Hindi Stories with Moral Values Pdf / सबसे सुखी कौन हिंदी की 4 कहानियां

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Hindi Stories with Moral इस पोस्ट में Hindi Stories Moral की ४ Hindi Stories with Moral दी गयी है।  सभी Hindi Kahaniya बहुत ही शिक्षाप्रद है।  

 

 

 

 

नकारा राजा ( Long Hindi Stories with Moral

 

 

 

 

1- एक बहुत बड़े  दार्शनिक  अपने शिष्यों को साथ लेकर पहाड़ी रास्ते से गुजर रहे थे, तभी उन्हें एक महिला का करुण क्रंदन सुनाई दिया। वे उस आवाज की तरफ आगे बढ़ें।

 

 

 

 

कुछ दूरी पर उन्हें एक महिला रोते हुए दिखाई दी। उनहोंने उनसे रोने का कारण पूछा, तो महिला ने बताया, ” इसी जगह पर एक जंगली जानवर ने मेरे बेटे को मार डाला और यह कहकर और भी जोर से फफक – फफककर रोने लगी। ”

महिला का करुण क्रंदन सुनकर सबका मन दुखी होने लगा।  अपने मन को शांत करते हुए दार्शनिक ने उस महिला से कहा, ” बेटी, तुम्हारा परिवार कहाँ पर हैं ? क्या तुम यहां पर अकेली रहती हो ? “
यह सुनकर उस महिला ने रोते हुए कहा, ” मेरा पूरा परिवार इसी पहाड़ी पर रहता था।  कुछ ही दिन पहले जंगली जानवर ने हमारे परिवार को एक – एक करके मार डाला। “
इस दार्शनिक ने बड़े आश्चर्य से कहा, ” इतना कुछ हो जाने पर भी तुमने यह पहाड़ी क्यों नहीं छोड़ी ? यह पहाड़ी तो बहुत ही खतरनाक है। ” इसपर उस महिला ने रोते हुए कहा, ” यह जगह तो उस अत्याचारी राजा से तो ठीक है।  यहां हम तो एक दिन मरेंगे, लेकिन वहाँ तो हमें रोज -रोज मरना होगा। “
महिला का जवाब सुनकर दार्शनिक खामोश हो गए।  कुछ देर शांत रहने के पश्चात उन्होंने कहा, ” आज आपने हमें एक ऐसे कटु सत्य से अवगत कराया है, जो इस समाज को खोखला कर रहा है।  निश्चित तौर पर ऐसे राजा को राज्य की जनता को एकजुट होकर हटा ही देना चाहिए। “
उसके बाद दार्शनिक ने राजा को हटाने की मुहीम शुरू की।  उन्हें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।  यातनाएं साहनी पड़ी, परन्तु अंत में विजय उनकी ही हुई, क्योंकि कहा गया सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता। 

सच्चा सुख Hindi Kahani 

Hindi Stories With Moral

2- एक गाँव के मंदिर में एक ब्रह्मचारी रहते थे ।  लोभ, मोह से परे वह अपने में मस्त रहते थे। हालांकि कभी – कभी उनके मन में एक विचार आता था, ” इस दुनिया में सबसे अधिक सुखी कौन है ? “

 

 

 

 

एक दिन एक अमीर आदमी उस मंदिर में दर्शन हेतु आया।  उसने बहुत अच्छे कपडे पहने थे और गले में मोटी – मोटी सोने की चैन थी।  ब्रह्मचारी ने सोचा, ” यही सबसे सुखी आदमी होगा। ”

 

 

 

 

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उसने जिज्ञासावश उस अमीर आदमी से इस बारे में पूछा तो उसने कहा, ” मैं तो बड़ा दुखी हूँ।  शादी के १० वर्ष हो गए और अभी तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ।  हमेशा यही चिंता रहती है कि मेरी संपत्ति का वारिस कौन होगा ? पड़ोस के गाँव में एक पंडित जी हैं।  मुझे लगता है कि वही सबसे सुखी हैं। ”

 

 

 

ब्रह्मचारी को जिज्ञासा हुई तो वह उन पंडित से मिलाने गए।  वहाँ पंडित जी ने कहा, ” भाई, मैं कहाँ सुखी हूँ।   दिन – रात करके विद्यार्जन किया, लेकिन उस विद्या की बल मुझे भरपेट भोजन भी नहीं मिल पाता है। पड़ोस के एक गाँव में नेता जी रहते हैं, वही सबसे सुखी आदमी हैं। ”

 

 

 

 

ब्रह्मचारी जी वहाँ गए और नेता जी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ” मेरे पास सब कुछ है।  मान है, सम्मान है, नाम है, लेकिन बहुत से लोग मेरी निंदा करते हैं।  मैं कुछ भी करू लोग उसमें कोई ना कोई बुराई ढूढ़ लेते हैं। यहां से कुछ गाँव दूर लगभग ४ गाँव दूर एक मंदिर में एक ब्रह्मचारी रहते हैं वे ही सबसे सुखी हैं। ”

 

 

 

ब्रह्मचारी अपना वर्णन सुनकर बड़ा लज्जित हुआ और वापस मंदिर पहुँच कर सुखी से रहने लगा। उसे यह बात समझ आ गयी कि सच्चा सुख लौकिक सुखों में नहीं है बल्कि वह तो लौकिक चिंताओं से मुक्त अलौकिक की निः स्वार्थ उपासना में बसता है। समस्त भौतिकता से परे आत्मिकता को पा लेना ही सच्चे सुख व आनंद की अनुभूति कराता है।

 

 

 

३- एक साधू स्वामी विवेकानंद जी के पास आये।  उन्होंने विवेकानंद को प्रणाम किया और कहा, ” मैं एक विशेष कार्य आया हूँ। ” विवेकानंद जी पूछा, ” बोलिये, क्या विशेष कार्य है ? “

 

 

 

साधू ने कहा, ” स्वामी जी, मैंने सब कुछ त्याग दिया।  मोह माया के बंधन से छूट गया हूँ।  फिर भी मुझे शान्ति नहीं मिल रही है। मन हमेशा इधर – उधर भटकता रहता है। मैंने इस बारे में बहुत कोशिश की लेकिन मैं इसमें सफल नहीं हो पाया। ” इतना कहकर वे रोने लगे।

 

 

 

तब स्वामी जी ने कहा, ” क्या आप सच में शान्ति पाना चाहते हैं ? ” साधू ने कहा, ” जी, स्वामी जी।  तभी तो आपके पास आया हूँ।

 

 

 

इसपर स्वामी जी ने कहा, ” ठीक है।  मैं आपको एक सरल मार्ग बताता हूँ। इतना जान लो कि सेवा धर्म ही सबसे महान है। घर से निकालो और भूखों, गरीबों, दीम – दुखियों की हर तरह से सेवा करो।  सेवा द्वारा मनुष्य का अंतःकरण जितना जल्दी निर्मल हो जाता है, उतना किसी अन्य कार्य से नहीं होता है। ऐसा करने से आपको शान्ति मिलेगी।

 

 

 

 

साधू एक नए संकल्प के साथ वहाँ से चला।  उसे समझ आ गया था कि मानव जाती की निस्वार्थ सेवा से मनुष्य को शान्ति प्राप्ति हो सकती है।

 

 

सच्ची सेवा ( Hindi Stories with Moral Pdf ) 

4- एक बार एक साधु अपने कुछ शिष्यों के साथ भ्रमण पर निकले थे. चलतेचलते दोपहर हो गयी. गर्मी का मौसम था, सूरज आग बरसा रहा था, पृथ्वी आग का गोला बनी हुई थी, ना तो ऊपर से राहत थी और ना ही नीचे से.

 

 

 

 

साधु और उनके सभी शिष्य पसीने से तरबतर हो गयी थे और उन्हें प्यास भी लगी थी. अचानक उन्हें एक गांव नज़र आया, उन्होने उसी गांव कुछ समय रुक कर विश्राम करने का निर्णय किया. कुछ ही समय में वे गांव के पास गये, वहां एक शिवमंदिर था. उन्होने अपने शिष्यों को इसी मंदिर पर रुकने का आदेश दिया.

 

 

 

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शीतल हवा बह रही थी. सभी लोगों ने वहाँ लगी नल से पानी पीया और कुछ देर  विश्राम करने का निर्णय किया. थकान और शीतल हवा के कारण सभी को नींद आ गयी.

 

 

कुछ समय पश्चात उधर से एक राहगीर गुजरा. उसने जब इतने सारे साधुओं को मंदिर के पास विश्राम करते हुए देखा तो जाकर पुरे गाँव में इसे बता दिया.

 

 

 

गाँव के लोग बहुत ही उत्तम विचार के लोग थे. सदा ही दीं दुखियों की मदद करते थे. आपस में किसी प्रकार का वाद – विवाद नहीं होता था और अगर होता भी था तो उसे आपस में सुलझा लिया जाता था.

 

 

 

यह खबर सुनकर गांव के मुखिया श्री रामविहारी जी अन्य गांव वालों के साथ उन साधुओं के स्वागत के लिए मंदिर की ओर प्रस्थान किए. मंदिर में बढ़ते शोरगुल से साधु और उनके शिष्यों की निद्रा भंग हो गयी,

 

 

 

वे लोग उठ गये. इस पर मुखिया जी हाथ जोड़कर साधु महाराज से क्षमा माँगी और आज रात इसी मंदिर पर रुकने का निवेदन किया. साधु महाराज मान गये.

 

 

 

रात को मंदिर पर पूरा गांव जुट गया. बाटी चोखा का कार्यक्रम रखा गया. देर रात तक भजन कीर्तन होता रहा. बातबात में मुखिया जी कहा कि हे साधु महाराज कल यहां एक मेला लगाने वाला है, जो कि हर साल लगता है,

 

 

 

 

इस बार आप भगवान की कृपा से यहां पधारे हैं तो मेला देखकर ही जाएं. साधु महाराज मुखिया जी और गांव वालों से बड़े प्रसन्न थे, उन्होने हां कह दी.

 

 

 

 

मेले की तैयारियां तो रात से ही प्रारंभ हो चुकी थी. दूरदूर से बड़ेबड़े व्यापारी आने शुरू हो चुके थे. सुबह हुई बड़ी संख्या में व्यापारी चुके थे और बहुत सारे भी रहे थे. मुखिया जी ने साधु को बताया कि यह मेला दोपहर से शुरू होता है और देर रात तक चलता है.

 

 

 

 

दोपहर का वक्त गया था, मेला पूरी तरह सज चुका था, कहीं पर झूले, कहीं पर पीपिहीरी की पींपीं सुनाई दे रही थी. जैसेजैसे शाम की बेला रही थी, मेले की रौनक बढ़ती ही जा रही थी.

 

 

 

साधु ने मुखिया जी से मेले में घूमने का आग्रह किया, इस पर मुखिया ने कहा कि मैं स्वयं आपको मेले का भ्रमण कराऊंगा. मुखिया जी उनके साथ गांव के कुछ विशिष्ट लोग और साधु तथा उनके शिष्य मेले के भ्रमण के लिए निकल पड़े.

 

 

 

 

मेला अपनी भव्यता पर था. मेले में घूमते हुए साधु की नजर एक और साधु पर पड़ी. साधु महाराज ने देखा कि मेले में बैठे साधु आंख बंद करके माला फेर रहे थे, लेकिन माला फेरते हुए वे बारबार आंखें खोलकर देख रहे थे कि लोगों ने चढ़ावा कितना दिया. अगर कोई कम देता तो वे अपना मुंह बिचका लेते थे. यह देख साधु महाराज हंस दिए और बढ़ गये.

 

 

 

 

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आगे उन्होने देखा की एक पंडित महाराज लोगों की हाथ देख रहे थे. लेकिन उनका हाथ पर कम दक्षिणा पर ज्यादा ध्यान था. वे उन लोगों का भाग्य बहुत बढ़िया बता रहे, जो उन्हें ज्यादा पैसा दे रहा था.

 

 

 

उन्हें देखकर साधु महाराज खिलखिलाकर हंस पड़े. आगे बढ़ने पर उन्होने देखा कि एक स्वयं सेवी संस्था बीमार, लाचार लोगों को मुफ्त में दवा दे रही थी और उनके घाव या अन्य बीमारियों का इलाज भी कर रही थी. साधु महाराज वहां कुछ देर रुके, उनके कार्यों को देखते रहे कि कैसी तल्लिनता और सेवाभाव से अपना कार्य कर रहे थे. यह देख उनकी आंखों में आँसू गये.

 

 

जब पूरे मेले का भ्रमण कर वे वापस मंदिर आए तो मुखिया जी ने मेले में दो जगह हंसने और एक जगह तने शांत भाव से देखने का कारण पूछा,

 

 

 

इस पर साधु ने कहा बेटा उन दोनों जगहों पर जहां मैं हंसा वहां तो धर्म के नाम पर बस आडंबर हो रहा था.  सिर्फ  स्वयंसेवी संस्था और उसके लोग सच्ची सेवा कर रहे थे।  उनकी  सेवा भावना देख कर मेरा हृदय द्रवित हो गया.

 

 

इस पर मुखिया जी उस स्वयंसेवी संस्था के प्रत्येक सभासदों और उससे जुड़ें लोगों को सम्मानित करने का निर्णय लिया और उन्हें साधु महाराज के हाथों सम्मानित किया गया. उसके बाद साधु हराज ने भी गांव वालों से विदा ली और उन्हें बहुत आशीर्वाद देकर वहां से प्रस्थान किया.

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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