Shikshaprad Child Moral Story in Hindi / छोटी शिक्षाप्रद बाल कहानी हिंदी में

Shikshaprad Child Story in Hindi

Shikshaprad Child Moral Story in Hindi मित्रों यह Shikshaprad Bal Kahani एक प्रेरणादायक कहानी है।  आपको इस पोस्ट में बहुत ही अच्छी हिंदी कहानी मिलेगी। 

 

 

 

 

Shikshaprad Child Moral Story in Hindi Writing

 

 

 

 

सुरसरि के तट पर अंबिकापुर नगर में सोहन पाल नामक एक सज्जन की अपने परिवार के साथ शांति पूर्वक अपनी जीवन नैया संसार सागर में ” ईश्वर की अनुकम्पा ” से आराम दायक स्थिति में चल रही थी।

 

 

 

 

सोहन पाल बड़े ही  ईश्वर परायण व्यक्ति थे और उनकी धर्म पत्नी हरिप्रिया भी धर्म – कर्म के काम में अपने पति का पूर्ण रूपेण साथ निभाती थी।

 

 

 

 

 

ईश्वर की इच्छनुसार उन्हें एक कन्या रूपी ‘ एक सुकोमल फूल ‘ प्राप्त था। वह दोनों प्राणी बड़े ही ख़ुशी से उस कन्या का पालन -पोषण करते थे। उन्होंने उस कन्या को ” गुड़िया ” नाम समर्पित किया था।

 

 

 

 

 

क्योकि वह अपने नाम के अनुरूप ही  गुड़िया  के जैसी ही थी। सोहन पाल के पडोसी भी उनकी ‘ पुत्री ‘को देखकर बहुत ही हर्षित  होते थे। कारण स्पष्ट  था ,कि गुड़िया  की बाल सुलभ  क्रीड़ा ‘ को देखकर (सोहन पाल के पड़ोसी ) क्षण भर के लिए अपनी चिंताओं को बिसार कर भाव विभोर हो जाते थे।

 

 

 

 

‘ हरिप्रिया ‘ ….. का तो कहना ही क्या, जैसे माली अपने बगीचे के फूलों को देखकर ….  आह्लादित  होता है। उसी प्रकार और वही दशा ” हरिप्रिया “की होती थी।

 

 

 

देखते ही देखते दिन बीतते चले जातें है। इस समय गुड़िया  चार वर्ष की हो चुकी है। और उसकी बाल सुलभ क्रीड़ा में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन बढ़ोत्तरी जरूर हो गई है।

 

 

 

उसकी  चंचलता  को देखकर लोगों ने उसे ….. चंचला  .…. नाम से पुकारना शुरू कर दिया था। चंचला की चपलता के साथ -साथ उसमे एक बड़ा ही आश्चर्य जनक  परिवर्तन हो रहा था। जिससे उसके प्रति लोगों की उत्सुकता  बढ़ती ही जा रही थी।

 

 

 

 

चंचला अपनी बाल सुलभता के कारण किसी को कुछ कहती तो, उस मनुष्य को वैसा ही ( एहसास ) होने लगता। जैसे चंचला ने किसी को कह दिया  कि लो नवीन वस्त्र धारण कर लो ….. तो सामने वाले को क्षण भर के लिए वैसा ही आभास होता था, जिस कारण चंचला और Famous होती जा रही थी।

 

 

 

 

 

एक दिन चंचला स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी। चंचला की माता हरिप्रिया किसी कार्य में व्यस्त होने के कारण चंचला को समय नहीं दे पाई। चंचला को स्कूल जाने में देर हो रही थी।

 

 

 

” आज मैं तुम्हें समय से तैयार नहीं कर पाई  इसलिए आज तुम्हें बहुत ही विलम्ब  हो गया। जाने दो आज स्कूल मत जाओ , समय से पहुँच नहीं पाओगी।  कल समय से पहले तुम्हे तैयार कर दूंगी, फिर तुम सब बच्चों के साथ ही जा सकोगी। ” चंचला की माता ने कहा।

 

 

 

 

लेकिन वह हार मानने वाली नहीं थी।  उसने कहा, ”  आप चिंता मत करो माता। मैं स्कूल में सबसे पहले ही पहुँच जाऊंगी। ” और फिर चंचला स्कूल के लिए निकल पड़ी इस प्रण के साथ कि उसे स्कूल में सबसे पहले पहुंचना है।

 

 

 

 

बस फिर क्या था, चंचला जिसके लिए विख्यात हो चुकी थी वही हुआ। चंचला को लगा जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे अपने साथ लिए जा रही है और चंचला स्कूल में सबसे पहले पहुँच चुकी थी।

 

 

 

पढाई ख़त्म होने पर अन्य बच्चों के साथ ही अपने घर आ गई और आते ही अपनी माता से भोजन की इच्छा व्यक्त कर दी। उसकी माता ने कहा ” बेटा आधे घंटे बाद।”

 

 

 

 

 

“ठीक है। मैं फ़टाफ़ट भोजन बना लेती हूँ। अच्छा माता जी आपको क्या खाना है?  बताओ मैं वही बना दूंगी। ” चंचला ने कहा।

 

 

 

 

 

” नाक तो साफ करने आता नहीं …… चली है भोजन बनाने।  ” हरिप्रिया ने हँसते हुए कहा।

 

 

 

” अरे बताओ तो, भोजन तुरंत ही बन जाएगा। ” चंचला ने कहा।

 

 

” अगर नहीं बना तो ? ” उसकी माता ने कहा।

 

 

 

” बन जाएगा न।  कितनी बार बोलूं।  ” चंचला ने कहा।

 

 

” ठीक है जाओ, खीर – पूड़ी बना दो।  ” उसकी माता  ने चंचला का मन रखने के लिए कह दिया।

 

 

 

आधे घंटे बाद चंचला की आवाज आई, ”   माता जी भोजन तैयार है। आकर खा लीजिए।  ” हरिप्रिया  दौड़ती हुई रसोई में आई तो उसके ‘ आश्चर्य ‘ का ठिकाना नहीं था। उसने देखा कि सचमुच भोजन तैयार था।

 

 

 

 

” यह तुमने कैसे किया ?  घर में सिर्फ चावल के सिवाय और कुछ था ही नहीं । ” उसकी माता ने कहा। ” तुम दोनों में क्या वार्तालाप हो रहा है ? ”  सोहन पाल आते ही बोल उठे।

 

 

 

कुछ नहीं पिता जी, माता जी ने भोजन बनाने के लिए कहा और मैने भोजन बना दिया। इसलिए माँ ‘ आश्चर्य ‘ कर रही है।

 

 

 

 

” इसमें आश्चर्य की क्या बात है। ” सोहन पाल ने कहा। ”  घर में कुछ नहीं है और भोजन बनकर तैयार हो गया। यह आश्चर्य  नहीं  तो फिर क्या  है ? हरिप्रिया ने कहा।

 

 

 

 

” तुम्हे तो घर के कामों से  छुटकारा ही नहीं मिलता ……. तुम कैसे समझोगी की हमारी बेटी क्या -क्या कर सकती है। यह अपनी उम्र की लड़कियों से ‘ मीलों नहीं -कोसों ‘ आगे है। ” सोहन पाल ने कहा।

 

 

 

 

” अच्छा ….. तभी तो परसों  गिरिजा चाची हमसे कह रही थी कि तुम्हरी बेटी तो बहुत ही कुशल  है। उसे हर काम निपुड़ता से करना आता है। कितने अच्छे संस्कार ‘दिए है तुम लोगों ने उसे। वह हर काम में बहुत ही पारंगत  है। ” हरिप्रिया ने कहा।

 

 

 

 

” अच्छा और क्या बता रही थीं गिरिजा चाची ? ” सोहनपाल ने पूछा।

 

 

 

 

हरिप्रिया सोहन पाल को गिरिजा चाची की बात बताने लगी।  संध्या काल का समय था।  सात बज रहे थे। ” आज भोजन नहीं बनेगा क्या चाची ? ” चंचला ने  गिरिजा  चाची से पूछा।

 

 

 

” आज रसोई घर में अन्न का एक भी दाना नहीं है तो भोजन कहाँ से बनेगा। पैसे की व्यवस्था भी नहीं है कि दुकान से ख़रीदा जा सके। ” गिरिजा चाची ने उदास होते हुए कहा।

 

 

 

 

” ईश्वर पर इतना विश्वास  करते हुए भी ‘ हताश ‘ होती हो। हमें चलकर अपना रसोई घर दिखाओ।  “चंचला ने गिरिजा चाची से कहा।

 

 

 

 

चंचला जब  चाची के साथ रसोईघर पहुंची तो बोली, ” चाची क्या खाना चाहोगी ? ”

 

 

 

इसपर चाची ने कहा, ” क्या खाएं बेटी ? जो कुछ भी मिल जाए, लेकिन यहाँ तो कुछ है ही नहीं। ”

 

 

 

” आप चिंता न करो ” यह कहकर चंचला दाल की पतीली में दाल डालने का उपक्रम करने लगी और उसके बाद अन्य भोजन के लिए भी उसने ऐसा ही किया और चंद मिनट में ही सारा भोजन  तैयार हो गया। गिरिजा चाची आश्चर्य चकित होकर सब देख रही थी। उन्हें लग रहा था, जैसे कोई  सपना देख रही हो। उनकी तन्द्रा तब भंग हुई  जब चंचला ने कहा, ”  चाची मैं जा रही हूं आप भोजन कर लेना। ”

 

 

 

 

 

चाची भोजन के उपरांत ईश्वर का धन्यवाद करते हुए चंचला को आशीष  देने लगी और चंचला का यह नित्य का काम हो गया कि कोई भी बेसहारा  भूखा और परेशान  होकर न सो जाय। उसे असहाय लोगों की सहायता करने में अतिआनंद आता था।

 

 

 

” लेकिन उसके पास ऐसी शक्ति आयी कहाँ से ? ” हरिप्रिया ने आश्चर्य व्यक्त किया।

 

 

” माँ यह जादू मुझे परी ने दिया है।  दो महीने पहले जब मैं स्कूल के रास्ते से आ रही थी तब मुझे नाले में एक कुत्ते का बच्चा गिरा हुआ दिखाई दिया।  दोपहर के समय उधर से कोई नहीं आ रहा था।  मैंने बहुत आवाज लगाईं, लेकिन कोई नहीं आया।  तब मैंने स्वयं ही उसे बचाने का निर्णय लिया। लेकिन इस प्रयास में मैं स्वयं ही उसमें गिर गई, तभी वहां से एक परी गुजरी।  उन्होंने हम दोनों को बाहर निकाला और मुझसे कहा कि तुमने बहुत ही अच्छा कार्य किया है।  तुम बहुत ही दयालु हो।  तुममे मानवता भरी है।  मैं तुम्हे शक्ति देती हूँ जिससे तुम लोगों की सेवा कर सकती हो और इस तरह से मेरे पास शक्ति आयी।  ” चंचला ने कहा।

 

 

 

इससे सभी लोग बहुत खुश हुए और उसके बाद चंचला का ऐसा कार्य नियमित तौर से जारी रहा। इसीलिए कहा गया है जो नेक कार्य करता है भगवान किसी ना किसी रूप में उसकी मदद अवश्य करते हैं।

 

 

 

चिड़िया और बिल्ली

 

 

 

2- एक घने बरगद के पेड़ के ऊपर असंख्य चिड़ियों का बसेरा था और उसी बरगद के पेड़ मे एक सर्प का निवास भी था। सर्प रोज़ एक चड़िया का भक्षण कर जाता,  जिस कारण चिड़ियों की संख्या की कम होने लगी। एक दिन चिड़ियों ने उस सर्प को देख लिया।

 

 

 

 

 

चिड़ियों की अपनी संख्या कम होने कारण ज्ञात हो चुका था। सभी चिड़ियों ने अपना ठिकाना बदल दिया। उसमे से एक चिड़िया किसान के घर आकर रहने लगी। किसान ने एक बिल्ली पाल रखी थी। किसान बिल्ली को रोज दूध पिलाता जिससे बिल्ली काफी मोटी  हो गई थी।

 

 

 

 

चिड़िया ने किसान के घर में चार अंडे दिए। कुछ दिन के बाद उसमे से चार बच्चे निकले। बिल्ली को काफी दिनों से शिकार नहीं मिला था। वह मौके की ताक में थी। एक दिन चिड़िया के बच्चे किसान के घर में खेल रहे थे, तभी बिल्ली ने उन्हें अपना निवाला बनाने का प्रयास किया।

 

 

 

 

 

उसी समय किसान दूध लेकर आया और गर्म करने के लिए उसे हंडिया में डाला ही था कि बिल्ली ने चिड़िया के बच्चों के ऊपर छलांग लगा दी। अब बच्चे उड़ने लगे थे, सो चिड़िया के साथ उड़ गए। लेकिन बिल्ली के इस प्रयास में हंडिया मे रखा दूध गिर गया।

 

 

 

 

 

गुस्से में किसान ने बिल्ली के ऊपर डंडा दे मारा जिसे उसकी एक टांग टूट गई और किसान ने उस पालतू बिल्ली को भगा दिया।

 

 

 

 

 

Moral Of The Story  – किसी का स्वभाव अच्छा हो या ख़राब कम जरूर होता है लेकिन वह कभी छूटता नहीं है। जो दूसरे के लिए कुंआ खोदता है, उसके लिए खांई तैयार रहती है।

 

 

 

 

 

 

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1- Shikshaprad Kahani in Hindi Language 

 

2- Short Shikshaprad Kahani

 

3- Shikshaprad Hasya Kahani

 

 

Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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