Moral Stories in Hindi For Class 9 Pdf / कण – कण में भगवान हिंदी कहानी

Moral Stories in Hindi For Class 9

Moral Stories in Hindi For Class 9 पाठकगणों यह Moral Stories in Hindi For Class 9 With Moral है। इसमें बहुत ही अच्छी Hindi Stories Moral दी गयी है। 

 

 

 

 

 

कण – कण में भगवान ( Moral Stories in Hindi For Class 9 Wikipedia ) 

 

 

 

1- मित्रों किसी भी कार्य को पूरा करने में विश्वास का अहम Role होता है।  अगर आप किसी भी Subject को पुरे विश्वास के साथ पढ़ेंगे तो आप वह  Subject पूरी तरह से समझ लेंगे। 

 

 

 

 

किसी भी कार्य को करने के पहले आप विश्वास रखें कि आप यह कार्य अवश्य कर लेंगे, जब दूसरे वही कार्य कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं कर सकते ? आज की कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

आप बिना सोचे – विचारे ही किसी को भी रैकेट से मार देते हैं।  क्या तुम्हे पता है इससे किसी को चोट भी लग सकती है और यह रैकेट भी टूट सकता है ?

 

 

 

 

बात पूरी होने से पहले ही लेकिन यह तो सिर्फ़ टेढ़ा ही हुआ है, बिल्कुल तुम्हारी तरह जैसे तुम बिना किसी बात को समझे झट से टेढ़े हो जाते हो.. पिंटू की छोटी बहन ने कहा। 

 

 

 

 

 

यह उपरोक्त बातें धर्मा और पिंटू के बीच चल रही थी कि बीच में रानी जो कि पिंटू की छोटी बहन है भी इस वार्तालाप में कूद पड़ी. धर्मा भाई ठीक ही तो कह रहें हैं तुम हमेशा ही थोड़ीथोड़ी बात पर टेढ़े हो जाते हो.  

 

 

 

 

Long Moral Stories in Hindi For Class 9

 

 

 

 

इसके पहले कि धर्मा कुछ जवाब देता, पिंटू ने अपनी छोटी बहन को रैकेट से एक रैकेट मार दिया और वह भागने की तैयारी में ही था कि धर्मा और रानी ने मिलकर उसे पकड़ लिया और रैकेट छीनने की कोशिश करने लगे, रानी गुस्से में चिल्ला भी रही थी कि मैं आज इस रैकेट को ही तोड़ दूँगी...जब देखो सबको रैकेट से मारता रहता है.

 

 

 

 

 

आखिर में धर्मा के सहयोग से रानी पिंटू से रैकेट छीनने में सफल रही और वो रैकेट को तोड़ने लगी. उसने पूरी कोशिश की लेकिन रैकेट नहीं टूट रहा था, रैकेट को तोड़ने की कोशिश में रानी के हाथों में घाव जरूर हो गया था.

 

 

 

 

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इस कोशिश में रैकेट काफी टेढ़ा हो गया ....इस पर रानी गुस्से और चिड़चिड़ेपन  के मिश्रित भाव से धर्मा से बोली...अरे यह रैकेट तो टूट ही नहीं रहा है.

 

 

 

इस पर पिंटू जोरजोर से हंसने लगा और हंसते हुए बोला...यह रैकेट नहीं टूट सकता...यह मेरा दोस्त है. इस पर रानी ने चिढ़ कर उस रैकेट को वही ज़ोर से फेक दिया.

 

 

 

 

 

सच्चा विश्वास एक हिंदी कहानी           भाग 

 

 

 

 

जूनियर हाईस्कूल, पिथौरागढ़, उत्तराखंड

 

 

पिंटू पढ़ाई में तो एकदम जीरो था लेकिन जब बात खेल की आती थी तो उसका कोई सानी नहीं था. स्कूल में कबड्डी के खिलाड़ियों का चयन किया जा रहा था.

 

 

 

चयनकर्ता जितेंद्र उर्फ जीतू सर खिलाड़ियों का चयन कर रहे थे. सभी खिलाड़ियों का चयन करने के बाद जितेंद्र सर ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी टीम परसों उधमपुर में मैच खेलने जाएगी और बच्चों हमें जीत कर ही आना है. वहाँ और भी टीमें रहेंगी लेकिन हमारी टीम बेस्ट है. इस तरह उन्होने सभी को प्रोत्साहित किया.

 

 

मैच के ठीक एक दिन पहले अर्थात अगले दिन टीम के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में शुमार पदम ठाकुर की तबीयत अचानक से  खराब हो गयी. उसने फोन करके जितेंद्र सर से कहा कि मैं मैच खेल पाने असमर्थ हूँ .

 

 

 

मेरी तबीयत बहुत ही ज़्यादा खराब है. अब जितेंद्र सर बहुत ही असमंजस में पड़ गये. अब वे Contest से नाम नहीं वापस ले सकते थे ऐसे में स्कूल की बदनामी होने का डर था.

 

 

 

उसी स्कूल में धर्मा भी पढ़ता था जिसे जितेंद्र सर बहुत मानते थे. जितेंद्र सर बहुत ही चिंतित थे और स्कूल की छुट्टी हो जाने के बाद भी अपने आफिस में बैठे थे. इतने  में धर्मा उनके आफिस के सामने से  गुज़रा यह उसका रोज का काम था क्योंकि उसका क्लास जितेंद्र सर के आफिस के पीछे था.

 

 

 

 

 

उसने देखा  कि सर बहुत ही चिंतित हैं तो वह उनके आफिस के दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया लेकिन जितेंद्र सर को इसका तनिक भी आभास नहीं हुआ.

 

 

 

 

धर्मा ने हल्के से दरवाजे को खटखटाया, तब जीतू सर कि तंद्रा भंग हुई. उसने जीतू सर से इस चिंता का कारण पूछा तो जीतू सर बड़े ही धीमे स्वर में सारी बाते बता दी. इस पर धर्मा ने चहक कर कहा सर समझो कि आपका काम हो गया. सर मेरा भाई पिंटू जो कि खेलने में बहुत ही उस्ताद है...आप कहें तो मै उससे बात करू...आप निराश नहीं होंगे. 

 

 

 

 

लेकिन..जितेंद्र सर इसके आगे कुछ कहते कि धर्मा उनकी बात को समझ गया और उन्हें बीच में ही टोकते हुये कहा कि सर शायद आप भूल रहे हैं कि पिंटू ने इसके पहले पंचायत स्तर के कबड्डी के खेल में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था और उस मेडल भी मिला था.

 

 

 

 

हां....हां याद आया...ठीक है तुम बात करो और अगर वह तैयार होता है तो तुरंत मुझे बताओ....जितेंद्र सर ने थोड़ा मुस्कराते हुए बोला...अब वे थोड़ा बढ़िया फील कर रहे थे.

 

 

 

 

उधमपुर जिले में ही पिंटू का ननिहाल है और किस्मत का खेल देखिये कि उधमपुर जिले की टीम का भी एक खिलाड़ी किसी कारण कम हो गया था.

 

 

 

 

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पिंटू का दोस्त रमेश जो कि पढ़ने में बहुत बढ़िया था और उसका घर पिंटू के नाना के घर के ठीक बगल में था. जिसके कारण वे दोनों दोस्त बन गए थे.

 

 

 

लेकिन पिंटू अब वापस कबड्डी का खेल नहीं खेलना चाहता था. उसने बैटमिंटन को चुन लिया था और उसी में ही अपना कैरियर बनाना चाहता था.

 

 

धर्मा पिंटू से मिलने उसके नाना के घर आया, उस समय पिंटू प्रेक्टिस कर के वापस लौटा था, इतने में रमेश भी गया. पिंटू ने दोनो की बातों को ध्यान से सुना, अब वह बुरी तरह असमंजस में पड़  गया था. अब वह किसकी बात माने और वह भी तब जब वह खुद इस खेल को नहीं खेलना चाहता था.

 

 

 

अगर वह भाई का साथ देता तो दोस्त बुरा मान जाता और अगर दोस्त की बात मानता तो भाई......वह गहरे सोच में डूब गया. काफी सोचने के बाद वह स्कूल की तरफ से खेलने को राज़ी हो गया.

 

 

 

 

उसने रमेश को समझाते हुए कहा कि अगर मैं स्कूल के खिलाफ खेलता हूँ तो भाई की बदनामी होगी और अगर मैं उधमपुर की तरफ से खेलता हूँ और किसी कारणों से उधमपुर टीम हार जाती है तो लोग मेरे उपर आरोप लगा देंगे कि भाई की टीम को जीताने के लिए इसने  बढियाँ नहीं खेला. लेकिन फिर भी मैं दोनों लोगों को एक मौका दे रहा हूँ....मेरी एक शर्त है मेरा रैकेट मेरे साथ ही रहेगा....अब यह जिसको मंजूर हो मैं  उसकी टीम में जाने को तैयार हूँ.

 

 

 

 

 

Short Moral Stories in Hindi For Class 9

 

 

 

 

अभी रमेश सोच ही रहा था कि धर्मा ने हां कह दी. उसने सारी बातें जीतू सर को बताई…इस पर उन्होने कहा कि यह कबड्डी का खेल है हम रैकेट की कैसे इजाज़त दे सकते हैं ?

 

 

 

सर इसका भी मेरे पास एक उपाय है. रैकेट को हम मैच रेफ़री के पास रख देंगे…….धर्मा ने खुश होते हुए कहा..

 

 

 

 

 

दोनो ही टीमें मैदान में पहुच गयी. उधमपुर की तरफ से भी दूसरे खिलाड़ी को ले लिया गया था. पूरा मैदान दर्शकों से पट गया था. दर्शकों में गजब का उत्साह था,

 

 

 

 

सभी टीमें जब मैदान में प्रवेश कर रही थी तो सबकी नज़रें पिंटू पर ही थी, लोग यह सोच रहे थे कि कबड्डी के मैदान में यह रैकेट लेकर क्यों गया...आख़िर माजरा क्या है.

 

 

 

 

मैच शुरू होने के पहले खिलाड़ी एक दूसरे पर छींटाकसी करने लगे, विपक्षी टीम के खिलाड़ी पिंटू का मज़ाक उड़ाने लगे, लेकिन पिंटू कुछ नहीं बोला .

 

 

 

गुड, वेरी गुड....थैंक यू....अब मेरी चिंता ख़त्म हो गयी.

 

 

 

उसने रैकेट रेफ़री को दे दिया. मैच आरंभ हो गया….पहले ही चक्कर में पिथौरागढ़ की टीम उधमपुर पर भारी पड़ने लगी और यह सिलसिला अंत तक रुका नहीं, अंत में पिथौरागढ़ उधमपुर को भारी अंतर से हरा दिया.

 

 

 

 

पिंटू को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया. उसको इनाम लेने के लिए मंच पर बुलाया गया. तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वह मंच पर पहुंचा. उस इलाक़े के विधायक के हाथों उसे सम्मानित किया गया.

 

 

 

 

विधायक जी ने कहा कि आज तुमने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया.... तुम्हारे इतना बढ़ियाँ प्रदर्शन करने का कारण क्या है और यह रैकेट का क्या राज है, जिसे लेकर तुम मैदान में गये थे.

 

 

विश्‍वास ...... हां सही सुना आप सभी लोगों ने...कहा जाता है कि भगवान कणकण में रहते हैं...तो मेरा भगवान इसमें रहता है।

 

 

 

Moral Of This Story – आप किसी भी Work  को पूर्ण विश्वास से करेंगे तो आप जरूर Success हो जाएंगे। 

 

 

 

 

हिंदी प्रेरक स्टोरी

 

 

 

 

2- मित्रों कभी भी किसी को कमजोर समझकर उसे परेशान नहीं करना चाहिए।  हमेशा उसका सम्मान करना चाहिए, क्योंकि आप अगर उसे हमेशा परेशान करेंगे तो वह भी पलटवार कर सकता है और उसका पलटवार आप पर बहुत भारी पड़ सकता है, क्योंकि उसके पार कोई दूसरी Choice नहीं रहेगी।  आज की कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

क्लास में पढ़ाई चल रही थी। अचानक शोर उठा और सभी की निगाहे फिल्ड की तरफ गई तो सभी अवाक् रह गए। दो सांड आपस में लड़ रहे थे। उन दोनों की लड़ाई देखने के लिए सभी की पढ़ाई बंद हो गई। फिल्ड के चारो तरफ जमावड़ा लग गया।

 

 

 

 

बड़ा सांड कमजोर वाले पर भारी पड़ रहा था। बड़े वाले ने छोटे सांड को फिल्ड की दिवार से दबा दिया था। खुनी जंग थी। लेकिन तभी छोटे सांड ने पूरा जोर लगाकर बड़े वाले को उठाकर दे मारा।

 

 

 

 

बड़ा सांड कराहता हुआ जमीन सूंघ रहा था। अगर जन समूह ने छोटे सांड को भगाया नहीं होता तो छोटा सांड बड़े सांड की जान भी ले सकता था।

 

 

 

 

Moral Of This Story – मरता क्या न करता ? अगर जान पर बन जाए तो कुछ भी करना चाहिए।

 

 

 

 

कर्त्तव्य Moral Stories in Hindi For Class 9

 

 

 

 

 

3- भगवान श्रीकृष्ण जी ने कहा है ” कर्म करो फल की चिंता मत करो ” . मित्रों कभी भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए।  मित्रों आप पढ़ाई करें और पुरे Hard Work से करें, अपने कर्तव्य को हमेशा याद रखें आप जरूर Success  होंगे।

 

 

 

 

सिरसा गांव में बिहारीलाल नामक एक गरीब किसान रहता था।एक बार उस क्षेत्र में 10 वर्षों से अकाल पड़ा था। जिससे सभी लोगों का पलायन हो रहा था। लेकिन बिहारीलाल को अपनी पुश्तैनी जमीन पर मरना कबूल था, लेकिन उसे छोड़ना कबूल नहीं था।

 

 

 

 

वह खुद कृषकाय हो चुके थे और अपने दुबले हो चुके बैलों के साथ खेत में हल जरूर चलाते थे। बैल भी अपने मालिक का साथ बखूबी देते थे।एक दिन मेघराज ने कारण जानना चाहा और वह बृद्ध आदमी बनकर बिहारीलाल से प्रश्न कर बैठे, “आप इस सूखे मौसम में प्रत्येक दिन हल क्यूं चलाते है ?”

 

 

 

 

बिहारीलाल का उत्तर था, “अगर मैं अपने बैलों के साथ हल न चलाऊं तो, मैं और मेरे बैल दोनों अपने कर्तव्य को और खुद को भूल जाएंगे।” मेघराज को अपनी भूल का आभास हो चुका था जो 10 साल से सिरसा गांव के क्षेत्र से वंचित रखे हुए थे। उसी दिन रात में बारिश हुई और धरती और किसान दोनों ख़ुशी से झूमने लगे।

 

 

 

Moral Of This Story – अपने कर्तव्य को भूलने पर पछताने के सिवाय कुछ नहीं मिलता।

 

 

 

खिलाड़ी हिंदी प्रेरक कहानियां Moral Story in Hindi 

 

 

 

4- मित्रों आपको जिस क्षेत्र में विश्वास हो उसी में आप आगे बढ़ें।  अगर आप अपने Interest के हिसाब से आगे बढ़ेंगे तो जरूर Success होंगे।  आप अपने Interest के बारे में अपने Parent को बताएं और फिर Hard Work  करिये, आप सफल जरूर होंगे, लेकिन जब तक आप अपना Goal  तय नहीं करेंगे तो आप Success नहीं हो सकते, इसलिए आप अपना Goal तय करें और आगे बढ़ें। 

 

 

 

 

रमन जब तीसरी कक्षा में था, तो प्रायः लकड़ी की हॉकी बनाकर वह अपने दोस्तों के साथ खेला करता था। इस समय रमन शारदा इंटर कॉलेज में कक्षा 7  का विद्यार्थी है।

 

 

 

 

कक्षा 7 और कक्षा 8  के विद्यार्थियों में हॉकी का मैच होना था। रमन पुराने सहपाठियों के आग्रह पर इस शर्त पर तैयार हुआ कि वह सेंटर फारवर्ड खेलेगा वह अपना नाम ग्यारह खिलाड़ियों में लिखवाया।

 

 

 

 

लेकिन कुछ विद्यार्थियों ने उस पर नया होने के कारण एतराज जताया था। इसलिए उसे  centre-half    के स्थान पर रखा गया था। कुछ दिन बाद मैच शुरू हो गया लेकिन कक्षा 8  के लड़कों ने बड़ी फुर्ती के साथ हाफ टाइम तक तीन गोल कर चुके थे। कक्षा 7  के खिलाड़ियों में बेचैनी थी।

 

 

 

 

 

लेकिन रमन के खेल को देखने के बाद कक्षा 7 के अध्यापक ने अपनी नीतियां बदल दी। उधर रमन को उसके पसंदीदा स्थान पर खेलने का मौका मिला। खेल शुरू होते ही रमन को मानो हवा के पंख लग गए।

 

 

 

 

 

कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही कक्षा 8  का गोलकीपर बगले झांक रहा था, यानी कि कक्षा 8  के ऊपर एक गोल को चुका था। 15 मिनट के अंदर ही कक्षा 8  के ऊपर कक्षा 7  वाले हावी हो चुके थे।

 

 

 

 

 

 

कक्षा 7  के खिलाड़ी 4-3 से मुकाबला जीत चुके थे। अपने खेल को निखारने के प्रयास में रमन अपनी पढ़ाई का कार्य भी पूरा नहीं कर पाता था।   इसलिए उसे प्रायः अपने घर वालों से डांट पड़ती थी। लेकिन रमन संतुष्ट रहता था। जिला स्तर की प्रतियोगिता थी। शारदा इंटर कॉलेज की तरफ से सेंटर फारवर्ड के लिए रमन का चुनाव किया गया था।

 

 

 

 

रमन अपने खेल को इतना संवार चुका था कि उसके कौशल से Opposition के पसीने छूट गए और शारदा इंटर कॉलेज का परचम लहरा उठा। उसकी इसी योग्यता को देखकर स्कूल प्रबंधक ने उसे खेल शिक्षक के पद पर तैनात कर दिया।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – रमन अपने खेल के लक्ष्य को साधने के साथ ही सभी लक्ष्य स्वयं सध गए।

 

 

 

 

अवसर Moral Stories Hindi

 

 

 

 

5 – मित्रों किसी भी चीज में हार – जीत लगी रहती है और पास – फेल भी लगा रहता है, लेकिन हार जाने पर निराश ना हों बल्कि और भी अधिक ताकत से जीतने का प्रयास करें, आप निश्चित ही Success होंगे।  आज की Moral Story इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

एक गांव में  नाग पंचमी के शुभ अवसर पर खेल का आयोजन किया गया था। मैदान के बीच में एक खंभा गड़ा हुआ था। खम्भा एकदम चिकना और गोल था। उसके ऊपर तेल का लेप किया गया था।

 

 

 

 

 

10 बच्चों का समूह था। प्रत्येक को उस खंभे के ऊपर चढ़ने के लिए बारी-बारी से अवसर दिया गया था। सभी लोग प्रत्येक बच्चों का उत्साह वर्धन कर रहे थे। लेकिन फिर भी कोई भी लड़का उस खंभे के आधे भाग से ऊपर नहीं जा सका।

 

 

 

 

 

सबसे पीछे एक छोटे लड़के की बारी आई। पहले ही प्रयास में वह खंभे के आधे भाग तक गया लेकिन गिर गया। सभी लोग उसका मजाक उड़ाने लगे, दूसरे प्रयास में वह खंभे के ऊपरी किनारे तक पहुँच गया था, लेकिन वह फिर गिर गया। लोगों का समूह अब उसकी हौसला बढ़ाने लगे।

 

 

 

 

वह उठ कर गिरा, गिर कर उठा, पुनः प्रयास किया,  परिणाम सबके सामने था। वह उस खंभे के शिखर के ऊपर था। जहां पहुँचने का स्वप्न तो सभी ने देखा था लेकिन प्रयास अधूरा किया था।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – किसी कार्य को करने की जिद ही हमें मंजिल तक पहुंचाती है। 

 

 

 

 

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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