

 

 

 

बचपन में ही उसने एक मदारी को मुरली बजाते हुए देखा था, जिससे उसके मन में भी मुरली बजाने की इच्छा बलवती हो गई थी। काफी अनुनय- विनय करने के उपरांत ही मदारी उसे सिखाने  के लिए तैयार हुआ।

 

 

 

 

एक वर्ष के कठिन परिश्रम से उसे यह ज्ञान प्राप्त हुआ था। विपुल चाहता तो मुरली को पैसा कमाने का माध्यम भी बना सकता था, लेकिन उसने अपने शौक का सौदा नहीं किया जो उचित ही था।

 

 

 

 

उसे जब भी मौका मिलता था अपना शौक पूरा कर लेता था। घर हो Office हो कहीं भी उसे कोई नहीं रोकता था। आज-कल इस कला को जीवित रखने वाले अँगुलियों पर गिने जाते है।

 

 

 

 

टोक्यो इंटेरनेशनल कंपनी के मालिक अकीरा सर उन दिनों भारत आये हुए थे। अपने Branch को उन्होंने निरीक्षण किया। सब कुछ कुशल हाथों द्वारा संचालित था।

 

 

 

 

अकीरा सर को कंपनी के तारफ से जापान जाने से पहले उनके स्वागत में एक party का आयोजन किया गया था। Company के प्रबंधक रामलाल ने विपुल को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए कहा था।

 

 

 

 

अकीरा सर के स्वागत में Party के पश्चात् विपुल का  Program था। विपुल का Program  शरू हो चुका था। सभी अपनी-अपनी जगह पर जड़वत बैठे हुए थे।

 

 

 

 

एक घंटे का समय कब ख़त्म हो गया पता ही नहीं चला। मुरली की आवाज बंद होते ही सभी जैसे नींद से जाग उठे। अकीरा सर तो इतने मुग्ध हो गए कि आधे घंटे फिर से मुरली बजाने का आग्रह किया।

 

 

 

 

 

आधे घंटे के पश्चात् विपुल को अकीरा सर ने बहुत ही शाबासी दी और अपने खर्चे पर जापान ( Japan )  आने का आग्रह किया। यह  भारतीय कला का और भारत का और साथ ही साथ विपुल का भी सम्मान था।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – कला की क़द्र हर जगह होती है। 

 

 

 

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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