Moral Stories in Hindi For Class 4, 5 / बेस्ट हिंदी कहानियां जरूर पढ़ें

Moral Stories in Hindi For Class 4 मित्रों इस पोस्ट में Short Moral Stories in Hindi For Class 4th  की 5 Hindi Kahaniya Written दी गयी है।  इस पोस्ट Moral Stories in Hindi For Class 5 और Moral Stories in Hindi For Class 6 की कहानियां दी गयी है।

 

 

 

 

झूठी ख्याति (Small Moral Stories in Hindi For Grade 4 )

 

 

 

 

एक जगह पर वेदिका नाम की एक धनी स्त्री रहती थी। वह बहुत शांत और सौम्य थी और इसलिए वह दूर – दूर तक प्रसिद्ध थी।

 

 

 

उसके  घर में एक नौकर था।  उसका नाम विशाल था। वह बहुत ही कुशल और वफादार था। एक दिन नौकर ने सोचा, ” सभी लोग कहते हैं मेरी मालकिन बहुत ही सौम्य है।  वह कभी किसी पर गुस्सा नहीं होती हैं।  ऐसा भला कैसे हो सकता है ? हो सकता है मैं अच्छा  काम करता हूँ इसलिए वह मुझपर गुस्सा नहीं  होती होंगी। मुझे यह पता लगाना होगा कि वह सच में गुस्सा होती हैं या नहीं। ”

 

 

 

 

अगले दिन नौकर काम पर  थोड़ा देर से आया। महिला ने पूछा, ” आज देर कैसे हो गयी ? ” इसपर वह बोला, ” कोई ख़ास बात नहीं थी। ” महिला ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसे नौकर की बात अच्छी नहीं लगी।

 

 

 

हिंदी कहानी 

 

 

 

 

दूसरे दिन नौकर फिर से देर आया।  महिला ने फिर से उससे पूछा, ” आज देर क्यों हुई ? ” इसपर नौकर ने कहा, ” कोई ख़ास बात नहीं। ” महिला को बात बहुत बुरी लगी।  वह नाराज हो गई, लेकिन कुछ नहीं बोली।

 

 

 

 

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तीसरे दिन नौकर फिर से देर से आया। महिला बहुत क्रोधित हो गयी और उसे एक डंडा दे मारा।  इससे नौकर का सर फट गया और वह तेजी से बाहर की तरफ भागा। यह बात आग की तरह बाहर फ़ैल गयी और वेदिका की ख्याति मिट्टी में मिल गयी।

 

 

 

 

Moral – कठिन परिस्थितियों में भी जो दृढ़ रहता है, वही अपनी बुराइयों पर विजय पा सकता है। 

 

 

 

 

सच्ची प्रार्थना ( Moral Stories in Hindi For Class 4 )

 

 

 

 

2- एक पुजारी थे।  लोग उनमें  अत्यंत ही श्रद्धा और विश्वास रखते थे। पुजारी प्रतिदिन मंदिर जाते और दिनभर वहीँ रहते।  सुबह से ही लोग मंदिर आने लगते और मंदिर में सामूहिक प्रार्थना होती थी।

 

 

 

जब प्रार्थना संपन्न हो जाती तो पुजारी उन्हें उपदेश देते।  उसी नगर में एक गाड़ीवान रहता था। वह  दिनभर अपने काम  में व्यस्त रहता था।  इसी से उसकी रोजी -रोटी चलती थी।

 

 

 

यह सोचकर उसे  बहुत दुःख होता था  .   वह सोचता था, ”  मैं हमेशा अपना पेट पालने  लिए काम – धंधे करता रहता हूँ, मंदिर नहीं जा पाता हूँ,  जबकि बहुत सारे लोग मंदिर जाते हैं।  मुझ जैसा पापी शायद ही इस  होगा। ”

 

 

 

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वह आत्मग्लानि  मंदिर जाकर  पुजारी को यह बात बतायी और  उसने पुजारी जी  से पूछा, ” मैं पूजा –  पाठ ना कर पाने की वजह से बहुत ही दुखी हूँ।  क्या अपना काम छोड़कर नियमित मंदिर में प्रार्थना करना आरम्भ कर दूँ ? ”

 

 

 

 

पुजारी ने गाड़ीवाले की बात बड़े ही ध्यान से सुनी और  उसके बाद उन्होंने कहा, ” अच्छा  यह बताओ, तुम रोज ही अपनी गाडी से तमाम लोगों को एक गाँव  से दूसरे गाँव में पहुंचाते हो तो क्या तुमने कभी किसी बूढ़े, अपाहिज  और दीन – दुखियों को मुफ्त में एक गाँव से दूसरे गाँव तक छोड़ा है ? ”

 

 

 

 

इसपर उस गाड़ीवाले ने कहा, ” ऐसा अवसर बहुतों बार आता है।  जब ऐसे असहाय लोगों को मुफ्त में यात्रा करवाता हूँ। ” यह सुनकर पुजारी बहुत ही खुश होते हुए बोले, ”  तब तुम्हे अपना व्यवसाय छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है।  ऐसे असहाय लोगों की सेवा करना,  किसी भी तरह से उनकी मदद करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।  तुम सबसे अधिक ईश्वर की भक्ति कर रहे हो। ” पुजारी की बात सुनकर वह गाड़ीवान बहुत खुश हुआ और  वह फिर से गरीबों की सेवा में और अधिक मन लगाने लगा।

 

 

 

 

सबसे बड़ा धन ( Moral Stories in Hindi For Class 5 Pdf )

 

 

 

 

3 –  एक भिखारी कई दिनों से भूखा प्यासा था।  वह अपनी ज़िन्दगी से परेशान हो गया था।  एक  दिन उसने परेशान होकर उसने अपना जीवन ख़त्म करने का सोचा।

 

 

 

तभी वहाँ से एक महात्मा गुजरे।  वे नेत्रहीन थे। भिखारी ने उन्हें अपनी व्यथा सुनाई और कहा, ” मैं अपनी ज़िन्दगी से तंग आ चुका हूँ, इसलिए जीवन ख़त्म करना चाहता हूँ।  ” 

 

 

 

 

उसकी बात सुनकर महात्मा हंसे और बोले, ” ठीक है।  अच्छा विचार है , लेकिन पहले मुझे अपनी एक आँख दे दो।  मैं  हज़ार अशर्फियाँ दूंगा। ” इसपर वह भिखारी बोला, ” कैसी बात  कर रहे हैं ? मैं अपनी आँख कैसे दे सकता हूँ ? “

 

 

 

 

महात्मा फिर बोले, ” ठीक है।  चलो आँख ना सही अपना एक हाथ ही दे दो।  मैं तुम्हे दस हजार अशर्फियाँ देता हूँ।  ” भिखारी बड़ा असमंजस में पड़ गया और कुछ देर सोचकर बोला, नहीं  मैं अपना हाथ भी नहीं दे सकता हूँ। “

 

 

 

 

तब महात्मा बोले, ” इस संसार में सबसे बड़ा धन निरोगी काया है।  तुम्हारे हाथ-पाँव, शरीर स्वस्थ है  तो तुमसे बड़ा धनी  कौन हो सकता हैं ? तुमसे गरीब तो मैं हूँ कि मेरे पास आँखे नहीं हैं।  मैंने कभी भी जीवन ख़त्म करने के बारे में नहीं सोचा। ” भिखारी ने उन महात्मा से क्षमा मांगी और एक नए  संकल्प से जीवन -यापन करने लगा।

 

 

 

 

Moral Of This Story – मित्रों मानव जीवन बहुत ही पुण्य करने के बाद प्राप्त होता है, इसका सम्मान करें और मेहनत करके कुछ ऐसा करने की कोशिश करें कि लोग आपको हमेशा याद करें।  परेशानियां तो हर किसी के जीवन में हैं, लेकिन आपको उससे लड़ना पड़ता है और उसके बाद मिली जीत की ख़ुशी कुछ और ही होती है।  

 

 

 

 

समस्या हिंदी प्रेरक कहानी 

 

 

 

 

4-समस्या-समस्या-समस्या। कहां नहीं है समस्या कहां नहीं है कठिनाई, क्या तुम कठिनाइयों से भाग जाओगे ? भागकर जाओगे कहां ? तुम्हारा जीवन तो तुम्हे ही जीना है और जीना ही पड़ेगा। अध्यापक राजीव कुमार बच्चों को समझा रहे थे।

 

 

 

 

 

एक लड़का था। उसका नाम प्रतीक था। वह कंपनी में काम करता था। उसे अपने हिसाब से काम करना पसंद था, लेकिन उसे कंपनी के मालिक के हिसाब से काम करना पड़ता था।  यहां तक तो ठीक था, लेकिन उसके सीनियर उसके द्वारा किये गए हर काम में कोई ना कोई कमी निकालकर उसे परेशान करते थे ।

 

 

 

 

उस लड़के ने काम छोड़ दिया।  अब उसे व्यवसाय करना था। उसने पहले सब्जी का व्यवसाय शुरू किया। यहां भी समस्या, ग्राहकों की बातें सुनने को मिलती थी। वह सामान लेने जाता तब दुकानदारों की बातों से समस्या थी।

 

 

 

 

उसने मन में  विचार किया कि समस्या से लड़ा जाय, या तो समस्या से सामंजस्य बिठाया जाय। समस्या से लड़ने पर उसके अस्तित्व पर खतरा था। उसने दूसरा रास्ता चुन लिया। समस्या से सामंजस्य का मेल कर दिया। अब उसकी समस्या खत्म हो गई और वह सफल हो गया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाना चाहिए।

 

 

 

 

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