Hindi Story Telling Competition for Class 8 & 9 / 5 मोरल कहानियां हिंदी में

Hindi Story Telling Competition for Class 8

Hindi Story Telling Competition for Class 8 मित्रों इस पोस्ट में Hindi Story Telling Competition for Class 8 की बेहतरीन हिंदी कहानियां दी गयी हैं।  आप Moral Stories in Hindi For Class 8 की बेहतरीन शिक्षाप्रद कहानियां पढ़ें और इसे शेयर भी जरूर करें।     

 

 

 

 

जैसी जिसकी सोच ( Hindi Story Telling Competition for Class 8 Pdf ) 

 

 

 

 

1- मित्रों हमेशा ही किसी भी घटना के दो पहलू होते हैं।  यह हमारी Thought पर निर्भर करता है कि हम किस पहलू पर ध्यान देते हैं।  उसके सकारात्मक पहलू या फिर नकारात्मक पहलू पर। 

 

 

 

मित्रों जब आप किसी Competition में भाग लेते हैं तो जरूरी कि आप ही First आएं और यह भी कहा जा सकता है कि आप प्रथम आ भी सकते हैं।  यह आपकी Preparations पर Depend  करता है। 

 

 

 

 

इसलिए Result  क्या होगा यह ना सोचकर अपनी तैयारियों पर ध्यान दें।  सकारात्मक पहलू पर ध्यान दें।  आप निश्चित ही Success होंगे।  आज की कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

 

एक गाँव के दो साधू अपनी – अपनी झोपड़ियां बनाकर रहते थे।  दिन के समय वे दोनों गाँव में जाकर भिक्षा माँगते और बचे समय में ईश्वर का भजन करते।

 
 
 
 
 
 
 
एक दिन भारी तूफ़ान आया और उनकी झोपड़ियां टूट गयी और काफी हद तक बर्बाद हो गयीं। पहला साधू यह सब देखकर दुःख के मारे विलाप करने लगा और बोला, “ हे प्रभु ! तुमने ऐसा क्यों किया? क्या मेरी पूजा, भक्ति का यही फल है? “
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
इस तरह वह पूरा दिन भगवान कोसते को हुए एक पेड़ के नीचे बैठा रहा।  शाम को जब दूसरा साधु घर लौटा और अपनी झोपड़ी का यह हाल देख मुस्कुराते हुए भगवान् का धन्यवाद करते हुए कहने लगा, ” हे प्रभु ! ऐसे भीषण तूफ़ान में जब पक्के और मजबूत मकान ध्वस्त हो जाते हैं ऐसे में आपने मेरी झोपड़ी बचा ली।  इसे अधिक क्षति नहीं होने दी।  सचमुच आप महान हैं प्रभु। “
 
 
 
 
 
 
 
 
Moral Of This Story – इससे यह सीख मिलती है कि प्रत्येक घटना के दो पहलू होते हैं।  आप उसका बुरा निष्कर्ष निकालते हैं कि अच्छा निष्कर्ष निकालते हैं, यह आप पर निर्भर करता है।
 
 

 

 

 

 

2– मित्रों लालच बहुत ही बुरी चीज है।  आप अगर किसी भी वस्तु को आसानी से पा जाएंगे तो आपके लिए उसका कोई मोल नहीं रहेगा, परन्तु यदि आप उसे Hard Work से प्राप्त करेंगे तो आप उसकी क़द्र करेंगे। 

 

 

 

 

मित्रों कई लोग नक़ल करके परीक्षा पास कर लेते हैं, परन्तु वे जीवन में कुछ नहीं कर पाते हैं, क्योंकि उन्हें विषय का ज्ञान ही नहीं रहता है, जबकि जो Hard Work और बिना Copy किये  पास होते हैं, वे  Success  होते हैं। मित्रों आप भी कभी Copy ना करें, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से Exam पास करें।  आज की कहानी इसी पर आधारित हैं।  

 

 

 

 

एक बार की बात है. मगध देश के राजा अपने मंत्री संग राज्य के दौरे पर निकले . जंगल में उन्होंने एक संत को देखा . राजा उनके पास पहुंचकर बोले, ” मैं यहाँ का राजा हूँ. आप कुछ स्वर्ण मुद्राएँ अपने पास रख लीजिये और जंगल के बाहर सुखी से अपना जीवन बिताइए . ”        

 

 

 

 

 

 

इसपर ऋषि बोले, ” राजन ! मैं तो संत हूँ . मुझे इन स्वर्ण मुद्राओं से क्या लाभ . आप इसे किसी जरूरतमंद को दे दीजिये . उसका भला हो जाएगा . ”  ” लेकिन आपको भी अपनी जरूरत  के लिए धन की आवश्यकता होती होगी ? तो फिर आप इन स्वर्ण  मुद्राओं को क्यों ठुकरा रहे हैं ? ” राजा ने कहा .        

 

 

 

 

 

इसपर संत बोले, ” पुत्र, हम स्वर्ण रसायन से ताम्बे को स्वर्ण बना देते हैं  और इसी से अपनी आजीविका चलाते हैं . ” यह बात सुनकर राजा हैरान रह गये .        

 

 

 

 

इसपर राजा बोले, ” कृपया मुझे भी यह कला सिखा दीजिये . इससे मैं अपने राज्य को सुखी करूंगा . राज्य में कभी भी गरीबी नहीं होगी . प्रजा सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करेगी .”        

 

 

 

 

संत ने कहा, “ मैं आपको यह विद्या तो सिखा दूंगा लेकिन आपको मेरे साथ एक वर्ष रहकर साधना करनी पड़ेगी . ” राजा सोच- विचार कर राज्य का भार मंत्री को सौंप दिया और संत के साथ साधना में लीन  हो गए .        

 

 

 

 

एक वर्ष के बाद संत ने राजा से कहा, ” राजन ! आईये अब मैं आपको विद्या सिखा दूँ  . ” इस पर राजा ने कहा, ” अब मुझे स्वर्ण रसायन सिखाने की आवश्यकता नहीं रह गयी है, क्योंकि इस एक वर्ष में आपने मेरे पुरे अस्तित्व को ही अमृत रसायन में परिवर्तित कर दिया है . अब आप मुझे बस आशीष दीजिये कि मैं प्रभु का नाम लेते हुए निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा कर सकूँ . ”        

 

 

 

 

 

संत ने उन्हें आशीर्वाद दिया और राजा फिर से अपने राज – काज में लग गए . उनका राज तेजी से सुख – सुविधाओं से भरने लगा और प्रजा सुखी से रहने लगी .        

 

 

 

 

Moral Of This Story – मित्रों अगर ऋषि राजा को वह स्वर्ण रसायन दे देते तो राजा कभी Hard Work नहीं करते और ना वहाँ की प्रजा करती और जल्द ही उस राज्य का समूल विनाश हो जाता, इसीलिए भी तात्कालिक फायदे पर ना जाएँ, बल्कि दूर की सोचें। 

 

 

 

 

 

कर्तव्य हिंदी कहानी 

 

 

 

 

3- मित्रों हमें अपना कर्तव्य हमेशा करना चाहिए, लेकिन परिस्थिति का भी जरूर ध्यान रखना चाहिए।  आज की कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

शीतलहर चल रही थी. मंगलवार का दिन था. मीलों चलकर एक किसान मंदिर पहुंचा तो देखा कि दरवाजा बंद था. किसान ने ऊँची आवाज लगाई ” अरे कोई है.पुजारी जी कहा हो ?”          

 

 

 

 

 

पुजारी जी बाहर आये तो किसान को देखकर हैरान थे. वे बोले ” आज ठण्ड बहुत अधिक थी. मुझे तनिक भी उम्मीद नहीं थी कि आज कोई प्रार्थना के लिए आएगा. अतः मैंने कोई तैयारी नहीं की, केवल भगवान को धूप अगरबत्ती ही दिखाई.”
 
 
 
 
 
 
 
 

अब तुम ही बताओ केवल एक आदमी के लिए इतना सबकुछ तैयारी करना ठीक रहेगा क्या ? क्यों ना आज हम बाकी पूजा रहने दें और घर जाकर आराम करें.      

 

 

 

 

 

इसपर किसान बोला ” पुजारी जी ! मैं तो एक साधारण  किसान  हूँ. मैं रोज कबूतरों को दाना खिलाने आता हूँ . अगर एक भी कबूतर होता है तो भी मैं दाना जरूर खिलाता हूँ.”        

 

 

 

 

पुजारी जी यह बात सुनकर थोड़े शर्मिंदा हुए और मन ही मन भगवान से क्षमा मांगी और तैयारी में लग गए. पूरा मंदिर साफ किया. आरती की थाली सजाई. प्रसाद तैयार किये.        

 

 

 

 

अन्य पूजा के सामान तैयार करने के बाद पूरे विधि-विधान से पूजा की. इस सबमें २-३ घंटे का समायी लग गया. पूजा खत्म होने के बाद पुजारी जी ने किसान कर्त्तव्य का भान कराने के लिए धन्यवाद दिया.        

 

 

 

 

इसपर किसान  कुछ नहीं बोला और चुपचाप वहाँ से जाने लगा. इसपर पुजारी जी बोले ” क्या हुआ, पूजा में कोई कमी रह गयी है क्या ?”  इसपर किसान बोला ” मैं क्या बताऊँ पुजारी जी, मैं तो एक साधारण सा  किसान  हूँ. लेकिन जब मैं कबूतरों को दाना डालने आता हूँ और अगर एक ही कबूतर आता है तो मैं सारा दाना एक ही कबूतर को नहीं खिला देता हूँ. ”        

 

 

 

 

पुजारी जी को अपनी गलती का एहसास हो गया था कि सिर्फ कर्त्तव्य निभाना ही जरूरी नहीं है बल्कि परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालना भी आवश्यक है.        

 

 

 

 

उन्होंने सोचा कि मुझे एक आदमी के हिसाब से ही तैयारी करके पूजा शुरू कर देनी चाहिए थी, जबकि मैं तमाम लोगों के हिसाब से तैयारी करने लगा.                  

 

 

 

 

आजादी सबसे प्यारी ( Hindi Story Telling Competition for Class 8 Pdf ) 

 

 

 

 

4- मित्रों Independence सबसे प्यारी होती है।  आज आप आजाद है सब कुछ कर सकते हैं, बोल सकते हैं, अपनी बात हक से रख सकते हैं, लेकिन आप तो जानते ही है कि यह आजादी हमें कितनी कठिनाइयों से मिली। 

 

 

 

 

इसे पाने के लिए ना जाने कितने वीर बलिदान हुए।  मित्रों इस आजादी की क़द्र करें, कभी भी इसका नाजायज फ़ायदा ना उठायें।  हर किसी को आजादी नहीं मिलती है।  आज की यह कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

एक नगर में एक आदमी ने एक ऊँट पाल रखा था। वह ऊँट से मेहनत तो खूब कराता, परन्तु उसे भरपेट चारा नहीं देता था।  इससे ऊँट बहुत परेशान हो गया था। 

 

 

 

 

वह आजादी चाहता था।  यह सोचकर वह एक दिन भाग निकला। भागते – भागते रास्ते में एक नदी आ गयी . अब तो बेचारा ऊँट फंस गया . जाए तो कहाँ जाए . उसे भूख भी खूब लगी थी लेकिन भागने की जल्दी में उसने रास्ते में मिले जंगल झाड़ियों में से कुछ नहीं खाया .      

 

 

 

 

बेचारा थक कर वहीँ बैठ गया . भूख तो लगी थी लेकिन चिल्ला भी नहीं सकता था क्योंकि अगर उसका मालिक आवाज सुन लेता तो उसकी खैर नहीं थी .      

 

 

 

 

दो दिन बीत गए . वहीँ एक पेड़ पर एक कौवा रहता था . उससे ऊँट की लाचारी देखी नहीं गयी . उसने बोला , ” ऊँट भाई, तुम एक काम करो. मैं उड़ता हूँ और तुम मेरे पीछे चलो . मैं तुम्हे हरे – भरे खेत में ले चलूँगा . वहाँ तुम अपना पेट भर लेना . ”        

 

 

 

 

ऊँट बड़ा प्रसन्न हुआ . लेकिन अगले ही पल उसने कौवे से पूछा, ” भाई उस तरफ मानव तो नहीं होंगे ना . ” इस पर कौवा बोला, ” भाई बिना मानव के खेती कौन करेगा . लेकिन उस समय मानव नहीं होंगे जब मैं तुम्हे ले चलूँगा . ”      

 

 

 

 

” ना भाई ना मैं नहीं जाऊंगा . उन मानावों का कोई भरोसा नहीं है . ” ऊँट ने कहा. ” भाई ऐसे तो तुम भूख से मर जाओगे ” कौवे ने ऊँट को समझाते हुए बोला .      

 

 

 

 

इस पर ऊँट बोला, ” भाई भूख से मर जाऊंगा लेकिन आज़ाद तो रहूंगा न . तुम गुलामी का दर्द नहीं समझ सकते . मुझे मरना स्वीकार है लेकिन गुलामी नहीं . ” ऊँट की आवाज में संतोष झलक रहा था और आज़ादी की ख़ुशी भी .

 

 

 

 

5- मित्रों हमेशा सेवाभाव रखो।  हमेशा यह बात याद रखो कि आपकी वजह से किसी को दुःख ना हो,बल्कि आप किसी के चेहरे पर खुशियां बिखेरो।  सच्चा मनुष्य वही है जो खुद दुःख में रखकर दूसरों को खुशी दे।  आज की कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

रघुवीर फुटबाल का अच्छा खिलाड़ी था।आज खेलते समय उसके पैर चोट लग गई और वह लंगड़ा कर चल रहा था। रास्ते में उसे  एक किसान दिखाई दिया जो अपने गट्ठर को सायकल के ऊपर रखने का प्रयास कर रहा था।

 

 

 

 

संध्या का समय था। गट्ठर इतना ज्यादा था कि किसान उसे अकेले अपने सायकल पर रखने में समर्थ नहीं हो पा रहा था। सब अपने-अपने घरों को भागे जा रहे थे कारण कि बारिश की संभावना थी और आंधी के भी लक्षण थे।

 

 

 

 

रघुवीर किसान की उलझन समझ गया। लंगड़ाते हुए उसके पास पहुंचा और सायकल के ऊपर गट्ठर को रखने में मदद किया। कुछ समय बाद जोर की आंधी और बारिश आई। लेकिन रघवीर के प्रयास से किसान को मंजिल मिल चुकी थी।

 

 

 

 

Moral Of This Story- जो अपने दुख की परवाह किए बगैर दूसरों की सहायता करते है, वही श्रेष्ठ होते है।

 

 

 

 

 

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    1- Moral Stories in Hindi for class 9 Wikipedia  

 

 

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3- Hindi story Telling Competition with props        

 

 

 

 

 

 

Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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1 Response

  1. Vishal says:

    Best stories in Hindi for popular website visited website

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