Moral Stories For Children’s in Hindi Pdf / 7 मोरल कहानियां हिंदी में

Moral Stories For Children's in Hindi

Moral Stories For Children’s in Hindi इस पोस्ट Moral Stories For Children’s in Hindi में नचिकेता और यमराज के बीच के संवाद का प्रसंग है।  यह आपके लिए Useful Stories in Hindi है। 

 

 

 

 

पहले खुद प्रयोग करें ( Moral Stories For Childrens in Hindi Written )

 

 

 

 

1 – गांधीजी रोज अपने आश्रम की हर एक चीज का बारीकी से मुआयना करते थे . ठंडी के दिन थे . वे आश्रम की गोशाला में पहुंचे . उन्होंने गायों को सहलाया और प्यार से बछड़ों को थपथपाया .

 

 

 

उनके प्रेम भरे स्पर्श का जानवरों ने भी गर्दन हिलाकर जवाब दिया . वे गोशाला से निकल रहे थे तभी उनकी नजर एक गरीब लडके पर गयी . उन्होंने उससे पूछा, ” तुम रात को यहीं सोते हो ? ”

 

 

 

उस लडके ने कहा, ” जी बापू जी . मैं रात को यहीं सोता हूँ .  ” गांधीजी बोले, ” बेटा आजकल ठण्ड बहुत अधिक है . क्या तुम्हे ठण्ड नहीं सताती ? ”

 

 

 

 

उस लडके ने कहा, ” बापू जी, ठण्ड तो बहुत लगती है . ”

 

 

 

” अच्छा तो तुम ठण्ड से बचने के लिए क्या ओढ़ते हो ? ” गांधीजी ने उस लडके से पूछा . उस लडके ने एक फटी चादर दिखाते हुए कहा, ” मेरे पास ओढ़ने के लिए बस यही है . ”

 

 

 

उस लडके की बात सुनकर गांधीजी हैरान रह गए . उसके बाद वे अपनी कुटिया  में लौट आये और कस्तूरबा जी से दो पुरानी साड़ियाँ और कुछ अखबार और रुई मंगवाई .

 

 

 

 

उसके बाद उन्होंने साड़ियों की खोली बनाकर उसमें अखबार और रुई भरकर एक रजाई तैयार की . उसके बाद उन्होंने उस लडके को बुलाया और उसे प्यार से रजाई देते हुए बोले, ” अब इसे ओढ़ना और कल बताना ठंडी लगी की नहीं ”

 

 

 

अगले दिन जब बापूजी गोशाला की तरफ गए तो वह लड़का उन्हें वही नजर आया . उन्होंने उससे पूछा, ” बेटा कल ठंडी लगी . ” उसने खुश होते हुए कहा, ” नहीं बापूजी, कल ठंडी नहीं लगी . कल तो बहुत प्यारी नींद आई . ”

 

 

 

गांधीजी बहुत खुश हुए और बोले, ” बेटा , अब मैं भी ऐसी ही रजाई ओढूंगा . ”

 

 

 

Moral Of This Story – सबके कष्ट को अपना समझना चाहिए।  

 

 

 

 

2 –  एक गांव में एक लकड़हारा रहता था।  वह रोज  जंगल जाता और जंगल से सूखी लकड़ियां काटकर उन्हें बाजार में बेच  देता।  यही उस किसान की जीविका का साधन था।

 

 

 

एक  दिन की बात है वह रोज की तरह जंगल गया।  गर्मी के दिन थे।  तेज धूप थी।  वह लकड़ियां काटकर बहुत थक चुका था और उसे भूख भी लगी थी।

 

 

 

 

दोपहर का समय था उसने खाना खाने के लिए एक छायादार जगह ढूंढने लगा और उसके बाद एक सेब के पेड़ के नीचे बैठा और भोजन करने लगा।

 

 

 

उसे भूख बहुत तेज लगी थी। भोजन ख़त्म हो गया और उसकी भूख ख़त्म नहीं हुई।  अभी वह इस बारे में सोच ही रहा था कि अचानक से उसके बगल में एक सेब  गिरा।

 

 

 

उसने जब ऊपर देखा तो वहां एक परी बैठी थी।  वह  परी को देखकर आश्चर्यचकित रह गया।  लकड़हारे को देखकर परी नीचे आई और बोली आप इतने उदास क्यों है ?

 

 

 

तब लकड़हारे ने कहा मैं एक गरीब आदमी हूं।  किसी तरह से लकड़ियां काटकर अपनी जिंदगी चला रहा हूं।  तब परी ने कहा मैं आपको एक फावड़ा देती हूं और उस फावड़े से आप इस पेड़  के चारों तरफ  खुदाई करिए।

 

 

 

आपको यहां पर एक खजाना मिलेगा और यह कहकर परी ने एक मंत्र पढ़ा और वहां एक फावड़ा  आ गया और उसके बाद परी चली गयी।लकड़हारे ने उस पेड़ के चारों तरफ खुदाई शुरू की.

 

 

 

 

काफी समय तक खोदने के बाद उसे वहां एक बॉक्स मिला। जब उसने बॉक्स को खोला तो उसने ढेर सारा खजाना था। वह आश्चर्यचकित रह गया।

 

 

 

उसने सोचा परी  ने मुझे यह खजाना लेने के लिए कहा है लेकिन यह अगर किसी और का हुआ तो ? नहीं – नहीं इस जंगल और यहां की हर उस चीज पर राजा का अधिकार है जिसका कोई मालिक ना हो।

 

 

 

 

अतः  मुझे इस खजाने को राजा के पास ले जाना चाहिए।  वह खजाना भरा बॉक्स लेकर राजा के पास गया और पूरी बात कह सुनाई।  राजा ने उसकी बात बड़े ही गौर से सुनी  और उसके बाद बोला, ” तुम बहुत ईमानदार नागरिक हो।  तुम चाहते तो यह खजाना  चुपचाप रख  सकते थे लेकिन तुम इसे लेकर मेरे पास आये।   मैं तुम्हें इस खजाने को को इनाम स्वरूप प्रदान करता हूं और इसके साथ ही मैं तुम्हे अपने राज्य का कोषाध्यक्ष  नियुक्त करता हूं।  ” आदमी बहुत खुश हुआ अपने घर चला गया और उसके बाद उसका जीवन बहुत ही सुखमय तरीके से कटने लगा।

Moral Of The Story – ईमानदारी का फल सदैव ही अच्छा होता है और ईमानदार व्यक्ति हर काम में सफल होता है। 

घायल की मदद 

3 -प्रिया बाजार जाने की तैयारी कर रही थी, तभी गोपी उसके पास दौड़ता हुआ आया। गोपी को आतुर आया हुआ देखा तो प्रिया  ने पूछा, “क्या बात है? तुम दौड़ कर क्यों आ रहे हो ?

 

 

 

गोपी ने कहा, ” सड़क पर एक्सीडेंट हुआ है  और कोई उस आदमी की सहायता नहीं करना चाहता है, अगर  आप से कुछ हो सके तो करो ?”

 

 

 

 

प्रिया हमेशा ऐसे कार्य में तत्पर रहती। जिसमे उसे हमेशा ही क्षति उठानी पड़ती थी,लेकिन किसी के काम आना, उसे पूर्ण रूप से संतोष प्रदान करता था।

 

 

 

जैसे ही वह उस व्यक्ति को अपनी गाडी में ले जाने लगी तो वहाँ मौजूद लोगों ने कहा, ” आप क्यों मुसीबत मोल ले रही हो ? ”

 

 

 

 

यह बात सुनते ही प्रिया भड़क गयी।  उसने कहा, ” इसमें मुसीबत लेने जैसी कौन सी बात है ? क्या किसी की मदद करना पाप है ? अगर आज आप किसी की मदद नहीं करेंगे तो कल आपकी कोई मदद करेगा क्या ? इंसानियत नाम की चीज है कि नहीं आप लोगों में ? ” प्रिया की इस बात से लोगोंकी आँख खुल गयी और उन्होंने भी उस घायल इंसान की मदद की।

 

 

 

Moral Of This Story – मित्रों किसी भी घायल इंसान की मदद करना बहुत ही पुण्य का काम होता है।

 

 

 

 

ईमानदारी का फल ( Moral Stories For Children’s in Hindi ) 

4- एक सज्जन किसी दुकान पर काम कर रहे थे। दुकान के मालिक ने उस सज्जन व्यक्ति को Bank से दस हजार रूपए लाने का आदेश दिया। सज्जन व्यक्ति अपने कर्तव्य की पूर्ति हेतु बैंक चले गए।

 

 

 

 

बैंक में बहुत लम्बी कतार थी , फलतः कार्य में विलम्ब निश्चित था। लेकिन सज्जन व्यक्ति मैदान में डटे हुए थे। सज्जन को विलम्ब होता देख दुकान के मालिक का धैर्य डिग रहा था। इसलिए उसने सबसे विश्वास पात्र नौकर को उस सज्जन व्यक्ति का पता लगाने के लिए भेज दिया।

 

 

 

 

 

बैंक के नजदीक पहुंचकर विश्वास पात्र नौकर ने निरीक्षण किया, तो पाया कि जिस तरह स्वर्णकार अपने स्वर्ण को आकार देने से पहले आग में तपाता है। उसी प्रकार सूर्य देव के द्वारा सभी लोगों को तपाया जा रहा था। जिसमे सज्जन पुरुष भी एक थे।

 

 

 

 

विश्वास पात्र नौकर आकर मालिक से पूरी बात बताया। कुछ समय के उपरांत वह सज्जन पुरुष भी दस हजार रूपए को लाकर दुकान मालिक को दे दिया। मालिक को अपने आचरण पर ग्लानि हुई। वह अब उनके ऊपर बहुत विश्वास करने लगा और उन्हें कभी भी अपने दुकान से नहीं निकाला।

 

 

 

 

Moral Of The Story  – अपने कार्य को हमेशा ही ईमानदारी और धैर्य से करना चाहिए।  आपको सफलता अवश्य ही मिलेगी और समाज में आपकी इज्जत भी बढ़ेगी। 

 

 

 

 

समय का उपयोग

 

 

 

5-  योगिता पढ़ने में बहुत ही तेज लड़की थी, लेकिन वह गरीब घर की लड़की थी। गरीबों के भाग्य में ही सभी के हिस्से की तकलीफ मिलती है। आज उसके स्कूल में फ़ीस भरने का दिन था, लेकिन योगिता के पास फ़ीस भी भरने के पैसे नहीं थे।

 

 

 

 

योगिता की माँ ने गांव के सभी लोगो के यहाँ प्रयास किया सभी लोगो ने उसे दो दिन बाद का आश्वासन दिया। लेकिन आज ही योगिता को फ़ीस भरनी थी। कारण बाद में फ़ीस भरने पर फ़ीस का आधा पैसा दंड स्वरूप भरना पड़ता, जो योगिता के लिए संभव नही था।

 

 

 

 

 

 

एक बुढ़िया माँ से योगिता का कष्ट देखा नहीं गया। उसने अपने बटुए से एक मुड़ी हुई बीस रूपए की नोट योगिता को दे दी और अपनी फ़ीस भरने का आग्रह किया। दो दिन के पश्चात गांव के सभी लोग उसकी के मदद के लिए तैयार थे। लेकिन योगिता की फ़ीस भरी जा चुकी थी। उसने सभी को विनम्रता से इनकार कर दिया।

 

 

 

 

Moral Of The Story – मौके पर की गई सहायता हजारों रूपए के बराबर होती है।

 

 

 

 

 

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1- Moral Stories in Hindi For Class 4, 5 / बेस्ट हिंदी कहानियां जरूर पढ़ें

 

2- Moral Stories in Hindi for Class 8 / बहुत ही सुन्दर 5 कहानियां हिंदी में

 

3- Hindi moral Stories with Pictures Pdf

 

 

 

 

Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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