Hindi Story Telling Competition for Class 3 / हिंदी की शिक्षाप्रद कहानियां

Hindi Story Telling Competition for Class 3

Hindi Story Telling Competition for Class 3 पाठकगणों इस पोस्ट में Hindi Story Telling Competition for Class 3 की बहुत ही बढियाँ कहानियां दी गयी हैं।  आप Moral Story in Hindi For Class 3 की कहानियां जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

अच्छी सीख ( Hindi Story Telling Competition for Class 3 Pdf ) 

 

 

 

 

 

परी लोक में एक परी थी।  उसका नाम था नटखट परी।   जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है वह बहुत ही शरारती थी। वह हमेशा परियों को परेशान करती रहती थी।  छोटी होने के कारण कोई उसे कुछ नहीं बोलता था। एक  दिन की बात है उसने देखा दो परियां फूलों में पानी दे रही है।  नटखट परी को शरारत सूझी।

 

 

 

 

वह चुपके से गयी  और दोनों परियों की चोटी  आपस में बांध दी। काम खत्म होने के बाद जैसे ही परिया वापस मुड़ी  उनके  बाल खींच गए  और वे रोने  लगी।

 

 

Hindi Story Telling Competition for Class 3

 

 

 

 

 

उन्होंने इसकी शिकायत रानी परी से की।  रानी परी ने नटखट परी को समझाया, ” ऐसा नहीं किया जाता है।  ” नटखट परी कुछ नहीं बोली वह शांत रही  लेकिन उसकी शरारत  कम नहीं हुई।

 

 

 

 

 

एक  दिन की बात है। एक परी खाना बना रही थी तब तक वह नटखट परी वहां  पहुंच गई।  परी को लगा आज नटखट परी कुछ गलत करेगी।लेकिन नटखट परी ने बड़े ही प्रेम भाव से उससे कहा, ” क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूं ? ” खाना बना रही परी को बड़ा ही आश्चर्य हुआ।

 

 

 

 

उसने सोचा भला नटखट परी मदद करने की बात कर रही है। लगता है रानी परी की डांट का असर है। तब उसने कहा ठीक है सब्जी में तुम नमक डाल दो तब तक मैं पानी पीकर आती हूं।

 

 

 

 

यह कहकर परी पानी पीने के लिए गई तो नटखट परी ने सब्जी में खूब ढेर सारा नमक डाल दिया।  शाम को जब सभी परियां  खाना खाने के लिए बैठी तो सब्जी में नमक ज्यादा था।

 

 

 

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यह देख रानी परी गुस्से से बोली, ” आज सब्जी में नमक इतना ज्यादा कैसे हो गया ? ”  इस पर खाना बनाने वाली परी ने कहा, ” यह सब नटखट परी का काम है। उसने ही आकर मुझसे काम करने के लिए कहा और जब मैं पानी पीने के लिए गई तो उसने सब्जी  में नमक ज्यादा डाल दिया।  “

 

 

 

 

यह बात सुनकर रानी परी को बहुत गुस्सा आया।  उसने सोचा अब नटखट परी को सबक सिखाना ही पड़ेगा। उसके बाद उसने एक छोटा बॉक्स लिया और उसे लेकर बाग़  में आई जहां सभी परियां  मौजूद थी।

 

 

 

 

उसने सभी परियों से कहा यह एक जादुई बक्सा है कोई भी इसे बिना मेरे इजाजत के ना खोलें।  सभी परियों  ने हां कहा और वहां से चली गई।लेकिन नटखट परी तो थी ही शरारती। उसने सोचा, ” देखा जाए तो इस बक्से में क्या है ?”  यह सोचकर उसने बक्सा खोल दिया।

 

 

 

 

बक्सा खुलते ही उसमें से छोटे-छोटे भूत निकले नटखट परी को परेशान करने लगे। कोई नटखट परी के बाल खींचता तो कोई उसे थप्पड़ मार देता तो कोई उसकी चिकोटी करता।

 

 

 

 

नटखट परी परेशान हो गई और जोर जोर से रोने लगी।  तभी वहां पर सब परियां  आ गई।  ” मैंने तो मना किया था बॉक्स खोलने के लिए तुमने फिर क्यों खोला ? ” रानी परी ने कहा।

 

 

 

 

नटखट परी ने माफी मांगी। उसके बाद रानी परी ने कहा, ” अब तुम्हें समझ में आ गया होगा कि तुम जब किसी और को परेशान करती हो तो उसे कितनी तकलीफ होती है।  ”

 

 

 

 

नटखट परी ने कहा, ” अब मुझे समझ में आ गया है। अब मैं किसी को परेशान नहीं करूंगी। मैं माफी मांगती हूं। ” उसके बाद रानी परी ने जादू से उस बॉक्स को बंद कर दिया और  भूत उसमें समा गए।  उसके बाद से  नटखट परी एक अच्छी परी की तरह रहने लगी।

 

Moral Of This Story – जब तक चोट खुद को ना लगे दर्द महसूस नहीं होता है।  इसीलिए बच्चों को कभी – कभी चोट देना भी आवश्यक हो जाता है। 

 

 

 

 

 

बिना सोचे – समझे कोई काम ना करें ( Hindi Story Telling Competition for Class 3 ) 

2- बहादुर सिंह चित्र नगरी के राजा थे। नाम तो बहादुर सिंह था लेकिन किस्मत के बहुत ही कमजोर थे। इसका कारण यह था कि उन्हें कोई भी संतान नहीं थी।

 

 

 

एक – एक करके उन्होंने छः शादियां की, लेकिन किसी भी रानी की गोंद नहीं भरी। राजा के मन में विचार आया कि एक और शादी करके देखता हूँ, शायद हमारा वंश चल जाये और राज्य को उसका उत्तराधिकारी मिल जाये ।

 

 

 

राजा ने एक गरीब कन्या के साथ सातवीं शादी बड़े ही धूम धाम के साथ की । ईश्वर की कृपा हुई और सातवीं रानी का पांव भारी हो गया। राजा “बहादुर सिंह” बहुत ही आनंदित थे। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि ‘ चित्र नगरी को उसका उत्तराधिकारी ‘ मिल जाएगा। राजा के चेहरे पर चमक देखकर बाकी  रानियों की नींद उड़ गई।

 

 

 

 

उन्होंने आपस में बात किया  कि छोटी को बच्चा हुआ तो राजा की नजर में हमारी इज्जत कम हो जाएगी, इसलिए सभी छः रानियों ने विचार बनाया कि ” संतान पैदा होते ही ” उसे पानी में बहा दिया जाएगा और उसकी जगह ‘ ईंट और पत्थर ‘ रख दिया जाएगा।

 

 

 

 

कुछ दिनों बाद भगवान की कृपा से सबसे छोटी रानी को दो बच्चों का आशीर्वाद मिला।  उसमें एक लड़का था और एक लड़की । रानी प्रसव पीड़ा से बेहोश हो गयी थी।  मौक़ा देखकर बाकी रानियों ने मिलकर उन बच्चों को ‘ सूप ‘ में रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया और  रानी के पास ” एक ईंट और एक पत्थर का टुकड़ा ” लाकर रख दिया।

 

 

 

 

 

जब छोटी रानी को होश आया तब उसने अन्य रानियों से पूछा, ”  हमारे बच्चे कहाँ है ? ” सबने एक स्वर में उत्तर दिया, ”  तूने तो  ‘ ईंट और पत्थर ‘ को जन्म दिया है।  ”

 

 

 

 

उसके बाद  सब रानी राजा के पास जाकर छोटी के खिलाफ कान भर दिया।  राजा भी कान का कच्चा आदमी रानियों के ऊपर विश्वास कर लिया और छोटी रानी को पूरे राज्य से कौवा उड़ाने का हुक्म दे दिया।

 

 

 

 

 

उधर दोनों बच्चे ‘ सूप ‘ में बहते हुए जा रहे थे और उस ‘ सूप ‘ में उनके हँसने की किलकारी गूंज रही थी, मानो भगवना के फैसले पर हँस रहे थे।

 

 

 

“उसी राज्य की एक ‘ निःसंतान दंपत्ति  घाट पर कपड़ा धो रहे थे। उनका नाम श्याम और सलोनी था। उन लोगों ने बहते हुए ‘ सूप ‘ से बच्चों की किलकारी सुनी तो वे अवाक्  रह गए। श्याम  जब तक कुछ कहता उसकी औरत सलोनी  पानी में छलांग लगा चुकी थी। वह बहुत ही कुशल तैराक थी।

 

 

 

 

जब वह बाहर आई तो उसके साथ ‘ सूप ‘ में दो बच्चों को देखकर ‘ श्याम  ‘ के ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।  उस ” निःसंतान दम्पति ” को ईश्वर का अनमोल ‘ उपहार ‘ मिला था। उन्होंने बच्चों को रख  लिया। जिस दिन से बच्चे उसके  घर आए, उस दिन से उसके  के घर में ‘ लक्ष्मी ‘ की असीम कृपा हो गई थी।

 

 

 

 

एक दिन ‘ कौवा हकनी ‘ कौवा उड़ाते -उड़ाते उसी धोबी के दरवाजे के पास से  जा रही थी। दोनों बच्चे वहीं पर खेल रहे थे और छोटी रानी को देखकर उसके पास जाकर तोतली जबान में बातें करने लगे।

 

 

 

 

 

जैसे मरुस्थल में हिरन पानी ढूढ़ता है। चातक पंछी को जैसे स्वाती नक्षत्र की बूंद का इंतजार रहता है। छोटी रानी ने अपनी दोनों बाहें फैला दी बच्चे उसी में समा गए। अपनापन अपने को पहचान ही लेता है।

 

 

 

 

भीतर से सलोनी निकली और उसने कौवा हाँक रही छोटी रानी को डांटकर भगाने  लगी।  यह सब श्याम बरामदे से सब देख रहा था। वह  अपनी औरत को झिडकते हुए बोला, ”  तू तो इसे ऐसे भगा रही है, जैसे इन बच्चों को तूने जन्म दिया  है। ”

 

 

 

 

“तुम चुप रहो जी ” सलोनी  कड़क कर  बोली तो बिचारा पति चुप हो गया।  उसके बाद सलोनी ने रानी से बच्चों को छीन लिया। इसपर बच्चों ने मचलते हुए कहा, ”  तुम फिर आना आंटी।  हम तुम्हारे साथ खेलेंगे। ”

 

 

 

बेचारी छोटी रानी के आखों में आंसू आ गए।  आंसू पोछते हुए वह वहां से चली गयी। कुछ दिन के उपरांत लड़का और लड़की थोड़ा बड़े हुए  तो श्याम और सलोनी से जिद करने लगे, ” हमें दो काठ का घोड़ा लाकर दीजिए। हम अपने घोड़े के साथ खेलेंगे। ”

 

 

 

 

बच्चों की बात सुनकर श्याम और सलोनी सोच में पड़ गए। दोनों को सोचता देख कर लड़की तपाक से बोली, ” आप लोग हमें अपना बच्चा नहीं मानते है, इसलिए घोडा लाने में आना – कानी कर रहे है। ”

 

 

 

 

“अरे नहीं बेटा तुम लोग हमारे ही बच्चे हो। ” श्याम सलोनी एक साथ बोले। ” अगर हम आपके बच्चे है तो आप हमें कल तक घोड़ा लाकर दीजिए। उसके बाद हम आपसे कुछ नहीं मांगेगे। ” दोनों बच्चे एक साथ बोल उठे।

 

 

 

दूसरे दिन दोनों बच्चे घोड़ा पाकर बहुत ही खुश हुए और घोड़ा लेकर नदी के किनारे खेलने निकल गए। नदी के दूसरे किनारे पर राजा की सभी छः रानियां घूमने के लिए आई हुई थी। मझली रानी ने उन बच्चों को देखकर कहा, ” देखो कितने सुन्दर बच्चे है। ”

 

 

 

 

बच्चे अपने खेल में मगन थे और  ” काठ का घोड़ा , पाट की लगाम , घोड़ा जल्दी पानी पी  ” दोनों बच्चे बार -बार यही शब्द दुहरा रहे थे।  सभी रानी दूसरे दिन भी घूमने गई तो बच्चे वहां खेल रहे थे और वही वाक्य दुहरा रहे थे।

 

 

 

 

दोनों बच्चों की बात सुनकर सभी रानियां एक साथ बोल पड़ी, ” बड़े ही बुद्धि हीन बच्चे है, जो काठ के घोड़े को पानी पीला रहे है। क्या काठ का घोड़ा भी कभी पानी पीता है? ”

 

 

 

 

” सही कह रही है आप लोग।  आप लोग औरत होकर भी नहीं समझ सकीं , हम तो बच्चे है।  आप लोगों के अनुसार अगर कोई औरत ” ईंट और पत्थर ” पैदा कर सकती है। तो काठ का घोड़ा पानी क्यू नहीं पी सकता है ? ” बच्चों ने गुस्से से कहा।

 

 

 

 

सभी रानियां निरुत्तर होकर चली आई और आते ही कोप भवन में चली गई। राजा जब दरबार से आए तो नौकरो द्वारा सारा वृतांत जानकर ” स्तब्ध “रह गए।

 

 

 

 

बच्चों  ने राजा की आंखे खोल दी। फिर रानियों के पास जाकर पूरा वृतांत सुना। रानियों ने कहा, ” जब तक बच्चों को सजा नहीं दी जायेगी तब तक हम बाहर नहीं आएंगे। ”

 

 

 

 

राजा के सैनिक श्याम के घर गए और पूछा, ”  तुम्हारे बच्चे कहाँ हैं। उन्हें राजा ने बुलाया है। तुम अभी राजा के सामने चलो , नहीं तो गंभीर सजा मिलेगी। ”

 

 

 

 

” मैं सब समझ गया,  अभी आप लोगो के साथ बच्चों को लेकर चलता हूँ। ” श्याम ने सिपाहियों से कहा।

 

 

 

 

” क्या यह तुम्हारे अपने बच्चे है ?  राजा की आवाज दरबार में गुंजी। उसके बाद धोबी ने भरी सभा में पूरा ” वृतांत ” कह सुनाया।  राजा ने बच्चों से पूछा, ” क्या तुम लोगो ने रानी की बेइज्जती की ?”

 

 

 

 

नहीं ” राजा साहब ! हमने तो ‘ महारानियों ‘ के प्रश्न का उत्तर दिया। महारानियों ने कहा बुद्धिहीन लड़के क्या काठ का घोड़ा पानी पी सकता है।तो हमने कहा – कि आपके राज्य में अगर कोई औरत ईंट पत्थर  को जन्म दे सकती है तो काठ घोड़ा पानी क्यूं नहीं पी सकता ? ” बच्चों ने कहा।

 

 

 

राजा को सभी रानियों के वह शब्द याद हो उठे। जब राजा को बताया गया था कि छोटी रानी को ” ईंट और पत्थर ” पैदा हुए है। राजा ने बच्चों को गौर से देखा तो बच्चों का चेहरा तेज से चमक रहा था।

 

 

 

 

राजा ने अपने मंत्री ‘ गुमान सिंह ‘ से कहा, ”  इन बच्चों के माता पिता का पता लगवाइए। ” राज्य की सभी वैद्यों ने सबका सैम्पल लेकर जांच करना शुरू किया, परन्तु असली माँ का पता नहीं चला।

 

 

 

” महाराज सभी की जांच पूरी हो गयी है, सिर्फ छोटी रानी जो कौवा भगाने का कार्य कर रही हैं उनकी जांच नहीं हुई है।  अगर आप कहे तो उनकी भी जांच की जाए। ” मंत्री ने कहा।

 

 

 

राजा ने जांच का आदेश दे दिया और जांच में यह साबित हो गया कि बच्चे छोटी रानी के ही हैं।  यह पता चलते ही राजा ने बाकी सभी रानियों को कारावास में डलवा दिया और छोटी रानी से क्षमा माँगते हुए रानी को ससम्मान वापस राज्य में बुलाया और श्याम और सलोनी को भी खूब सारा धन दिया।

 

 

 

 

राजा को राज्य का उत्तराधिकारी मिल गया था।  सभी ख़ुशी से रहने लगे। इसीलिए कभी बिना सोचे – समझे निर्णय नहीं लेने चाहिए।  कोई भी कदम सोच – समझ कर उठाना चाहिए।

 

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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