Short Moral Stories in Hindi For Class 1, 2 / 3 बच्चों की शिक्षाप्रद कहानियां

Short Moral Stories in Hindi For Class 1

Short Moral Stories in Hindi For Class 1 मित्रों इस पोस्ट में Short Moral Stories in Hindi For Class 1 Pdf की कहानी है।  यह बहुत ही प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद हिंदी कहानी है। 

 

 

 

 

विश्वास ही सबसे बड़ी भक्ति है ( Short Moral Stories in Hindi For Class 1 )

 

 

 

मित्रों  विश्वास में बड़ी ताकत होती है।  अगर आप सकारातमक हैं और सच्चे मन से विश्वास करते हैं तो आपको सफलता निश्चित ही प्राप्त होगी।  आज की यह कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

स्कूल में क्लास चल रहा था..अध्यापक सुरेश गुप्ता बच्चों को पढ़ा रहे थे. जब स्कूल की छुट्टी का समय हुआ तो अति आवश्यक सूचना के लिए सभी विद्यार्थियों को स्कूल के प्रांगण में इकट्ठा होने की लिए चपरासी सुरेश के द्वारा सभी कक्षाओं में सूचना प्रसारित करवा दिया गया.

 

 

 

भक्त का विश्वास 

 

 

 

 

सभी विद्यार्धियों के इकट्ठा होने के बाद प्रधानाचार्य संपूर्णानंद ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों हमें यह बताते हुये बड़ी प्रसन्नता हो रही है कि हमारे और आपके इस विद्याल को कल २५ वर्ष पूरे हो रहे हैं. इस उपलक्ष्य में यहां एक समारोह का आयोजन किया जा रहा है.

 

 

 

 

इसे यादगार बनाने के लिए हम सभी को मिलकर सम्मिलित प्रयास करना होगा. प्रत्येक विद्यार्थी को उसके प्रधान शिक्षक बताएंगे कि किसे क्या सहयोग करना है.

 

 

 

 

Short Moral Stories in Hindi For Class 2

 

 

 

 

स्कूल की छुट्टी हो गयी....सभी बच्चे अपनेअपने घर को चले गये..लेकिन रोज की तरह छोटा बच्चा नीलेश आज भी सबसे पीछे रह गया. उस विद्यालय के रास्ते में एक जंगल पड़ता था. सभी बच्चे बड़े होने के कारण एक साथ मिलकर निकल जाते थे.

 

 

 

लेकिन नीलेश पीछे ही रह जाता था..ऐसे में उसे जंगल में बहुत ही डर लगता था. उसने यह बात अपनी मां को बताई थी, तो उसकी मां ने कहा था कि तुम आने और जाने के समय अपने कन्हैया भैया को आवाज़ लगाना...वे तुम्हें जंगल पार करा देंगे.

 

 

 

नीलेश बालक था....अबोध था...जब घर जाते समय जंगल के करीब पहुंचा तो उसे मां की बात याद गयी. उसने ज़ोरज़ोर से कन्हैया भैया..कन्हैया भैया चिल्लाने लगा..और वह जंगल पार कर गया. अब यह उसका रोज का काम हो गया. विश्वास में बड़ी ताक़त होती है.

 

 

 

जब वह घर पहुंचा तो बहुत निरास लग रहा था..उसे निरास देखकर उसकी मां ने इसका कारण पूछा तो उसने कहा कि विद्यालय में एक कार्यक्रम रखा गया है. उसमे सभी बच्चों से फूल लाने को कहा गया है. जिससे विद्यालय में जो भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित है उसे सजाया जा सके.

 

 

 

 

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इसमें क्या बड़ी बात है ...तुम अपने कन्हैया भैया से मांग लेना ..वे ज़रूर दे देंगे...इस पर नीलेश एकदम शांत हो गया..और उसकी मां भी चुप हो गयी. लेकिन इस चुप्पी में बहुत ही बड़ा दर्द छुपा था.. नीलेश भले ही बालक था, लेकिन वह अपनी मां की बेबसी को समझता था.

 

 

 

 

उसके पिता को मरे साल हो गये थे..घर में उसकी मां के अलावा कोई नहीं था. उसकी मां किसी तरह खेतों में काम करके, दूसरों के घरों में काम घर का खर्चा चलाती थी.

 

 

 

 

उससे वह वाकिफ़ था...उसने कहा ठीक है मां..मैं कन्हैया भैया से बोल दूंगा......उसकी यह बातें सुनकर उसकी मां जो अब तक अपने जज्बातों को दबाए हुए थी.

 

 

 

 

वे आसुओं में परिवर्तित हो गयी.....अपनी मां को रोता देख नीलेश भी रोने लगा....कभी उसकी मां नीलेश को चुप कराती..तो कभी नीलेश अपनी मां को ..उनके इस करुन क्रंदान से पत्थर का भी दिल पसीज जाता....उन बेसहरों का अब कन्हैया के अलावा कोई सहारा नहीं था.

 

 

 

शेखर विद्यालय की ओर निकाला..उसने देखा कि सभी बच्चे तरहतरह के फूल लिए हुए है...कोई गेंदे का फूल लिया है तो कोई कनैल..तो कोई चमेली का फूल लिया है.

 

 

 

 

सभी बच्चे बहुत खुश थे और अपने अपने फूल की तारीफ कर रहे थे. निराश मन से चलता हुआ नीलेश जंगल के पास पहुंचा, सभी बच्चे आगे निकल गये थे.

 

 

 

Short Moral Stories in Hindi For Class 1

 

 

 

 

वह वहीं बैठ गया और रोने लगा. तभी एक सावला सा युवक आया, जिसका चेहरा तेज से चमक रहा था... अधरों पर मनमोहक मुस्कान थी..सिर पर मोर पंख विराजमान थे.

 

 

 

क्या हुआ…क्यों रो रहे हो? उस युवक ने कहा.

 

 

आप कौन ? ..नीलेश चौक कर बोला और पीछे सरकने लगा.

 

 

अरे..क्या कर रहे हो..तुम तो मुझे रोज बुलाते थे..आज तुमने मुझे बुलाया ही नहीं तो मुझे खुद आना पड़ा..उस युवक ने कहा .

 

 

कन्हैया भैया...नीलेश खुश होते हुए बोला.

 

 

हां...लो यह फूल...यह भगवान विघ्नेश्वर को दे देना..वे तुम्हारे सारे कष्ट को ख़त्म कर देंगे..उस युवक ने फूल देते हुए कहा.

 

लेकिन मैने तो आपसे फूल माँगा ही नहीं...फिर आपको कैसे पता चला...नीलेश ने कहा.

 

 

 

तुम मुझे क्या कहते हो..कन्हैया भैया ...यानी कि मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ....तो मुझे अपने छोटे भाई की परेशानी कैसे पता नहीं चलेगी....और विद्यालय से छूटने पर मुझे ज़रूर मिलना...मुस्कुराते हुए उस युवक ने कहा.

 

 

फिर कन्हैया ने नीलेश को जंगल पार करा दिया. नीलेश विद्यालय पहुंचा और टीचर से बोला कि यह फूल कहां रखना है..टीचर ने कहा कि इसे गणेश जी को अर्पित कर दो.....तभी उनकी नज़र फूल पर गयी. उन्होने देखा कि उस फूल में से एक चमक निकल रही थी....और उसकी सुगंध से पूरा वातावरण सुगंधित होने लगा था.

 

 

यह फूल तुम्हे कहा से मिला...टीचर ने नीलेश से पूछा.

 

मेरे कन्हैया भैया ने दिया...नीलेश खुश होते हुए बोला.

 

अच्छा ठीक है...जाओ उसे भगवान गणेश जी को अर्पित कर दो...टीचर ने कहा.

 

 

नीलेश ने फूल चढ़ा दिया...उसके बाद पूजा हुई..सबको प्रसाद दिया गया..उसके बाद छुट्टी हो गयी...छुट्टी के बाद नीलेश जब वापस लौटा तो जंगल के पास पहुँच कर अपनी कन्हैया भैया को पुकारा....फिर वही सावला सा युवक निकला.

 

 

 

 

 

निलेश  ने खुशीखुशी उन्हें प्रसाद दिया..उसके बाद उस युवक ने नीलेश को एक पोटली देते हुए कहा कि जाओ और यह पोटली अपनी मां को दे देना..और कहना कि कन्हैया भैया ने दिया है. 

 

 

 

नीलेश घर गया और पोटली देते हुए सारी बात बता दी....उसकी मां ने जब पोटली खोला तो उनकी आंखों में आसू गये...लेकिन यह आंसू  खुशी के, विश्वास और संतोष के थी...उस पोटली में ढेर सारे रुपये और जवाहरात थे. अब उनकी जिंदगी चैन से कटने लगी.

 

 

 

Moral Of This Story  :- विश्वास ही सबसे बड़ी भक्ति है. 

 

 

 

उपकार ( Hindi Short Stories For Class 1 )

 

 

 

मित्रों आप अगर किसी के साथ भला करेंगे तो आपके साथ भी भलाई होगी।  कभी भी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए।  हमेशा हर किसी की मदद करनी चाहिए।  आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

दयाल सिंह सायकल से बाजार जा रहे थे। तभी उनकी नजर एक कुत्ते के बच्चे पर पड़ी, जो घायल अवस्था में पड़ा था और दर्द से कराह रहा था। उन्होंने उसे उठाया और घर लौट आए। उन्होंने उसकी दवा की और उनके प्रयास से कुत्ते का बच्चा स्वस्थ हो गया।

 

 

 

 

वह हमेशा दयाल के साथ ही रहता था।  दयाल का एक बैग कही गिर गया था जिसमे उनके खेतों के पेपर थे। जिसकी वजह से दयाल बहुत परेशान थे, लेकिन उनका पालतू कुत्ता मोती कहीं नहीं दिख रहा था।

 

 

 

 

कुछ समय के उपरांत मोती एक बैग को घसीटकर लाया और दयाल के सामने रख दिया। जिसमे उनके खेत के पेपर सुरक्षित थे। मोती के प्रयास से अनेकों बार उनका नुकसान होने से बच गया था।

 

 

 

 

सीख- सहायता कभी व्यर्थ नहीं जाती है।  Moral Of This Story – Help never goes in vain.

 

 

 

शेखर का प्रयास 

 

 

 

3- मित्रों हमेशा जहां तक हो सके लोगों की मदद जरूर करनी चाहिए।  हमें बचपन से ही यह आदत बनानी चाहिए।  अगर आप किसी की Help करेंगे तो आपको बहुत ख़ुशी होगी।  आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

शेखर को फूलों और वृक्षों से बहुत लगाव था। जब वह तीन साल का था। उसने एक गुड़हल का पौधा लगाया था। आज वह पौधा एक छोटे वृक्ष का रूप ले चुका है और प्रायः फूलों से भरा रहता है। जिसे देखने पर शेखर को आत्मसंतुष्टि अनुभव होती है।

 

 

 

 

एक दिन एक बुढ़िया फूलों का हार बनाकर बाजार में बेचने के लिए ले जा रही थी। तभी उसकी टोकरी से फूलों का हार गिर गया बुढ़िया काफी दूर निकल गई थी।

 

 

 

 

शेखर खेल रहा था। उसकी नजर उस गिरे हुए फूलों के हार पर गई।  वह उसे उठाकर दौड़ते हुए बुढ़िया के पास पहुंचाकर ही दम लिया और बुढ़िया को हानि से बचा लिया।

 

 

 

 

सीख- दूसरों की सहायता करने से प्रसन्नता अनुभव होती है।

 

 

Moral Of This Story – Helping others brings happiness.

 

 

 

सच्चाई की जीत ( Short Moral Stories in Hindi For Class 3 ) 

 

 

 

 

4- मित्रों कितनी भी मुसीबत आ जाए, लेकिन सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता है।  अगर आप सच्चाई पर हैं तो आपका जीतना निश्चित है।  यह जरूर है कि आपको कुछ मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है, परन्तु विजय आपकी ही होगी। 

 

 

 

 

एक देश में एक परी रहती थी . उसके बाल गुलाबी थे . इसलिए लोग गुलाबी परी कहते थे . वह हर रात अपने महल की बालकनी में आती और उसके आते ही एक जादुई चिड़िया उसके कंधे पर आकर बैठ जाती .

 

 

 

उसके बाद परी सुन्दर लोरी गाती और राज्य के सभी लोग सो जाते और सुबह तक सुन्दर – सुन्दर सपने देखते . यह गुलाबीपरी का रोज का काम था .

 

 

 

एक दिन की बात है . एक चुड़ैल को इस बात की जानकारी हुई तो उसे इसका बहुत बुरा लगा . उसने जब राज्य में आकर देखा तो पुरे राज्य में खुशहाली थी .

 

 

 

चुड़ैल क्रोध से भर गयी और गुस्से में एक जादुई शक्ति उसने गुलाबीपरी के बालों पर छोड़ दिया . जादुई शक्ति से गुलाबीपरी के बाल काले हो गए .

 

 

 

गुलाबीपरी हैरान रह गयी . उसे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था . रात को वह रोज की तरह बालकनी पर पहुंची और छोटी चिड़िया भी वहाँ आ गयी और परी ने रोज की तरह गीत गाये, लेकिन यह क्या इस बार सबको सुन्दर स्वप्न की जगह भयावह सपने दिखाई दिए .

 

 

 

 

 

पूरे राज्य में हाहाकार मच गया .  गुलाबीपरी भी परेशान हो गयी . उसने जादुई चिड़िया को पुकारा और उपाय पूछा . जादुई चिड़िया ने कहा अपने बालों को गुलाबजल से धो लो और यह कहकर चिड़िया उड़ गयी .

 

 

 

परी ने ढेर सारा गुलाब मंगवाया और उसे पानी में डालकर जैसे अपने बाल धोये उसके बाल फिर से गुलाबी हो गए . परी फिर शाम को लोरी गाई और सभी लोगों को सुन्दर सपने आये .

 

 

 

 

जब यह बात चुड़ैल को पता चली  तो वह और भी क्रोधित हो गयी . उसने फिर से गुलाबीपरी के बाल काले कर दिए और पुरे राज्य के गुलाबों को भी सुखा दिया .

 

 

 

अब तो परी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करे . उसने फिर से चिड़िया को बुलाया . चिड़िया ने फिर से वही जवाब दिया, ” बालों को गुलाबजल से धो लो . ”

 

 

 

 

लेकिन गुलाब तो पूरे राज्य में नहीं  हैं यह सोचकर परी रोने लगी . रोते समय उसके आंसू की एक बूँद जमीन पर गिरी . उसी समय एक राजकुमार वहाँ से गुजर रहा था .

 

 

 

 

उसे राज्य के सारे हालात के बारे में पता चल गया था . उसने अपनी जेब से एक गुलाबी बाल निकाला और उसे आंसू पर रख दिया . आंसू पर रखते ही वह बाल गुलाब में परिवर्तित हो गया .

 

 

 

उसने वह गुलाब उठाया और राजकुमारी के पास ले गया . तब तक वहाँ राजा और मंत्री भी पहुँच चुके थे . राजकुमारी गुलाब देखकर बड़ी प्रसन्न हुई .

 

 

 

उसने पूछा यह गुलाब आपको कहा मिला . तब राजकुमार ने पूरी बात बतायी तो सभी आश्चर्यचकित रह गए . तभी राजा ने कहा वह गुलाबी तुम्हारे पास कैसे आये और वह बाल किसके थे .

 

 

 

तब राजकुमार ने कहा, ” यह बाल गुलाबीपरी के ही थे . बचपन में खेलते समय हमने एक दुसरे के बाल तोड़े थे और उसे सहेज कर रख दिया था . ”

 

 

 

” हाँ पिताजी, राजकुमार ठीक कह रहे हैं . हम तब विद्यालय में पढ़ते थे और उसी  समय इनसे हमारी मुलाक़ात हुई थी . यह पडोसी देश के राजकुमार हैं  ” और उसके बाद गुलाबीपरी ने भी राजकुमार के बाल दिखा दिए .

 

 

 

सभी बहुत खुश हुए . उसके बाद गुलाबीपरी ने अपने बालों को गुलाबजल में धोया और उसके बाल फिर से गुलाबी हो गए और बालों के गुलाबी होते ही पूरे राज्य में गुलाब भी खिल गए .

 

 

 

राजा ने अपने जादूगर सैनिकों को बुलाया और चुड़ैल को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया . इस बार जब चुड़ैल वापस आई तो सैनिकों ने उसे गिरफ्तार कर लिया और कैदखाने में डाल दिया .

 

 

 

उसके बाद परी और राजकुमार  का विवाह हो गया और सभी सुखी से रहने लगे .इस तरह फिर से एक बार अच्छाई की जीत हुई और बुराई की हार हुई।  इसिलिये कहा गया है सत्य कभी पराजित नहीं होता।

 

 

 

 

बच्चों की कहानी 

 

 

 

 

5- परीलोक में एक परी रहती थी।  वह बहुत नटखट थी।  दूसरी परियों ने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं मानी।  इससे रुष्ट होकर सभी परियों ने उसकी शिकायत रानी परी से कर दी।

 

 

 

रानीपरी इससे बहुत क्रोधित हुई।  उसने परी की सुन्दरता वापस ले ली।  इससे वह काली हो गयी और उसका नाम कालीपरी हो गया।  वह बहुत दुखी हुई।

 

 

 

उसने रानीपरी से क्षमा मांगी।  उसने कहा, ” मैं अब ऐसी हरकत कभी नहीं करूंगी।  कृपया मेरी सुन्दरता वापस लौटा दीजिये।  ” तब रानीपरी का दिल पसीज गया।

 

 

 

रानीपरी ने कहा ठीक है, लेकिन इसके लिए तुम्हे पृथ्वीलोक पर जाना होगा और बच्चों की मदद करनी होगी तब तुम्हारी सुन्दरता तुम्हें मिल जायेगी।

 

 

 

इसपर कालीपरी तैयार हो गयी और वह धरती लोक पर आई। परी ने एक विद्यालय में देखा कि वहाँ कुछ बच्चे स्वस्थ हैं तो कुछ कमजोर हैं। कोई फुर्तीला है तो कोई आलसी।

 

 

 

 

परी बड़े ही असमंजस में पड़ गयी। उसने तय किया कि वह बच्चों का निरिक्षण और भी नजदीक से करेगी। वह सभी स्कूलों का नजदीक से निरिक्षण करने लगी।

 

 

 

उसने देखा सभी बच्चे किसी ना किसी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या से जूझ रहे थे। किसी बच्चे के दाँतों में सड़न थी तो किसी की आँखों में चश्में लगे हुए थे।

 

 

 

कुछ बच्चे हीमोग्लोबिन कमी से परेशान थे तो कई कैल्शियम की कमी से परेशान थे और उनके दांत कमजोर थे। कुछ अधिक मोटे थे तो कुछ बहुत कमजोर थे।

 

 

 

इससे परी  बहुत उदास हुई। परी  ने इन सभी समस्यायों के मूल कारण को ढूंढने का फैसला किया। जैसे ही मध्यान्ह भोजन की घंटी बजी  परी  अदृश्य होकर दरवाजे के पीछे छिप गयी।

 

 

 

 

उसने देखा कि बच्चे टिफिन में चॉकलेट, केक, सैंडविच, चाउमीन, समोसे, पिज़्ज़ा, बिस्कुट आदि खाने की चीजें लाये हुए थे। परी इससे बहुत चिंतित हुई।

 

 

 

 

क्योंकि बच्चे ऐसे न तो पोषक तत्वों से भरे भोजन ले रहे थे और न ही उसमें संतुलित मात्रा में प्रोटीन और विटामिन थे। उसके साथ ही इन खाद्य पदार्थों में रासायनिक रंग, कृत्रिम रासायनिक संरक्षक व चटपटे मसालों को मिलाया जाता है, जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होते हैं।

 

 

 

 

परी ने तय किया कि वह बच्चों की मदद करेगी और उनकी आदतों में सुधार लाएगी।  परी  ने जादुई छड़ी से खुद को एक शिक्षिका के रूप में बदल लिया और प्रिंसिपल से कहा कि वह बच्चों को पढ़ना चाहती है। प्रिंसिपल ने हाँ कह दिया।

 

 

 

उसके बाद उसने बच्चों को इन बुरी आदतों से होनी वाली बीमारियों और परेशानियों के बारे में बताना शुरू किया और साथ ही उसने बच्चों को टिफिन में रोटी – सब्जी, दाल, सलाद और फल लाने के लिए कहा।

 

 

 

धीरे – धीरे बच्चों की आदत में सुधार आ गया और बच्चे स्वस्थ हो गए।  उनके स्वस्थ होते ही कालीपरी की सुन्दरता वापस मिल गयी और वह परीलोक वापस चली गयी, लेकिन समय – समय पर वह बच्चों से मिलने आती और उन्हें पौष्टिक भोजन करने की सलाह देती।

 

 

 

Moral Of This Story – हमेशा पौष्टिक आहार ही लें।  यह आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। 

 

 

 

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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