New Moral Stories in Hindi Written / बांके बिहारी के परम भक्त की कहानी हिंदी में

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New Moral Stories in Hindi पाठकगणों इस मोस्ट में Moral Stories in Hindi For Kids की नयी और प्रेरणादायक Story in Hindi दी गयी है।  आप Moral Stories in Hindi जरूर पढ़ें। 

 

 

 

 

मदद हिंदी कहानी ( Moral Stories in Hindi Written ) 

 

 

 

 

एक महिला अपने बच्चे के साथ मार्केट जा रही थी। तभी उसे एक गाड़ी वाले ने टक्कर मार दी और वह भाग गया।  महिला को काफी चोट आई थी और वह सड़क के किनारे पड़ी  दर्द से कराह रही थी और कुछ दूरी पर उसका बच्चा रो रहा था।

 

 

 

 

 

वह अपने बच्चे को चुप कराने की स्थिति में भी नहीं  थी।  दर्जनों लोग वहां से आ – जा रहे थे लेकिन कोई उसकी  मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था।

 

 

 

 

 

उनमें से कुछ अगर रुकते  भी तो बस घटना पर अफसोस जताते और वहां से चले जाते। जो भी रुकता उसके मुंह से ही निकलता, ” कौन है बेचारी? कितनी देर से कराह रही है लेकिन कोई आगे  नहीं आ रहा है ” फिर आपस में ही कहते,  कौन आगे आएगा ? जनाब कौन इस लफड़े में फंसे। ”

 

 

 

 

 

तभी  सोनपरी वहाँ हवामार्ग  से गुजर थी। उसने जब महिला को इस स्थिति में देखा तो उसे बड़ा दुख हुआ। उसने अपना रूप  बदला और अपनी जादुई शक्ति से एक एंबुलेंस प्रकट किया।

 

 

 

उसने तुरंत ही महिला को उस एंबुलेंस में डाला उसे हॉस्पिटल ले जाने लगी।  तभी एक आदमी ने कहा, “मैडम आप इस लफड़े में क्यों फंस रही है ?”

 

 

 

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इस पर सोनपरी बहुत अधिक क्रोधित हो गयी।  उसने कहा, ” किसी की मदद करना किसी लफड़े में पड़ना नहीं होता है। अगर मनुष्य किसी मनुष्य की मदद नहीं करेगा तो फिर उसकी मदद कौन करेगा ? आज इस महिला के साथ ऐसा हुआ है।  कल आपके  साथ भी हो सकता है। ”

 

 

 

सबकी नजरें  नीचे झुक गयी।  सोनपरी उसे जल्द ही हॉस्पिटल ले गई और उसके घर वालों को फोन करके बताया।  थोड़ी ही देर में महिला के घर वाले आ गए।  उन्होंने सोनपरी को धन्यवाद किया। मित्रों अगर आप भी किसी घायल को देखें तो उसकी मदद जरूर करें।

 

 

 

Moral Of This Story – जैसा आप दूसरों के साथ करेंगे वैसा ही आप के साथ भी होगा, इसलिए समाज में बदलाव के लिए लोगों की मदद करें। 

 

 

 

 

 

संगठन की शक्ति 

 

 

 

 

2- यह एक New Moral Stories in Hindi Matter है।  इसमें बहुत ही अच्छी हिंदी कहानी दी गयी है।  आप यह शिक्षा की कहानी जरूर पढ़ें। एक वन में एक बहुत ही बड़ा और क्रूर अजगर था. वह जब भी बिल से निकलता तो सारे जानवर डरकर भागने लगते. एक बार अजगर शिकार की तलाश में था.

 

 

 

अगल बगल के सारे जानवर भाग निकले थे. वह गुस्से से लाल हो गया और फुफकार मारने लगा और इधर उधर आहार की खोज करने लगा. वही नजदीक में एक हिरणी अपने नवजात बच्चों को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपाकर भोजन की तलाश में गयी थी.

 

 

 

अजगर की तेज फुफकार से पत्तियां उड़ने लगी और हिरणी के बच्चे दिख गए. इतना भयानक जानवर देख हिरणी के बच्चे सहम गए और देखते ही देखते अजगर उन्हें निगल गया.

 

 

 

तब तक हिरणी भी आ गयी थी. वह बेचारी असहाय कर भी क्या सकती थी. उसे बड़ा ही दुःख हुआ. उसी जंगल में उसकी दोस्ती एक नेवले से थी. उसने नेवले को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई.

 

 

 

 

इस पर वह बोला, ” बहन मेरा बस चलता तो अभी उस दुष्ट अजगर को मार डालता. लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ. वह तो मुझे एक झटके में मार देगा. लेकिन वहीँ पास में चीटियों की एक बाम्बी है. वहाँ की रानी चींटी मेरी मित्र है. मैं उससे बात करता  हूँ. शायद वह कुछ करे.”

 

 

 

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हिरणी निराश होकर बोली” तुम तो इतने बड़े जानवर होकर उसका कुछ नहीं कर सकते तो चींटी भला क्या कर पाएगी.” इस पर नेवला बोला ऐसी बात नहीं है.

 

 

 

चींटी के पास बहुत ही बड़ी सेना है और संगठन में बड़ी शक्ति होती है. नेवले की बात से हिरणी को आशा नजर आई. दोनों चींटी के पास पहुंचे और सारी कहानी बताई.

 

 

 

चींटी से कुछ देर सोचा और बोली, ” ठीक है. हम तुम्हारी सहायता करेंगे. उस दुष्ट अजगार को सजा मिलनी ही चाहिए. चींटी ने कहा हमारी बांबी के पास एक संकरीला नुकीला रास्ता है.तुम किसी तरह अजगर को उस रास्ते पर आने को मजबूर करो. बाकी काम हम कर लेंगे” नवाले को चींटी पर पूरा विश्वास था. वह तैयार हो गया.

 

 

 

 

अगले नेवला अजगर की बिल के पास और उसे बोली बोलकर उकसाने लगा. क्रोध में अंधा अजगर बिल से निकला. नेवला प्लान के मुताबिक़ उसी संकरे रास्ते की दिशा में दौड़ पड़ा.

 

 

 

 

अजगर भी पीछे चल पड़ा. अजगर जब रुकता तो नेवला उसे और गुस्सा दिलाता और क्रोध में अंधा अजगर फिर से उसे दौड़ाने लगता.इसी तरह नेवला उसे संकरे रास्ते पर आने को मजबूर कर दिया.

 

 

 

संकरे रास्ते से गुजरते ही अजगर की देह छिलने लगी. जब वह उस रास्ते से बाहर निकला तो उसका बदन्न काफी छिल गया था और काफी खून निकल रहा था.

 

 

 

तभी चींटियों की सेना ने अजगर पर हमला कर दिया. चींटियाँ उसके शारीर के नंगे मांस को काटने लगी. अजगर तड़प उठा. वह अपने शरीर को पटकने लगा और इससे उसे और भी घाव होने लगे और चींटियों ने हमला तेज कर दिया. कुछ ही देर में अजगर तड़प – तड़पकर पर गया.

 

 

 

 

Moral of This Story – संगठन की शक्ति बड़ों – बड़ों को धुल चटा देती है.

 

 

 

 

खान – पान का असर ( New Moral Stories in Hindi Wikipedia )

 

 

 

 

 

3- एक राज्य एक बूढी गरीब महिला रहती थी।  वह भीख मांगकर अपना गुजारा करती थी।  एक नगर में वह एक महिला के घर रोजाना भिक्षा माँगने जाती थी।

 

 

 

 

वह महिला बहुत ही नेकदिल थी और रोज ही उस गरीब महिला को भिक्षा दे देती थी।  इससे उसे बहुत ही संतोष होता था।  एक दिन भिखारिन उस गृहणी के घर से जैसे चावल लेकर मुड़ी, गली में उस गृहणी का ढाई वर्षीय बालक खेलता दिखाई दिया।  उसने एक सोने की चैन पहन रखी थी।

 

 

 

भिखारिन की नियत बदल गई। उसने इधर – उधर देखा कोई नज़र नहीं आया।  बुढ़िया ने उस लडके के गले में से चैन ले ली और तुरंत ही वहाँ से भाग निकली।

 

 

 

उस सोने के चैन को लेते ही वह तुरंत भागकर अपने घर पहुंची और सोचने लगी कि इस चैन को बेचकर कुछ पैसे पाउंगी और मेरी गरीबी कुछ कम होगी।

 

 

 

यह सोचकर उस बूढी भिखारिन ने चैन को छुपा दिया और भोजन करके प्रसन्नता से सो गयी।  सुबह भिखारिन उठी और नित्यकर्म से होने के बाद उसे चैन का ख्याल आया।

 

 

 

उसे महसूस हुआ कि उसके मन में अचानक से परिवर्तन आ चुका था।  उसे बड़ी ही ग्लानि हो रही थी। उसने सोचा, ” मैंने यह कितना बड़ा अनर्थ कर दिया।  जहां से मेरा जीवन – यापन होता था, मेरी आजीविका चलती थी, वहाँ से मैंने चैन चुरा लिया।  यह तो घोर पाप हो गया है। मुझे उस महिला से क्षमा मांगनी ही होगी। ”

 

 

 

वह तुरंत ही भागकर उस महिला के घर पहुंची।  वह महिला द्वार पर ही खड़ी  थी।  बूढी भिखारिन ने कहा, ” मुझसे बहुत बड़ा अनर्थ हो गया है। मैंने कल एक घोर पाप कर दिया।  आप यह स्वर्ण चैन ले लो।

 

 

 

 

चैन को देखते ही गृहणी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।  उसने भिखारिन से पूछा, ” यह चैन तुम्हे कहाँ मिली ? ” इसपर भिखारिन ने कहा, ” मुझे क्षमा करें।  मेरी मति मारी गयी थी।  मैंने ही इस बच्चे के गले से यह चैन निकाल ली थी।  मुझे माफ़ कर दें। ”

 

 

 

 

 

इसपर बूढी भिखारिन ने कहा, ” नहीं, यह पाप मैंने ही किया है।  मैंने ही भरोसा तोड़ा है।    मैंने ही इस चैन की चोरी की है। परन्तु सुबह मुझे अपराध बोध हुआ तो मैंने इसे वापस लाना ही उचित समझा।  ”

 

 

 

 

गृहणी बड़े ही आश्चर्य में पड़ गयी।  भिखारिन ने फिर से गृहणी ने कहा, ” मुझे खुद पर विश्वास नहीं हो रहा है कि मैंने ऐसा कैसे किया।  इसके पहले तो मेरे मन में ऐसा कभी भी विचार नहीं आया। क्या आप बता सकती हैं यह चावल जो आपने मुझे दिया था वह कहा से ले आयी थी ? ”

 

 

 

 

 

इसपर गृहणी ने अपने पति से इस बारे में पूछा तो उसने बताया, ” मैंने यह चावल नाले  के पास से लाया था।  वह बहुत सस्ते में बेच रहा था।  बाद में पता चला कि वह चावल चोरी का था और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। ”

 

 

 

यह सुनते ही बूढी भिखारिन ने कहा, ” निश्चय ही उस चोरी के अन्न से मेरी बुद्धि भ्रस्ट हो गयी और मैंने यह महापाप किया।  ” इसपर गृहणी के पति ने कहा, ” निश्चय ही अवगुण रुपी अन्न का सीधा असर हमारे मन पर होता है। हमें वह अन्न फेंक ही देना चाहिए।  ”  इसके बाद उन्होंने अन्न का परित्याग कर दिया।

 

 

 

 

युक्ति से मुक्ति ( New Moral Stories in Hindi )

 

 

 

 

4- एक किसान था। उसके पास एक तोता था और एक बकरी थी। गर्मी के महीने में तीनों का भूख प्यास से बुरा हाल था। उस किसान के पास पैसा भी नहीं था, जिससे कि तीनों प्रणियों की उदर पूर्ति हो जाती। उस किसान को अपने से अधिक उन निरीह प्राणियों की चिंता थी। क्योकि तोता और बकरी अपनी व्यथा किसान से कह भी नहीं सकते थे।

 

 

 

 

 

अब तो किसान को भगवान का ही सहारा था। फिर उसने अपनी जेब और अंटी को टटोला कि शायद उसमे से कुछ पैसे मिल जाय और तीनो प्राणियों को जीवन दान मिले।

 

 

 

 

देव योग से उसकी अंटी में एक रूपए का सिक्का पड़ा था। लेकिन वह भी तीनों की उदर पूर्ति नहीं कर सकता था। सहसा किसान को एक युक्ति सूझी।

 

 

 

 

पास में एक बाजार था। किसान दोनों को लेकर बाजार में गया और वहां से पच्चास पैसे में एक बड़ा सा तरबूज लिया और उसे छीलके को अलग किया तरबूज के गूदे में जो बीज थे, उसे भी निकालकर एक तरफ रख दिया।

 

 

 

 

तरबूज के गूदे से अपनी भूख को शांत किया। छिलका बकरी को खिलाया तो उसकी जान में जान आई। तरबूज के बीज को खाकर तोता बहुत आनंदित हुआ। किसान अपने साथियों के साथ घर वापस लौट आया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – किसान ने अपनी युक्ति से खुद को और दो प्राणियों को भी भूख से मुक्ति दिलाया। इसलिए कभी हार नहीं माननी चाहिए।  हर परिस्थिति में लड़ना चाहिए।  सफलता अवश्य ही मिलेगी। 

 

 

 

 

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1- 5 Kahaniya in Hindi Written / जीवन को शिक्षा देने वाली हिंदी की 5 कहानियां

 

2- Moral Story in Hindi For Education

 

3- Moral Stories in Hindi with Pictures

 

4- New Moral Stories in Hindi 2019

 

 

 

Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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1 Response

  1. Tarun Goyal says:

    that’s impressive that you write stories in Hindi , good

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