5 Best Famous Hindi Short Stories Moral / विश्वास ही सबसे बड़ी भक्ति है

Famous Hindi Short Stories

Famous Hindi Short Stories इस पोस्ट में 5 Best Famous Hindi Short Stories की कहानियां दी गयी हैं।  सभी Famous Hindi Short Stories Pdf  बहुत ही बेहतरीन हैं।         

 

 

 

सीरियल की लत हिंदी कहानी ( Famous Hindi Short Stories Writing ) 

 

 

 

 

मित्रों की भी चीज की लत अच्छी नहीं होती है।  आज की यह हिंदी कहानी इसी पर आधारित है। एक गांव में सुधा नाम की औरत रहती थी। उसे टीवी सीरियल देखने की लत थी। सीरियल को मिस ना कर देने के चक्कर में वो खाना जल्दी-जल्दी बनाने के बदले उसे बिगाड़ देती थी।        

 

 

 

 

उसे खाने के लिए उसका पति रमेश और बेटा विकास बहुत तकलीफ उठाते थे। सुधा उनकी कमीज़ पर इस्री रख कर भूल जाती है और टीवी सीरियल देखने में मशगूल हो जाती थी।        

 

 

 

 

वो दोनों नए कमीज़ खरीदते-खरीदते तंग आ चुके थे। सुधा का पसंदीदा सीरियल था पगली सास और प्यारी बहु ।  खासकर उस सीरियल में बहु रेखा से बहुत प्यार था।

 

 

 

Famous Hindi Short Stories Written 

 

 

 

 

 

एक दिन सुधा अपने बेटे से कहती है:- देख बेटा। उस लड़की को सास से कितना प्यार है। सवेरे सास को प्रणाम किये बिना कोई काम नहीं करती। सास के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाती है। अपने पति की कमाई भी सास को ही देने को कहती है। यदि वो लड़की मेरी बहु बन जाये तो मेरा जन्म सफल हो जाये। तुम किसी तरह रेखा से जल्दी शादी कर लो बेटा।              

 

 

 

 

विकास:- क्या बात करती हो माँ। आज कल तुम्हे टीवी सीरियल और वास्तविकता में कोई फ़र्क़ नहीं दिखता ? वो एक एक्टर है और टीवी सीरियल में रेखा का किरदार निभा रही है। वो वही करती है जो राइटर लिखता है। वो सब सच नहीं है माँ।      

 

 

 

 

सुधा:- क्यों बेटा, अब मुझे कहानी सुना रहे हो। तुम कह रहे हो कि मेरी रेखा नाटक कर रही है। क्या तुमने कभी देखा है कि उसकी आँखों में उसकी सास के लिए कितना प्यार और आदर है और जब वो उनके पैर दबाती है। मैं वो सब कुछ नहीं जानती। तुम उससे शादी करते हो या मैं मर जाऊ ? विकास सर पकड़ लेता है। रेखा को ढूँढ़ते हुए वो मुंबई गया। सुधा बहुत खुश हुई। कुछ दिनों बाद विकास रेखा से शादी करके उसे घर ले आया।      

 

 

 

 

विकास:- माँ, ये जिस दूसरे दूसरे सीरियल में काम कर रही थी वहाँ शादी का मंडप लगा था। पैसे बचाने के लिए हमने वही शादी कर ली।        

 

 

 

सुधा:- अच्छा किया बेटा। यकीन नहीं आता ये सपना है या सच। बेटी एक बार मुझे चिमटी काटना।  रेखा ने सुधा का हाथ पकड़ कर उसे ज़ोर से चिमटी काटी।        

 

 

 

 

सुधा:- हाय रे, मैं मर गयी अब छोड़ दो। बस बहुत हो गया।     सुधा अंदर जा कर आरती की थाली लाती है। विकास सुधा के पैर छूता है लेकिन रेखा बोलती है:-   मेरी कमर में अकड़ आ गयी है इसलिए मैं आपके पैर नहीं छू सकती। वैसे इस मॉडर्न ज़माने में ये दकियानूसी  रिवाज़े कौन मानता है। 

 

 

 

 

सुधा दंग रह गयी। सुधा रेखा से कहती है:-  बेटी, उस सीरियल में तुम अपनी सास को बहुत अच्छे-अच्छे व्यंजन बना के खिलाती हो ना। परसो ही एक सीरियल में सैंडविच  देखा था मैंने। उसे खाने के लिए बहुत तरस रही हूँ। बेटी, ज़रा बना दोगी।      

 

 

 

 

रेखा:- उसमे क्या है माँ जी। अभी लाती हूँ।  कहकर रेखा चली गयी और थोड़ी देर बाद गर्म ब्रेड लेकर आयी और बोली:- ये लीजिये माँ जी। आपका सैंडविच। 

 

 

 

सुधा:– ये क्या मज़ाक है बेटी ? क्या तुम भूल रही हो कि मैं तुम्हारी सास हूँ।   रेखा:– और नहीं तो क्या। मैं आपकी बहु हूँ कोई बावर्ची नहीं। ऊपर से सैंडविच  चाहिए। सैंडविच  हुँह। उसे यूट्यूब  पर देखो, सीखो, बनाओ और खाओ। मैंने कभी ज़िंदगी में रसोई में पैर भी नहीं रखा है।        

 

 

 

 

सुधा हैरान हो गयी। एक और दिन सुधा कहती है:- रेखा बेटी तुम मेकअप तो अच्छा बना लेती हो। हमे शादी में जाना है। क्या तुम मेरा भी मेकअप कर दोगी?          

 

 

 

 

रेखा सुधा का मेकअप करती है। उसके पुरे गाल गुलाबी कर देती है और आँखों के चारो ओर काजल फैला देती है। फिर दोनों शादी में गए तो सुधा को देख कर दूल्हा-दुल्हन भूत-भूत कहकर भाग गए।        

 

 

 

 

दुल्हन की माँ सुधा से कहने लगी:-  ये क्या बनकर आयी हो सुधा ? तुम पागल हो गयी हो क्या ?    कहकर सुधा को आइना दिखाती है। आईने में खुद को देख कर वो कहती है:-  ये क्या है बेटी?        

 

 

 

 

रेखा:- मुझे बस इतना ही आता है। मुझे मेकअप करवाना आता है, करना नहीं।  एक दिन सुधा टीवी देख रही थी तो रेखा ने आ कर टीवी बंद कर दिया और बोली:-  ये क्या है चौबीसों घंटे टीवी-टीवी। हह। क्या घर में थोड़ी देर के लिए आराम भी नहीं कर सकते।        

 

 

 

 

सुधा:– ये क्या बेटी। मैं तो तुम्हारे ही टीवी सीरियल देख रही हूँ। ऐसे क्यों चिढ़ रही हो?        

 

 

 

रेखा:मुझे उस टीवी सीरियल से ही नफरत है। पैसो के लिए ही करना पड़ता है। वरना उस पागल सास की सेवा करू और वो भी मैं। हह।       सुधा को ज़ोर का झटका लगता है।     एक दिन विकास सुधा के हाथ में पैसे दे कर बोलता है:-  ये लो माँ। मेरी तन्खा।      

 

 

 

 

Famous Hindi Short Stories

 

 

 

 

तभी रेखा ने आ कर उसे छीन लिया और बोली:-  तन्खा माँ को दे रहे हो। एक पैर कबर में है अब ये पैसो का क्या करेगी ? अब इस घर की ज़िम्मेदारी मेरी है। अलमारी की चाबी भी मुझे दे कर एक कोने में बैठ कर राम नाम के जाप करते रहो।        

 

 

 

 

सुधा:- ये क्या बकवास कर रही हो। तुम मुझे नहीं जानती।  इतना कहकर उसने कोने में पड़ा झाड़ू उठाया और रेखा ने भी तुम भी मुझे नहीं जानती कहकर कोने में पड़ा घड़ा उठाया। दोनों लड़ने ही वाली थी कि विकास ने उन्हें रोका तो सुधा विकास से कहने लगी:-   बेटा, ये मुझे नहीं चाहिए। वो तो मेरा दिमाग खराब हो गया था कि मैंने इसे बहु बना कर लाने को कहा। सीरियल में बड़ी एक्टिंग करती थी। इसकी मीठी बातो को सुन कर मैं पिघल गयी थी। मैं नहीं जानती थी कि ये झगड़ालू औरत है। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ बेटा, अपनी पत्नी से मुझे बचा लो।      

 

 

 

 

 

विकास:- देखो माँ। इतने दिन तुम सीरियल में होने वाली घटनाओँ को वास्तव समझ कर भ्रम  में रह रही थी। अब समझ गयी हो ना ?      

 

 

 

 

 सुधा:– मेरी अकल ठिकाने आ गयी है बेटा। अब से मैं सीरियल को सीरियल की तरह ही देखूंगी। पर इससे कैसे पीछा छुड़ाऊँ  ?      

 

 

 

 

विकास:– रेखा, तुम वाकई में एक बहुत बेहतरीन एक्टर हो। मेरी बात मान कर, मेरे घर आ कर नाटक करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। तुम्हे पैसे मिल गए है ना। अब तुम जा सकती हो।      

 

 

 

 

सुधा:– क्या ? ये सब नाटक था ?    रेखा:- जी हां, आंटी। आपके बेटे ने आ कर मुझे आपके बारे में बताया। तो मैं यहाँ आ गयी। मेरे लिए तो टीवी, सीरियल, सिनेमा या घर सब समान है। परफॉरमेंस करती हूँ और पेमेंट लेती हूँ। चलती हूँ आंटी।        

 

 

 

 

सुधा:- शुक्र है। अब कभी सीरियल के चक्कर में नहीं पड़ूँगी बेटा।     फिर उस दिन से सुधा सिर्फ कुछ सीरियल देख कर घर का काम करने लगी और बेटे के लिए अच्छे रिश्ते ढूंढ़ने लगी।          

 

 

 

 

वंश बेल ( Most Famous Hindi Short Stories )

 

 

 

 

 

2- यह कहानी Famous Hindi Short Stories एक बहुत ही बढियाँ हिंदी कहानी है। इसमें लड़कियों के प्रति अभी भी कुछ जगहों और कुछ लोगों में जो हीन भावना है, उसे इस कहानी Famous Hindi Short Stories Long  में लिखा गया है, जिससे लोगों की सोच बदले और वे लड़का और लड़की में फर्क करना छोड़ें। 

 

 

 

 

सदियों से यही सोच चली आ रही है कि वंश बेल तो लडको से ही बढ़ती है और इस सोच से मालती भी नहीं बची थी।  जब उसकी बहु ने बेटी को जन्म दिया तो मालती को बड़ी निराशा हुई।

 

 

 

लेकिन उसने खुद को यह कहते हुए समझा लिया कि अभी कोई देरी नहीं हुई है. अपनी इस इच्छा को मालती ने जिद में बदल लिया. बहु दूसरी बार गर्भवती हो उसके पहले उसने पुजारी से ताबीज बनवाकर बहु और बेटे को पहना दिया.        

 

 

 

 

डाक्टर्स के मना करने पर भी उसने बहु से  व्रत भी करवाए और खुद भी कई सारे व्रत किया. लेकिन  शायद प्रकृति ने भी जिद कर रखी थी…इस बार भी बेटी का ही जन्म हुआ.        

 

 

 

 

इधर बेटी का जन्म हुआ और उधर मालती का भगवान,पूजा, पाठ से विश्वास ही उठ गया. अब उसकी जिद नफ़रत में बदल गयी थी. लेकिन वह जीतनी नफ़रत अपनी पोती धनलक्ष्मी से करती…..धनलक्ष्मी उतना ही अपनी दादी से प्यार करती…..मालती उसे अपने से दूर रखने का प्रयास करती लेकिन जब तक धनलक्ष्मी उसके गोद में ना आ जाए..वह चुप ही न होती थी.इससे मालती और भी चिढती थी.        

 

 

 

 

 

धीरे धीरे समय बीता और धनलक्ष्मी बड़ी होनी लगी…और उसकी साथ ही उसका नटखटपना भी बढ़ने लगा. …..वह हर बात पर जिद करती और अपनी दादी से ही उसे पूरा करवाने का भरपूर प्रयास करती…..हांलाकि यह बात अलग है कि वह अपने ज्यादातर प्रयासों में असफल ही रहती….उसकी इन हरकतों से तंग आकर मालती ने उसका नाम डायन रख दिया था.        

 

 

 

 

 

विमला तीसरी बार गर्भवती हुई…..इस बार मालती ने ना कोई मन्नत मांगी..ना कोई पूजा पाठ करवाए..यहां तक की बहु को ज्यादा आराम भी दिया.        

 

 

 

 

लेकिन इस बार चमत्कार हो गया….विमला ने पुत्र को जन्म दिया….आज तो मालती मानो ख़ुशी से पागल हो गयी थी….उसने खुद भाग भागकर पुरे गाँव में यह खबर दी.        

 

 

 

 

आज पहली बार मालती ने धनलक्ष्मी को प्यार से देखा….पुरे गांव को दावत दी गयी…सब कुछ अच्छे से चलने लगा…लेकिन धनलक्ष्मी के प्रति मालती का व्यवहार उस दिन के अतिरिक्त कभी नहीं बदला.        

 

 

 

 

 

वह अपने पोते सुकेस धनलक्ष्मी से दूर ही रखती थी…ठण्ड अपने बचपन में थी….गुनगुनी धूप खिली थी. विमला और उसका पति थोड़ी ही दूर खेतों में कुछ काम करने गए थे.        

 

 

 

 

 

मालती ने सुकेस को बाहर चादर बिछाकर लिटा दिया था और वह उसके लिए दूध लेने चली गयी…तभी बगल में मौजूद झाड़ियों में कुछ सरसराहट की आवाज को सुनकर पास में खेल रही धनलक्ष्मी की नजर उस पर पड़ी.        

 

 

 

 

 

उसने देखा कि एक नाग सुकेस की ओर बढ़ रहा है….धनलक्ष्मी ने आव देखा ना ताव तुरंत ही उस सर्प को वहाँ पास में पड़ी एक लकड़ी से भगानी लगी.        

 

 

 

 

 

लेकिन एक छोटी सी नादान बच्ची उस नाग को कब तक रोक सकती थी…सांप से उसे डंस लिया और उसके पैरों से लिपट गया…..तब तक मालती वहां पहुंची और यह दृश्य देखकर उसकी चीख निकल गयी.        

 

 

 

 

 

उसकी चीख सुनकर आस पास के लोग और खेतों में काम कर रहे मालती के बहु और बेटे भी दौड कर वहा पहुँच गए. तब तक धनलक्ष्मी बेहोश हो चुकी थी….सभी लोग उसे लेकर पास के दवाखाने भागे.  यह मर चुकी है…..डाक्टर ने उसकी नब्ज को टटोलकर देखने के बाद कहा.      

 

 

 

 

 

ऐसे कैसे मर सकती है…..नहीं..डाक्टर आप झूट बोल रहे हैं….हे भगवान क्या हो गया…..मैंने कभी भी उसे प्यार से नहीं देखा….उससे दो शब्द भी प्यार से नहीं बोले.        

 

 

 

 

 

जिस सुकेस को उससे छुपाती रही कि डायन है खा जायेगी..आज उसी सुकेस को बचाने के लिए उसने अपनी जान दांव पर लगा दी…..मालती के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे….रोते हुए बडबडाती जा रही थी…..हमेशा मैंने उसका तिरस्कार किया….उसके जगह मुझे मर जाना चाहिए था .      

 

 

 

 

 

आज धनलक्ष्मी के  प्रति सारी  कड़वाहट उसके आंसुओ के साथ बह निकली…….लेकिन अब क्या अब तो सब कुछ खत्म हो चुका था….वाह रे नसीब …..हमेशा तिरस्कार सहती बिटिया मरने के बाद प्यार पा रही थी.       

 

 

 

देखने का नजरिया  ( Hindi Best Story Pdf ) 

 

 

 

 

3- यह बहुत ही अच्छी हिंदी स्टोरी है।  आप इस कहानी को अवश्य ही पढ़ें। किशन एक बड़े सेठ का लड़का था। वह स्कूल में अपने सहपाठियों को हमेशा नीचा दिखाने की कोशिस करता था, उसमे से एक रमेश भी था। रमेश और किशन एक ही गांव के रहने वाले थे। इसलिए किशन हमेशा रमेश को अपने निशाने पर लिया रहता था।

 

 

 

 

किशन की औरों से अलग दिखने की चाहत एक दिन उसे बहुत ही महंगी पड़ गई।  उसके कई सहपाठी जो दूसरे गांव से पढ़ने आते थे उन लोगों से किशन का विवाद हो गया। उन सब लड़कों ने किशन की अच्छे से मरम्मत कर दी। उन लोगों की मरम्मत से किशन चल नहीं पा रहा था।

 

 

 

 

उसे किसी के सहारे की जरूरत थी, ऐसे समय में रमेश ने सहारा देकर किशन को उसके घर तक पहुंचाया। उसी दिन से किशन में परिवर्तन आ गया। वह सभी को एक समान समझने लगा, उसका देखने का अंदाज बदल चुका था।

 

 

 

 

सीख – देखने का नजरिया सही हो तब बुराई में भी अच्छाई नजर आती है।

 

 

 

 

 सच्चा साथी  ( Hindi Best Story Reading ) 

 
 
 
 
 
 
4- मोहन सदा की भांति स्कूल जा रहा था। रास्ते में उसने बहुत सारे कौवे को इकट्ठा देखा। नजदीक आने पर उसे एक नेवले का छोटा बच्चा घायल अवस्था में पड़ा हुआ दिखा, शायद कौवों ने उसे घायल कर दिया था।

 

 

 

उस घायल नेवले को देखकर उसका मन द्रवित हो उठा। वह नेवले को लेकर घर आया और उसकी मरहम पट्टी में उसकी उस दिन की पढाई अपूर्ण हो गई, लेकिन उसे परम शांति का अनुभव हुआ।

 

 

 

 

जिस प्रकार माता अपने नन्हे बालक की देख भाल करती है, वही कार्य मोहन का उस नन्हे नेवले के साथ था। स्कूल से आने के पश्चात मोहन उस नेवले के साथ खेलता था। इसलिए उसे प्रायः घर वालों की डांट भी पड़ती थी।

 

 

 

 

लेकिन मोहन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। गर्मी का समय था। सभी लोग अपनी चारपाई पर निद्रा देवी के स्वागत में लीन थे। खर-खराहट की आवाज से मोहन की नींद टूटी और वह टार्च जला कर देखा तो उसके रोंगटे खड़े हो गए। उसका नन्हा दोस्त मौत ( सांप ) के सामने साक्षात मौत बनकर खड़ा था और मौत को ललकार भी रहा था।

 

 

 

 

 

मोहन अपने घर के सभी सदस्यों को यह दृश्य दिखाया और किसी को हस्तक्षेप करने की सलाह नहीं दी। दस मिनट के बाद मोहन का नन्हा साथी मौत को परास्त कर चुका था। यह दृश्य देखकर उस नन्हे जीव के प्रति सबकी सोच बदल चुकी थी, और सभी उसका विशेष ध्यान देने लगे।

 

 

 

 

सीख – किसी के साथ किया गया उपकार व्यर्थ नहीं जाता है। संकट के समय मित्रों की परख होती है।

 

 

 

 

 

5- यह Famous Hindi Short Stories चतुराई पर आधारित कहानी है।  इस Famous Hindi Short Stories में दिखाया गया है कि कैसे चतुराई से सोनपरी जिन्ह से बच जाती है। 

 

 

 

 

एक दिन की बात है।  परीलोक पर पाताल लोक का जिन्ह  आक्रमण कर देता है।  वह परीलोक पर कब्जा जमाना चाहता है।  वह अपनी शक्तियों से परी लोक में भारी तबाही मचाता है।

 
 
 
 
 
 
इससे पुरे परीलोक में हाहाकार मच जाता है। इसपर सभी परियां  इकट्ठे होकर लाल परी और रानी परी के पास जाती है और उन्हें इस भीषण तबाही की खबर देती है।
 
 
 
 
 
 
इसके बाद रानी परी, लाल परी और  काली परी तथा अन्य परियों को उस जिन्ह से लड़ने के लिए भेजती  हैं।  लेकिन जिन्ह  की ताकत के आगे सभी परियां  हार जाती हैं।
 
 
 
 
 
 
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उसके बाद उस जिन्ह  से लड़ने के लिए रानी परी खुद जाती है और उस जिन्ह  से पूछती है आखिर तुम्हें क्या चाहिए ? तुम इस परीलोक पर आक्रमण क्यों कर रहे हो ?
 
 
 

 

 

तब वह जिन्ह  बोलता है, ” मैं परीलोक  पर कब्जा चाहता हूं।  मैं तुम परियों को अपनी दासी बनाना चाहता हूं।”  तब  रानी परी कहती  है, ” इसके लिए तुम्हें  मुझसे युद्ध करना पड़ेगा।”
 
 
 
 
 
इसपर जिन्ह  जोर से हंसता है और कहता है, ” सभी परियां मुझ से हार चुकी है।  तुम्हें अपनी ताकत पर बड़ा घमंड है। ” तब रानी परी कहती है, ” मैं कोई साधारण परी नहीं हूं। मैं रानी परी हूं। मेरे पास इन परियों से अलग शक्तियां है और मैं तुम्हें हरा दूंगी।  “
 
 
 
 
 
 
 
 
जिन्ह  फिर हंसता है और  कहता है, ” ठीक है,  जैसा तुम चाहो।  ” उसके बाद दोनों के बीच घमासान लड़ाई शुरू  जाती है और अंत में रानी परी को भी हार का सामना करना पड़ता है।
 
 
 
 
 
 
पुरे परीलोक पर जिन्ह  का कब्जा हो जाता है।  वह परियों  से बहुत बुरे-बुरे काम करवाता है और उन्हें परेशान करता है। कभी वह  परीलोक पर तबाही मचाने के लिए कहता है तो कभी धरती लोक पर तो  कभी बच्चों को परेशान करने के लिए कहता।
 
 
 
 
 
 
परियां  इससे बहुत दुखी होती है।  यह सब देख कर नन्ही सोनपरी भी बहुत दुखी होती है। वह जिन्ह  को भगाने का उपाय सोचने लगती है। तभी उसे एक आईडिया आता है।
 
 
 
 
 
वह जिन्ह  पास जाती है और उससे कहती है, ”  हे जिन्ह,  तुम बहुत अच्छे हो। आपने परियों को  बहुत अच्छा सबक सिखाया है। अब कृपया मेरी एक मदद करो। “
 
 
 
 
 
 
इसपर जिन्ह ने कहा, ” तुम कौन हो और मेरी इस तरह से तारीफ़ क्यों कर रही हो और तुम्हे क्या मदद चाहिये ?” तब सोनपरी ने कहा, ” मैं सोनपरी हूँ।  इन परियों ने मेरी माँ को एक बोतल में बंद कर दिया है। “
 
 
 
 
 
 
” लेकिन भला क्यों ? आखिर वह भी तो परी ही थी न।  ” जिन्ह ने सोनपरी से पूछा।  ” हाँ, वह परी ही है लेकिन उन्हें एक ऐसे जादुई हीरे के बारे में पता है जिससे परियों की शक्तियां और भी बढ़ जाती और उसी हीरे को छिनने के लिए वह मेरी माँ पर दबाव बना रही थीं और जब मेरी माँ ने उस हीरे के बारे में नहीं बताया तो परियों ने उन्हें कैद करके एक बोतल में डाल दिया।  अगर आप मेरी माँ को आजाद कराते हैं तो मैं माँ से पूछ कर आपको हीरे के बारे में बता दूंगी।  इससे आप और भी ताकतवर हो जायेंगे। ” सोनपरी ने कहा।
 

 

 

 

 

जिन्ह ने सोनपरी की बात मान ली और वह सोनपरी के साथ चल पड़ा।  सोनपरी एक कमरे में आई और एक बोतल लाकर जिन्ह के पास रख दिया।
 
 
 
 
 
जिन्ह ने उस बोतल को देखा और पूछा, ” यह तो खाली बोतल है।  तुम्हारी माँ कहाँ हैं ? ” तब सोनपरी ने कहा, ” मेरी माँ इसी बोतल में हैं।  परियों ने अपनी जादुई शक्ति से उन्हें अदृश्य कर दिया है।  जब कोई इस बोतल में प्रवेश करेगा तभी मेरी माँ उसे दिखेगी।  “
 
 
 
 
 
जिन्ह सोनपरी की बातों में आ चुका था।  वह हीरे की लालच में उस बोतल में जा घुसा।  जिन्ह जैसे ही बोतल में घुसा सोनपरी ने उस बोतल का ढक्कन बंद कर दिया।
 
 
 
 
 
ढक्कन बंद होते ही जिन्ह उसमें कैद हो गया।  वह बार – बार ढक्कन खोलने को कहने लगा , लेकिन सोनपरी भला क्यों खोलती ढक्कन ? यह सब तो उसका प्लान था।
 
 
 
 
 
उसने तुरंत ही बाकी सभी परियों को बुलाया।  जब परियों ने जिन्ह को बंद देखा तो बड़ी खुश हुईं।  उन्होंने उस बोतल को सागर में फेक दिया और सभी ख़ुशी से रहने लगे।

 

 

 

 

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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