8 Hindi Short Stories Pdf / हिंदी की बेहद रोचक 8 कहानियां जरूर पढ़ें

Hindi Short Stories

Hindi Short Stories इस पोस्ट में  Short Story in Hindi की Short Moral Stories in Hindi की कहानियां दी गयी हैं।  मुझे उम्मीद है कि सभी Small Story in Hindi आपको जरूर पसंद आएँगी। 

 

 

 

 

Hindi Short Stories With Pictures And Moral 

 

 

 

 

1- भवानी पुर राज्य के राजा जितेन्द्र सिंह बड़े ही नेक दिल के इंसान थे, जैसा की उनका नाम था उसी अनुरूप राजा थे भी उन्होंने अपने नाम जितेंद्र  को सार्थक कर दिया था।

 

 

 

उन्हें जीवन में किसी वस्तु का अभाव तो था नहीं, उसके साथ ही उन्होंने अपनी सभी इच्छाओ को अपने वस में कर लिया था।  सदाचारी रहते हुए उन्होंने हर काम प्रजा की भलाई के लिए किया।  उनके राज्य में एक बहुत बड़ी साप्ताहिक बाजार लगती थी, जिसमे सभी जीवनोपयोगी वस्तुओ की बिक्री होती थी।

 

 

 

 

राजा का यह नियम था कि  बाजार खत्म होने पर जिसका जो भी सामान नहीं बिका रहता उसे राजा खुद भेष बदलकर बाजार से खरीद लेते थे, ताकि उस आदमी की जीविका भी चलती रहे। साप्ताहिक बाजार लगा हुआ बाजार में पूरी रौनक थी खरीदारी भी अपने पुरे सबाब  पर थी।

 

 

 

लेकिन एक बढ़ई बहुत ही उदास बैठा था, कारण उसने एक चन्दन का पलंग बना कर लाया था। वह अभी तक बिका भी नहीं था जबकि आधे घंटे बाद बाजार बंद हो जाता।

 

 

 

Hindi Short Stories For Class 9

 

 

 

 

नहीं बिकने का कारण यह था कि पलंग की कीमत बहुत ज्यादा थी जो आम आदमी के बस में नहीं थी। इसलिए ग्राहक पलंग की कलात्मकता देखकर आते थे , लेकिन कीमत सुनकर निराश होकर चले जाते थे।

 

 

 

 

पलंग की कीमत चार सौ स्वर्ण मुद्रा थी , जो उसके कलाकारी और गुण के हिसाब से बहुत ही कम थी। बढ़ई भी उदास होकर भगवान को याद कर रहा था और उस घडी को मन ही मन कोस रहा था। जब उसे ऐसा पलंग बनाने का विचार आया था।

 

 

 

बढ़ई अभी सोच ही रहा था तभी  नियम के अनुसार राजा भेष बदलकर आए और बढ़ई से पूछे “काका यह पलंग कितने का है। “आवाज सुनकर बढ़ई की तन्द्रा टूटी तो देखा पूरा बाजार खाली  हो चुका था।

 

 

 

 

वहां  सिर्फ तीन लोग थे। बाकी सब व्यापारी और जनता जा चुकी थी। यह पलंग चार सौ स्वर्ण मुद्रा का है। ” किस लकड़ी का बना है और क्या खासियत है? ” भेष बदलने वाले राजा जितेंद्र ने बढ़ई से पूछा।

 

 

 

 

” यह पलंग चन्दन की लकड़ी का बना हुआ है और इसकी खासियत जब आप इस पर सोयेंगे तभी पता चलेगा ” बढ़ई ने कहा। राजा ने बढ़ई को चार सौ स्वर्ण मुद्राएं दे दी और अपने साथ आये हुए सेवक के हाथो पलंग को उठवा ले गए। रात जब हुई तो राजा उस पलंग पर सोने चले गए।

 

 

 

जब रात को बारह बजे, तब उसमे से एक पाया तीनो से बोला, ” आप लोग एक घंटे के लिए हमारे हिस्से का बोझ संभालें।  मै एक घंटे में नगर का भ्रमण कर के आता हूँ।  याद रखना राजा को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। ” मनुष्यों  की तरह बातें सुनकर राजा की नीद उचट गई और उन्होंने उन चारो की बाते सुनी और चुप चाप पलंग पर पड़े रहे।

 

 

 

एक घंटे बाद पाया वापस आया और सहयोग के लिए उसने तीनो साथियो को धन्यवाद कहा और अपने स्थान पर खड़ा हो गया। “आपने नगर भ्रमण किया तो उसका पूरा वृतांत हम लोगो से कह सुनाओ। ” सभी पायो ने एक स्वर में कहा।

 

 

 

नगर भ्रमण के दौरान मैंने इस राज्य के मंत्री को सीमा पार वाले राजा के मंत्री से मिलते हुए देखा। कल सुबह दस बजे दूसरे राज्य का राजा इस राज्य पर चढ़ाई करने वाला है और यहाँ का भेद जयचंद नाम का मंत्री उस राज्य के मंत्री को बता दिया है। इतना कहकर वह पाया चुप हो गया। पूरी बात सुनकर राजा की नीद उड गयी।

 

 

 

उन्होंने रात  में ही अपने वफादार मंत्री सुखबीर को बुलाकर पूरी बात बताते हुए पूछा, ” अब क्या करना चाहिए ? ” सुखबीर को ‘ काटो तो खून नहीं ‘ .

 

 

 

 

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उसने कहा, ”  महाराज जयचंद को तुरंत गिरफ्तार करवाइए और पूरी फ़ौज को पूरी तैयारी के साथ छुपाते हुए सीमा  पर लगवाइए। इस तरह दुश्मन हमारे राज्य की तरफ आएगा तो उसे सपने में भी गुमान नहीं होगा कि यहाँ सब तैयारी है और दुश्मन मुँह की खायेगा । “

 

 

 

 

राजा ने फ़ौरन नगर कोतवाल सुमेर को आदेश दिया कि तुरंत ही जयचंद को पकड़कर कारागार में डाल दो।  सुमेर ने तुरंत ही आज्ञा का पालन करते हुए जयचंद को कारागार में डाल दिया।

 

 

 

महामंत्री ने प्रधान सेनापति को पूरी बात बताते हुए तुरंत ही तैयारी का आदेश दिया भवानी पुर की सारी सेना बगल वाले राज्य की सेना के स्वागत के लिए तैयार हो चुकी थी।

 

 

 

 

सीमा पार का राजा जो एक नम्बर का दुष्ट था उसने अपने सैनिको को सुबह आठ बजे ही चढ़ाई करने का आदेश दिया, लेकिन भवानी पुर में तो बगल वाले राजा के स्वागत की तैयारी तो रात से ही चल रही थी। दोनों सेनाओ में जमकर लड़ाई हुई भवानी पुर के राजा की विजय हुई और दूसरा राज्य भी राजा जीतेन्द्र के राज्य में मिला लिया गया।

 

 

 

 

आज दूसरी रात थी बारह बज रहे थे।  राजा के आखो से नीद कोसो दूर थी कारण कि आज दूसरा पाया नगर में घूमने वाला था।  तीनो पायो ने पूरा बोझ संभाला और दूसरा चला गया।

 

 

 

 

नगर घूमने के दौरान दूसरे पाए ने देखा कि एक  बुढ़िया बहुत ही करुण बिलाप कर रही है। उसका कारण यह था कि उसकी लड़की कि शादी कल ही थी और घर में एक पैसा नहीं था। शादी फिर जाएगी और उसके लड़की का ब्याह नहीं हो पायेगा।

 

 

 

 

 

एक घंटे में वह पाया भी घूमकर आया और सारी बाते अपने तीनो साथियो को बता दी। सुबह होते ही राजा ने महामंत्री को पूरी बात बता कर उस बुढ़िया का पता लगाने को कहा और पूरी मदद देकर उसके कन्या की शादी करवाने के लिए कहा। इस दो बातो को जानकर महामंत्री बहुत ही आश्चर्य में पड़ गया, लेकिन राजाज्ञा का पालन करना था। चारो तरफ राजा की जय – जय कार हो रही थी।

 

 

 

 

आज तीसरा दिन था।  राजा तो मानो इसीलिए जाग रहा था कि आज क्या होगा ? उसका पता कैसे चलेगा ? तीसरा पाया अपने साथियो पर भरोसा कर नगर भ्रमण के लिए चला गया। एक घंटे के बाद जब वह वापस आया तो तो सबने उससे पूछा क्या खबर लाए हो ? तो उसने कहा आज मैं तीन खबर लाया हूँ।

 

 

 

पहला  राज्य के पश्चिम हिस्से में कल सुबह दंगा होने वाला है। उत्तरी हिस्से में एक आदमी को मारने की तैयारी चल रही है, जो की बेकसूर है। तीसरी खबर इस राज्य के लाला की बहू अपने शौहर से गद्दारी करके उसे जेल भिजवाने की तैयारी में है। वह कैसे जरा बिस्तार से बताओ – तीनो पायो ने कहा।

 

 

 

 

 

लाला का लड़का आज ही कमाकर आया है। लड़के के नहीं रहने के कारण लाला की बहु बदचलन हो गई थी।  लाला का लड़का जब परदेस से आया तो उसकी खिदमत करने के बाद रात बारह बजे अपने आशिक से मिलने गई।

 

 

 

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देर होने के कारण उसका आशिक गुस्सा होकर उसकी  नाक काट लिया। घर आने पर उसने इसका दोष अपने शौहर पर लगा दिया जब कि शौहर बेकसूर था  और उसका आशिक उसके घर के पीछे अभी भी छुपा बैठा है। उसके बाद उन पायों का वार्तालाप बंद हो गया। राजा ने मंत्री को बुला कर तीनो बात बताई और तीनो बातो का निराकरण करने के लिए कहा।

 

 

 

आज चौथा दिन था -और नंबर चौथे पाए का उसने तीनो के ऊपर भरोसा करके नगर घूमने चला।  रास्ते में उसे एक नाग मिला। पाए ने पूछा, ”  कहा जा रहे हो ? ”

 

 

 

नाग ने कहा, ”  मै इस नगर के राजा को काटने जा रहा हूँ। आज सुबह चार बजे राजा की मौत हो जाएगी। मै उनके जूते में छुपकर बैठुंगा और जूता पहनते ही काट लूंगा।  पाया तुरंत ही लौट आया और उसे समय से पहले आया देखकर सभी चौक पड़े , लेकिन उसने जो बात बताई तो सब दुखी हो गए।

 

 

 

राजा भी चौकन्ने होकर सब बाते सुन रहे थे। तीन बजे ही राजा ने द्वारपाल को बुला कर अपने जूते में नाग छुपे होने की बात बताई तो द्वारपाल आश्चर्य व्यक्त करने लगा, लेकिन राजाज्ञा का पालन करना था, सो उसने जोर से जूते को पलटकर लाठी से उस नाग मार दिया।

 

 

 

उस पलंग की कीमत चार सौ स्वर्ण मुद्रा बहुत ही कम लगी।  उस पलंग की वजह से कोई भी घटना राजा को समय से पहले ही पता लग जाती और उसका निवारण हो जाता।

 

 

 

 

राजा ने राज्य के उस बढ़ई की खोज करवाई और उसे आजीवन राजकोष से भरण पोषण का आदेश दिया। मित्रों यह Hindi Short Stories आपको जरूर पसंद आयी होगी, इसे आप शेयर भी जरूर करें।

 

 

 

 

हिंदी कहानी दंगल ( Story in Hindi )

 

 

 

 

2-  हरिनाथपुर गांव से पांच किलोमीटर दूर बहादुरपुर गांव में हर साल नाग पंचमी के दिन दंगल लगता था और आज नागपंचमी का दिन था तो सोहन ने अपने मित्र पंकज से कहा, ” पंकज आज नाग पंचमी है।  दंगल देखने चलोगे ? बहुत बड़ा दंगल लगता है। “

 

 

 

 

सोहन ने पंकज से कहा, ” जाना तो है, लेकिन तुम अपने साथ छोटू और राहुल को भी साथ ले चलो। क्योंकि वह दोनों कुश्ती के दांव पेंच में उस्ताद है। ”

 

 

 

 

इसपर  सोहन ने कहा, ”  मैंने उन दोनों को पहले ही कह दिया है क्योंकि बहादुरपुर के दंगल में बहुत दूर दूर से पहलवान आते है और वहां कुश्ती के शौकीनों का बहुत बड़ा जमावड़ा होता है। लिहाजा पुरस्कारों की बरसात होती है और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान दिया जाता है, क्योंकि वहां पर कुश्ती लड़वाने की जिम्मेदारी भूतपूर्व पहलवानो की रहती है। वहां सबको अपना अपना दांव पेंच दिखाने का पर्याप्त अवसर भी मिलता है और वहां पर किसी की भी दबंगई नहीं चलती अर्थात झगड़ा नहीं होता है। ”

 

 

 

 

यह सुनकर पंकज ने सोहन से कहा, ”  ठीक है तब तो हम अवश्य ही दंगल देखने चलेंगे। ”

 

 

 

 

बहादुरपुर का दंगल बहुत ही प्रसिद्ध था। वहाँ दूर दूर से नामी पहलवान आए हुए थे। आज इस दंगल की रजत जयंती वर्ष था। इसलिए इस वर्ष दंगल की राशि  हर वर्ष की अपेक्षा बहुत ज्यादा रखी गई थी और इस दंगल की खासियत यह थी कि यहाँ कोई भी पहलवान चुनौती देकर वापस नहीं जा पाता  था।

 

 

 

 

 

हरिनाथ पुर गांव से पंकज, सोहन, छोटू और राहुल पहलवान के साथ पुजारी चाचा भी आए थे जो एक भी कुश्ती लड़े बगैर ” द्रोणाचार्य ” पुरस्कार के विजेता थे।

 

 

 

 

 

छोटू पहलवान ने कहा, ” हम तो सबसे अंत में लड़ेंगे, अगर कोई चैलेन्ज देगा तब। ”

 

 

 

छोटू की बात सुनकर पुजारी चाचा ने कहा, ” उचित है  तब तक हम राहुल को चार पांच कुश्ती लड़ा देंगे। ”

 

 

 

एक पहलवान को अखाड़े में घुमाया जा रहा था पांच हजार का दांव लगा था। बोली चालू थी……छः हजार कोई नहीं आया, सात हजार अब भी कोई नहीं आया, फिर नौ हजार का इनाम रखा गया।

 

 

 

 

 

नौ हजार का इनाम सुनकर पुजारी चाचा ने कहा, ” राहुल जाओ अखाड़े में। ” इसपर राहुल ने कहा, ” नहीं एक हजार और बढ़ने दो। ”

 

 

 

 

बोली जारी रही……दस हजार, दस हजार एक, यह सुनकर राहुल दौड़ते हुए अखाड़े में गया और पान का बीड़ा उठाकर दूसरे पहलवान से हाथ मिलाया। वह दस हजारी पहलवान राहुल को विस्मय  से देखता ही रह गया। निश्चित समय पर कुश्ती आरम्भ हुई।

 

 

 

 

 

पंद्रह मिनट बीतने के बाद कोई परिणाम नहीं निकला तो निर्णायक का स्वर गूंजा, ”  यह कुश्ती अनिर्णीत है। ” इसपर राहुल ने निर्णायक से कहा, ”  सिर्फ दो मिनट दे दीजिए।”

 

 

 

 

जबकि दूसरा पहलवान पस्त हो चुका था। राहुल की बात सुनकर निर्णायक ने कहा ठीक है, दो मिनट से ज्यादा नहीं।

 

 

 

 

पुजारी चाचा ने अपने दोनों हाथों को हवा में लहराते हुए ताली बजाई। राहुल ने उनकी ओर देखा और उनका इसरा समझ गया। दर्शक कुछ समझ पाते राहुल ने सेकेंड से भी कम समय में उस पहलवान को जमीन पर पटक दिया। उसके बाद राहुल के ऊपर दर्शकों के पुरस्कार की बरसात होने लगी।

 

 

 

 

समय के साथ साथ राहुल ने ऐसे ही तीन कुश्तियों का फैसला किया। समय बीतता जा रहा था, अब बारी थी गुरुदासपुर के पहलवानों की हर वर्ष की तरह इस बार भी गुरुदासपुर के पहलवानों का दबदबा था। लेकिन इस बार वहां के पहलवानों ने अति उत्साह में आकर चैलेन्ज कर दिया था।

 

 

 

 

 

दांव लगा था छोटेलाल  पहलवान पर, इनाम पचास हजार तक पहुँच चुका था। यहां दृश्य ” तजहु आस निज – निज गृह जाहू ” हो चुका था, लेकिन विश्वामित्र गुरु पुजारी चाचा ने छोटू पहलवान रूपी राम को चैलेन्ज रूपी शिवधनुष को तोड़कर इनाम रूपी सीता का वरण कर आयोजक रूपी जनक का परिताप मिटाने की आज्ञा दी।

 

 

 

 

 

छोटू उस्ताद को ऐसे ही मौके का इंतजार था। वह उछल कर अखाड़े में आया और पान का बीड़ा उठाते हुए छोटेलाल से हाथ मिला लिया। यह दृश्य देखकर जनता के बीच सन्नाटा पसर गया। कारण छोटू का डील डौल ही कुछ वैसा था।

 

 

 

 

 

निश्चित समय से पहले ही छोटू पहलवान अखाड़े में पहुंचकर दंड बैठक करने लगा। प्रत्येक बैठक के बाद छोटू का शरीर लोहे के राड जैसा मजबूत होता गया। कुश्ती शुरू हो चुकी थी लड़ते हुए साढ़े चार बज चुके एक से एक दांव पेंच का दोनों तरफ से प्रदर्शन हो रहा था। छोटे लाल का प्रयास था कि कुश्ती अनिर्णीत होनी चाहिए कारण कि छोटू की कलाबाजी को देखकर उसे आभास हो गया था कि छोटू से पार पाना मुश्किल है। लेकिन छोटू सोच रहा था कि वह कुश्ती ही क्या जिसका कोई फैसला नहीं।

 

 

 

 

दर्शको ने भी ऐसी कुश्ती पचास साल में आज ही देखी थी। निर्णायक का स्वर, ” पांच बजने में पांच मिनट शेष है।”

 

 

 

 

गजब हो गया को ”  दंड खंडे उराम “ तुलसी वाली कहावत चरितार्थ हो गई,  अर्थात छोटेलाल धरती माता की गोंद में तारों की गणना कर रहे थे । जनता ने छोटे बादशाह को कन्धों पर उठा लिया फूलों के साथ नोटों की भी बरसात हो रही थी। यह दृश्य देखकर सब लोग छोटू पहलवान और हरिनाथ बाबा की जय बोलने लगे।

 

 

 

 

तीन पंखे का रहस्य ( Moral Stories in Hindi  )  

 

 

 

 

 

3- मित्रों हमें अपने कर्तव्यों के साथ ही उस शक्ति का भी ध्यान रखना चाहिए, जिसने इस संसार को बनाया है।  इससे हमें ना सिर्फ मानसिक शान्ति मिलती है बल्कि जीवन में परेशानियों से लड़ने की उम्मीद भी बढती है।  आज की यह Short Stories इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

हेड मास्टर आदेश श्रीवास्तव तीन Table Fans की तरफ इशारा करते हुए, सभी बच्चों से इन पंखों की गति का आकलन करने के उपरांत, उनकी Explanation के बारे में बच्चों से जानना चाहा।

 

 

 

 

उन्होंने विनोद से कहा कि, ” तीनो पंखों को चालू कर दो।” तीनो पंखे चालू हो गए। पहले वाले पंखे की गति कम  थी, दूसरे की गति मध्यम थी और तीसरे पंखे की गति तीव्रतम थी। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या उत्तर दे ?

 

 

 

 

क्लास में सन्नाटा छा गया था। शिवम ने हाथ उठाया, हेडमास्टर को लगा कि वह उत्तर देना चाहता है। हेड मास्टर ने उत्तर देने की सहमति दे दी। शिवम ने उत्तर देते हुए कहा, “सर, जो तीसरा पंखा है। वह आज की तीव्रगामी Life का प्रतीक है, क्योकि आज के समय में किसी के पास समय नहीं है।  सब भागे जा रहे है। ”

 

 

 

 

उसके बाद शिवम बोला, ” मध्यम गति का पंखा याद दिलाता है भागम भाग की जिंदगी में थोड़ा समय अपने समाज और देश को देना चाहिये और पहला कम गति वाला पंखा इस बात की याद दिलाता है कि हमें इस भाग – दौड़ की जिंदगी में से अपने देश और समाज के प्रति कर्तव्य के साथ – साथ थोड़ा सा ही कुछ समय निकाल कर उसकी याद करनी चाहिए जिसने हमें इस दुनिया में भेजा है।”

 

 

 

 

 

Moral  – कितना भी व्यस्त रहने पर भी अपने कर्तव्य का निर्वाह करने के साथ – साथ हमें God का भी स्मरण करना चाहिए, जिसने यह अनमोल जीवन दिया है।

 

 

 

 

 

                  ( Hindi Story For Kids ) 

 

 

 

 

4-एक महात्मा एक नगर से होकर जा रहे थे तभी उन्हें रास्ते में एक सोने का सिक्का मिला।  महात्मा जी तो ठहरे बैरागी और संतोष से भरे व्यक्ति इसलिए उन्होंने सोचा कि मुझे इससे क्या मतलब इसे  किसी गरीब को दे दिया जाए।

 

 

 

वे पूरे रास्ते देखते गए कि कोई गरीब तो मिले लेकिन उन्हें कोई गरीब नहीं मिला।  एक दिन वे अपने नित्यकर्म के लिए सुबह उठते हैं तो देखते हैं कि एक राजा अपनी सेना को लेकर दूसरे राज्य पर आक्रमण के लिए जा रहा था।

 

 

 

राजा ने सोचा यहां ऋषि की  कुटिया है तो उसने सोचा क्यों नहीं ऋषि से आशीर्वाद ले लिया जाए ताकि विजय निश्चित हो। इसपर वह राजा कुटी में आया और ऋषि को प्रणाम करके उसने बोला, ”  महात्मा जी मैं एक राज्य  पर आक्रमण करने जा रहा हूँ।  आप मुझे आशीष दें कि मैं उस युद्ध में विजय अवश्य पाऊं।  “

 

 

 

तब ऋषि  ने पूछा, ” अच्छा यह बताओ क्या उस राज्य से तुम्हारी कोई दुश्मनी है ? क्या उसने तुम्हारा कुछ बिगाड़ा है ?” तब राजा ने कहा, ” नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। ”

 

 

 

इस पर ऋषि बोले, ” फिर तुम हमला करने के लिए क्यों जा रहे हो ? ”  तब राजा बोला, ” मैं अपने राज्य की सीमाएं बढ़ाना चाहता हूं और इसीलिए उस पर हमला करने के लिए जा रहा हूं।  ”

 

 

 

ऋषि ने कुछ देर सोचा और उसके बाद राजा के हाथ पर सोने का सिक्का रख दिया। इस पर राजा ने कहा, ” यह क्या है ? ” इस पर ऋषि ने कहा, ” यह सिक्का मुझे एक दिन नगर भ्रमण के दौरान मिला था।  मैंने सोचा यह सोने का सिक्का मेरे किस काम का है।  मैंने सोचा इसे किसी जरूरमंद को दे दूंगा और तुम्हें देखकर मुझे लगा कि तुम से ज्यादा गरीब और जरूरतमंद कोई नहीं है और इसीलिए मैंने यह सिक्का तुम्हें दे दिया।  ”

 

 

 

ऋषि की बात सुनते ही राजा को अपनी गलती का एहसास हो गया और उसने ऋषि से क्षमा मांगी और उसने युद्ध का विचार त्याग दिया और अपने राज्य वापस लौट गया और अपनी प्रजा की सेवा करने लगा।

 

 

 

Hindi Short Story With Moral For Hindi Students

 

 

 

 

5- मित्रों सिर्फ काम ही करो, हर वक्त काम करो यह ठीक नहीं है।  आप काम करो और उसका लाभ भी लो।  आज की यह कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

मेरे Father बहुत ही Hardworking थे। मुसीबत के समय उन्होंने हमें संभालने के लिए बहुत hard work किया।  दिनभर काम करने के बाद शाम को Classes में भाग लिया।

जिससे उन्हें काम की अच्छी Information हो जाए और अच्छे payment वाली job मिल सके। मुझे बेहतर याद है कि Sunday को छोड़कर शायद ही उन्होंने हमारे साथ भोजन किया हो।
उन्होंने बहुत मेहनत की और पढ़ाई की, क्योंकि वह अपने परिवार को एक खुशहाल जीवन देना चाहते थे। जब भी परिवार ने शिकायत की कि वह उनके साथ पर्याप्त समय नहीं बिता रहें हैं।
इसपर उनका एक ही जवाब रहता, ” यह सब family के लिए ही तो कर रहा है  . ” परन्तु  reality यह थी कि वह भी family के साथ रहना चाहते थे।
Exam के Result का दिन आ गया. उनकी Hard Work रंग लायी। उन्होंने बहुत ही अच्छे Numbers से परीक्षा पास की। उन्हें वरिष्ठ पर्यवेक्षक की नौकरी मिली और एक अच्छी Payment भी।
यह उनके लिए Dreams के सच होने जैसा था।  अब वे Family को  Good life दे सकते थे। जिसके लिए उन्होंने Hard Work  की थी। हालाकि अभी परिवार को उनके साथ समय बिताने का ज्यादा Time नहीं मिल पा रहा था।
क्योंकि अब वे .. प्रबंधक के पद पर Promote होने की उम्मीद करते हुए Hard Work कर रहे थे। उन्होंने खुद को पदोन्नति के लिए योग्य उम्मीदवार बनाने के लिए  University में एक और पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया।
इस बार भी उनकी Hard Work रंग लायी और उन्हें प्रमोशन मिल गया।  उन्होंने मां को घरेलु कार्यों से मुक्त करने के लिए एक नौकरानी रखने का फैसला लिया और उन्होंने 3 BHK का एक बड़ा घर भी खरीदा। अब Life और भी बढ़िया और सुविधाजनक हो गयी थी.
लेकिन उन्होंने इसे और आगे बढाने का फैसला लिया और भी अधिक  Promotion के लिए उन्होंने और भी Hard Work शुरू कर दी। मां के यह कहने पर की ” हमारे साथ भी Time Spend किया करो ” उनका वही डायलाग रहता कि यह सब तुम सभी लोगों के लिए ही तो कर रहा हूँ.
उन्होंने इसके लिए फिर से Hard Work  शुरू की और उन्हें Success मिली। इस बार उन्होंने एक बहुत ही बड़ा घर लिया और एक Car भी ली. अब उन्होंने यह निश्चित किया कि अब वे परिवार के साथ ही समय बितायेंगे। अब और मेहनत नहीं करेंगे।
उनके इस फैसले से हम very happy थे, लेकिन जल्द ही हमारी ख़ुशी ख़त्म हो गयी।  Dad की तबियत बहुत खराब हो गयी और उन्होंने Hospital पहुंचाया गया और वहाँ उनकी Death हो गयी।

डाक्टर ने बताया कि बहुत Hard Work  की वजह से उन्हें काफी Weakness हो गयी थी। अब हमें यह समझ आ रहा था कि आखिर वे ऐसा क्यों कहते थे कि ” यह सब तुम्हारे लिए ही तो कर रहा हूँ ” .  इस कहानी से यही सीख मिलती है कि पैसा कमाना बहुत ही अच्छी बात है।  हर कोई पैसा कमाना चाहता है, लेकिन अपनी सेहत का ध्यान देना भी बहुत आवश्यक है। 

New Story in Hindi ( कबीर जी की सलाह ) 

6-संत कबीर रोज सत्संग करते थे. उसमें बहुत सारे भक्त आते थे और उसको अमल करके अपने जीवन को Success बनाते थे. एक दिन की बात है रोज की तरह ही संत कबीर प्रवचन दे रहे थे.

सत्संग के खत्म होने पर सभी भक्त गण अपने अपने घरों की ओर चल दिए, लेकिन एक व्यक्ति वहीँ बैठा रहा. जब कबीर ने उससे पूछा कि क्या हुआ, क्यों परेशान हो… सभी लोग चले गए लेकिन तुम क्यों नहीं गए…किस बात की परेशानी है?
 तब उस व्यक्ति ने कहा कि मुझे आपसे कुछ पूछना है. मैं एक गृहस्थ हूँ. घर में हमेशा ही आपस मे झगडा होता रहता है जिससे घर का माहौल हमेशा ही ख़राब रहता है. मैं आपसे इसका हल जानना चाहता हूँ कि कैसे इसे सुलझाया जा सके.
कबीर जी कुछ समय तक शांत रहे. फिर उसके बाद अपनी पत्नी को कहा की लालटेन जलाकर लाओ. इस पर कबीर की पत्नी ने लालटेन जलाकर ले आयीं. इस पर वह आदमी एकदम से हैरान रह गया की इस भरी दोपहरी में कबीर जी ने लालटेन क्यों मंगवाई ?
इसके बाद संत कबीर ने अपनी पत्नी से कहा कि कुछ मीठा लेकर आओ. इसपर उनकी पत्नी ने मीठे की जगह नमकीन लाकर दे दिया . इस पर उस आदमी ने मन ही मन कहा कि कैसे लोग हैं मीठे के बदले नमकीन और दिन में यहाँ तक की भरी दोपहर में लालटेन.
इस पर उस आदमी ने खीझकर कहा कि यह सब क्या है. मैं तो अपनी समस्या के समाधान के लिए यहाँ आया था और आपने यह सब दिखा दिया . इससे तो मैं और भी परेशान हो गया.
इस पर संत कबीर मुस्कुराए और कहा कैसे ही मैंने लालटेन मंगवाई तो मेरी पत्नी कह सकती थी की तुम्हें हो क्या गया है भरी दोपहरी में लालटेन मगवां रहे हो, लेकिन उसने कुछ नहीं.
चुपचाप लालटेन लाकर रख दी. उसी तरह जब मैंने मीठा मंगवाया तो उसने नमकीन ला दी तो मैं यह सोचकर चुप रहा कि हो सकता है घर में कोई मीठा ना हो.
अब वह व्यक्ति सबकुछ समझ गया. कबीर ने कहा गृहस्थी में आपसी विश्वास से ही तालमेल बनता है. आदमी से गलती हो तो औरत संभाल ले और जब औरत से गलती हो तो आदमी संभाल ले. यही गृहस्थी का मूल मन्त्र है.

Hindi Story For Children ( दो मूर्खों की लड़ाई ) 

 

 

7-  ज्येष्ठ मास की तपती हुई दुपहरी में राघव सायकल से अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रहा था। गर्मी से बेहाल होकर वह एक वृक्ष के निचे ठहर गया।  उसे थोड़ी राहत महसूस हुई और उसे नींद आ गई और वह स्वप्न में खो गया।

उसने स्वप्न में हाथियों का एक झुण्ड देखा जो आपस में जलक्रीड़ा कर रहे थे। उसमे एक हाथी बहुत विशाल था जो उन लोगों सरदार था। उसे अपने बल पर बहुत घमंड था।
जल क्रीड़ा के उपरांत सभी हाथी एक साथ बाहर निकले और हाथियों का सरदार सबसे पीछे बाहर निकला, और उन्मुक्त चाल से उन हाथियों के पीछे चल दिया।
कुछ दूर जाने के बाद उसे रास्ते में दो लंगूर आपस में लड़ते हुए दिखे।  हाथियों के सरदार ने उनसे पूछा, ” आप लोग आपस में क्यों लड़ रहे हो ? ?
एक लंगूर ने जवाब दिया, ” इसने हमारी आम से भरी टोकरी छीन ली है। “
यह सुनकर हाथी ने कहा, ” अगर यही बात है तो मैं तुम्हे आमों से भरी  हुई दूसरी टोकरी दूंगा।तुम लोग आपस में लड़ना बंद करो। “
” तुम कौन होते हो हमें उपदेस देने वाले ? हम लोग अपना फैसला स्वयं कर लेंगे।” यह कहकर  दोनों लंगूरों ने उस हाथी के उपर ही हमला कर दिया। कोई इधर से मारता तो उधर से।  हाथी किसी तरह वहां से जान बचाकर भागा। मुझे उम्मीद है कि आप यह Hindi Short Stories जरूर पसंद किये होंगे।
Moral – दो मूर्खों की लड़ाई में कभी नहीं उलझना चाहिए, अन्यथा हाल हाथी जैसा हो सकता है। 
Moral Of The Story – Two fools should never get into a fight.

Short Stories With Moral Values 

8- रामू पढ़ने में बहुत होशियार था, लेकिन वह अपनी कक्षा में प्रथम स्थान नहीं प्राप्त कर पाता था। परीक्षा नजदीक आ गई थी।  रामू उदास था। उसे उदास देखकर उसकी माँ ने उसका कारण पूछा, तो रामू ने अपनी माँ को सब बातें बता दी कि कैसे स्कूल में सभी लड़के उसके मजाक उड़ाते है। रामू की माँ ने कहा, ” इसमें Sad होने की क्या बात है ? तुम अपने अंदर थोड़ा सुधार करो अर्थात किसी भी विषय को पूर्ण रूप से पूरा करने के बाद ही दूसरे Subject के लिए प्रयास करो। “
रामू ने अपनी माँ की आज्ञा को शिरोधार्य कर पढाई शुरू कर दी। परिणाम उसके सामने था। वह अपने कक्षा में बहुत ही अच्छे नंबर के साथ प्रथम आया।
Moral – किसी भी कार्य को बीच में अधूरा छोड़ देने से असफलता ही हासिल होती है। इसिलिये किसी भी कार्य को अधूरा ना छोड़े। 

 

 

 

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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