Moral Stories in Hindi for Class 8 / बहुत ही सुन्दर 5 कहानियां हिंदी में

Short Moral Stories in Hindi for Class 8

Moral Stories in Hindi for Class 8 पाठकगणों इस पोस्ट में Best Moral Stories in Hindi for Class 8 की कहानियां दी गयी है।  इसमें लिखी गयी Long Moral Stories in Hindi for Class 8 की सभी Stories in Hindi बहुत ही अच्छी है। 

 

 

 

अहंकार हिंदी कहानी ( Small Moral Stories in Hindi for Class 8 )

 

 

 

 

1- मित्रों हर कोई एक सामान नहीं होता है।  कोई अच्छा होता है तो कोई बुरा होता है।  कोई मजबूत होता है तो कोई कमजोर होता है।  कोई परीक्षा में अच्छा नम्बर्स लाता है तो कोई कम लाता है।  लेकिन अच्छे नम्बर्स लाने वाले को कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए।  आज की यह हिंदी कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

एक साधू और एक डाकू यमलोक पहुंचे . यमराज ने कहा बताईये आपको नरक और स्वर्ग में से क्या दिया जाए और क्यों. दोनों आश्चर्य में पड़ गए कि क्या माजरा है.

इन सब का निर्णय तो स्वयं यमराज करते हैं. कुछ सोचकर डाकू ने यमराज से कहा प्रभु मैंने जिंदगी भर पाप कर्म किये, लोगों को तड़पाया तो यहाँ किस अधिकार से स्वर्ग की मांग कर सकता हूँ ?
अतः दंड की कामना करता हूँ और साधू ने कहा प्रभु मैंने जप – तप किये , पूण्य का कार्य किया अतः मुझे स्वर्ग की सुख सुविधाएं चाहिए .
यमराज ने डाकू को साधू की सेवा करने का आदेश दे दिया. डाकू ने सिर झुकाकर यम की आज्ञा स्वीकार कर ली. लेकिन साधू ने इसपर आपत्ति की. उसने कहा, ”  प्रभु! इस पापी के स्पर्श मात्र से ही मैं अपवित्र हो जाऊँगा. मेरी सारी तपस्या तथा भक्ति का पुण्य निरर्थक हो जाएगा. “
यह सुनते ही यमराज जी क्रोधित होते हुए बोले – इतने पाप करनेवाला और भोले व्यक्तियों को लुटने वाला इतना विनम्र हो गया और तुम्हारी सेवा करने को तैयार हो गया और एक तुम हो जो इतने वर्षों तक तपस्या करने के बाद भी अहंकार से मुक्त नहीं हो सके और यह न जान सके कि सबमें एक ही आत्मतत्व समाया हुआ है. तुम्हारी तपस्या अधूरी है. अतः अब तुम इस डाकू की रोज सेवा करोगे. यही तुम्हारा प्रायश्चित होगा .
इस कहानी का सन्देश यह है कि तपस्या वही प्रतिफलित होती है , अहंकार मुक्त हो . वस्तुतः अहंकार का त्याग ही तपस्या का मूल मंत्र है और यही भविष्य में प्रभु कृपा प्राप्ति का आधार बनाता है.
Moral Of The Story — कभी अहंकार नहीं करना चाहिए।  अहंकार स्वयं का ही नाश करता है।  अगर हमें परीक्षा में अच्छे नम्बर्स आते हैं तो भी घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि और भी अधिक नम्बर्स लाने का प्रयास करना चाहिए और कम नम्बर्स लाने वाले छात्रों का हौसला बढ़ाना चाहिए, जिससे वे भी अच्छे नम्बर्स ला सके। 

जूता ( Moral Values Stories in Hindi for Class 8 )

2- अगर हमपर कोई मुसीबत आती है तो क्या हमें उसे नजरअंदाज करना चाहिए या फिर उसका उपाय ढूढना चाहिए और उपाय भी ऐसा हो जो कम खर्चीला हो और सबके लिए उपयुक्त हो सके।  आईये पढ़ते हैं इसी पर आधारित एकहिंदी कहानी।
जूता  इसे हर कोई पहनता है. जूते से आदमी का रंग और ढंग दोनों ही बदल जाता है. अगर यह पैरों में रहे तो आदमी का ढंग बदल जाता है और अगर यह सर पर पड़े तो रंग बदल जाता है. वैसे भी आजकल जूता बड़े ही फॉर्म में है.

 

कब ना जाने किस नेता का रंग बिगाड़ दे कुछ कहा नहीं जा सकता है. चलिए छोडिये यह बाते….क्या आपने कभी गौर किया है कि रंग और ढंग बिगाड़ने वाला यह जूता आया कहां से….चलिए हम आपको एक कहानी बताते है…जिससे आपको पता चलेगा कि यह जूता आया कहां से.

 

बहुत समय पहले की बात है. एक राज्य में एक बहुत ही बड़ा राजा था. उसके राज्य की प्रजा बहुत ही खुश थी. वह अक्सर अपने क्षेत्रों में  देख-रेख के लिए जाता है .
इस बार वह राज्य के उत्तरी क्षेत्र में बहुत दिनों सी नहीं गया था. उसे अपने खबरियों के माध्य्यम से उत्तरी क्षेत्र में हो रहे भ्रष्टाचार की जानकारी मिल रही थी.

एक दिन राजा ने अचानक ही उत्तरी क्षेत्र में जाने की योजना बनाई. वह जब राज्य के उत्तरी क्षेत्र में पहुंचा तो उसे बहुत सी खामियां दिखीं. उसने मंत्रियों और दरबारियों को खूब फटकार लगाई और तुरन्त ही सारे कार्यों को पूरा करने का आदेश दिया.

 

उन  सभी कमियों में से एक बड़ी कमी थी  कि सड़कें बहुत ही खराब हो गयी थीं. जगह-जगह कंकड़ – पत्थर निकल आये थे. तब उसने अपने मंत्रियों को तुरंत ही पूरी की पूरी सड़क पर चमडा बिछाने का आदेश दे दिया.

अब सभी मंत्री चिंता में  पड़ गए. आखिर इतने जल्दी इतनी बड़ी सड़क पर चमडा कैसे बिछाया जाए. तब एक दरबारी ने हिम्मत करके कहा राजन अगर गुस्सा ना करें तो एक बात कहूँ. तब राजा ने कहा ठीक है बोलो.

 

 

 

 

तब उस दरबारी ने कहा कि महाराज रोड को बनाने का प्रस्ताव पारित हो गया है. अगर रोड को अन्य तरीकों से बेहतर करके लोगों  के पैरों के जूते के चमड़े के टुकड़ों से ढकवा दिया जाए तो अच्छा रहेगा और उससे लोगों को गर्मियों में जलती हुयी सडकों, बारिश में फिसलन और सर्दियों में भी आराम मिलेगा.

राजा को यह बात पसंद आई और उन्होंने उस दरबारी को सम्मानित किया. इसका  मोरल  यह है कि कोई भी आइडिया छोटी नहीं होती, बस उसे समझाने और समझने वाला चाहिए.

 

Moral – कोई भी उपाय या उपाय देने वाला कभी छोटा नहीं होता है। अगर कोई भी इंडिया सही हो और उसमें लाभ हो तो उसे जरूर अपनाना चाहिए। 

 

 

 

 

3 – एक धर्मात्मा ने गाँव के मोड़ पर एक राहगीरों के लिए एक धर्मशाला का निर्माण किया. जिससे आने जाने वाले लोग इसमें आराम करके अपनी थकान मिटा सके . लोग आते जाते रहे और वहाँ का दरबार जब कोई व्यक्ति वहाँ से जाता तो उससे यह जरूर पूछता कि आपको यहाँ कैसा लगा और इसे बनाने वाले का उद्देश्य क्या है.

 

 

 

 

उसने किस उद्देश्य से इस धर्मशाला का निर्माण कराया है. इसपर सबके अपने – अपने विचार थे. सभी अपनी दृष्टि , अपनी सोच के हिसाब से इसके निर्माण का उद्देश्य बताते.

 

 

चोरो ने कहा कि चोरी करके यहाँ चोरी के सामन को गुप्त रखा जा सकता है.  फिर  चोरों ने कहा कि छापे से बचने के लिए यहाँ कुछ दिन छुप कर रहा जा सकता है. साधू संतों  ने कहा कि यहाँ बैठकर शान्ति से साधना की जा सकती है. चित्र कलाकारों ने कहा, ”  यहाँ एकांत का स्थान है अतः हम अच्छी कलाकृति बना सकते हैं. ”

 

 

 

कवियों ने कहा कि यहां विरह के गीत लिखे जा सकते हैं . विद्यार्थियों ने कहा कि यहाँ बहुत अच्छे ढंग से अध्ययन किया जा सकता है. इसी तरह हर कोई अपनी दृष्टि , अपनी सोच के आधार पर अपने अनुभव साझा करता.

 

 

 

 

 

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यह बात दरबान ने धर्मात्मा को बतायी . धर्मात्मा ने कहा जिसका जैसा व्यक्तित्व  होता है वैसी ही उसकी दृष्टि , उसकी सोच होती है. वह हर चीज को उसी नजरिये से देखता है .

 

 

 

 

लेकिन एक बात तो तय है कि धर्मशाला बनाने का का हमारा उद्देश्य जरूर सफल हो गया, लेकिन हमें इस बात को ध्यान रखना होगा की यह कुकर्मों का अड्डा ना बनकर सत्कर्मों की पाठशाला बने, जहां अनेक सोच और उद्देश्य को रखने वाले लोग अपनी सोच और उद्देश्य को साझा कर सके.

 

 

 

Moral Of The Story — हमारा यह शरीर धर्मशाला है।  यहां अच्छे और बुरे सभी प्रकार के लोग अपनी बात रूपी सामान को रखना चाहेंगे, लेकिन हमें सिर्फ अच्छी सलाह को ही रखना है और बुरी सलाह को दूर फेंक देना है। 

 

 

 

 

 

बदमाश बन्दर को मिला सबक

 

 

 

4- एक दिन की बात है सभी मजदूर दोपहर में खाना खाने को गए और एक लकड़ी अधचिरा लठ्ठा वहाँ रखा हुआ था. उसमें मजदूरों ने एक कील फंसा कर उसे रखा था, जिससे वापस आरी घुसाने में आसानी हो.

 

 

 

 

तभी बंदरों का झुण्ड वहाँ आ पहुंचा और उछल कूद करने लगा. शरारती बन्दर सभी चीजों से छेड़छाड़ करने लगा. बंदरों के सरदार ने सबको ऐसा करने से मना किया.

 

 

 

 

 

सारे बन्दर पेड़ों पर चढ़ गए , लेकिन वह शरारती बन्दर उसका आदेश नहीं माना और वहाँ रखे सामानों से छेड़छाड़ करने लगा. तभी उसकी नजर अधचिरे लठ्ठे पर पड़ी.

 

 

 

उसके दिमाग में खुराफात सूझी .उसने वहाँ पड़ी आरी उठाई और उस लठ्ठे को काटना शुरू किया. उसमें से ” किर्र – किर्र” की आवाज आई . इससे वह चिढ गया और आरी पटक दी. तभी उसने सोचा इस लट्ठे में कील क्यों घुसाया हुआ है. उसने उस कीले को निकालना शुरू किया.

 

 

 

 

 

वह खूब जोर आजमाइश करने लगा. कभी उछल  कर उधर जाता तो कभी इधर. कील बहुत ही मजबूती से लगाया जाता है . इतनी आसानी से नहीं निकलता है.

 

 

 

 

 

लेकिन वह बन्दर इसे अपमान समझ लिया. उसने खूब जोर लगाया और कील थोड़ा सा हिला. बन्दर को अपनी ताकत पर नाज हुआ. उसने ” खों – खों ” कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया.

 

 

 

 

उसके बाद उसने फिर से जोर लगाया और कील  निकल गया, लेकिन दो पाटों के बीच उसकी पूंछ फंस गयी. वह जोर से चिल्लाया. तभी मजदूर वापस लौटे. उन्हें देख वह डर गया और भागने के लिए उसने जोर लगाया तो उसकी पूंछ टूट गयी . वह चीखता चिल्लाता वहाँ से भागा.

 

 

 

 

 

Moral Of The Story  – बिना सोचे – समझे कोई काम नहीं करना चाहिए. जब भी कोई कार्य करना हो तो उसे सोचो फिर करो, अन्यथा जिंदगी भर पछताना पड़ता है। छात्रों की उम्र हमें अच्छे – बुरे का ज्ञान नहीं होता है।  अतः बड़े – बुजुर्ग या कोई भी कुछ नेक सलाह दे तो उसे मान लेना चाहिए।  अगर बन्दर सलाह मान गया होता तो उसकी पूँछ नहीं कटती। 

 

 

 

 

नसीब हिंदी कहानी ( Moral Stories in Hindi for Class 8 ) 

 

 

 

 

5- अक्सर छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित होते हैं कि उनकी पढ़ाई कैसी होगी।  परीक्षा में नम्बर्स बाढ़ियाँ आएंगे कि नहीं आएंगे।  वे हमेशा इसी चिंता में डूबे रह जाते हैं और अंततः असफल हो जाते हैं।

 

 

 

आज की कहानी इसी पर आधारित है।  भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है, ” कर्म करो, फल की चिंता मत करो।  ” जो नसीब में होगा वह मिलेगा ही, लेकिन सब कुछ नसीब के भरोसे मत छोडो।  कर्म तो करना ही पडेगा।  तो आईये पढ़िए यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी। 

 

 

 

एक राज्य में एक राजा सुखपूर्वक अपना राज्य चलाते थे।  उनके राज्य में प्रजा काफी खुश थी।  राजा बहुत ही न्यायप्रिय थे, लेकिन उन्हें एक दुःख था।

 

 

 

 

उनके पुत्र अंशुमन पर बचपन से ही एक दुष्ट सांप का साया था।  वह दुष्ट सर्प अंशुमन के शरीर में प्रवेश कर गया था और उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

 

 

 

 

 

राजा ने बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।  धीरे – धीरे राजकुमार अंशुमन बड़ा हुआ और उसके साथ ही उसकी समस्या भी बड़ी हो गयी।

 

 

 

 

अंशुमन इस कारण से बहुत निराश रहता था और एक दिन वह महल छोड़कर चला गया।  इससे राजा बड़े ही दुखी हुए।  चलते – चलते अंशुमन एक दुसरे राज्य में जा पहुंचा।

 

 

 

 

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उस राज्य का राजा बहुत ही क्रूर था।  उसका कहना था कि नसीब जैसी कोई चीज नहीं होती है।  इस राज्य की नसीब सिर्फ वह है और जो वह चाहेगा वही इस राज्य में होगा।

 

 

 

 

 

उसकी पुत्री राजकुमारी निशिता इससे अलग सोच रखती थी।  वह कहती थी जो नसीब में होगा वही व्यक्ति को मिलेगा।  राजा राजकुमारी से बहुत चिढ़ता था।

 

 

 

 

 

उसने उसका विवाह एक भिखारी से करने का फैसला किया।  एक दिन राजकुमार अंशुमन एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ था।  उसके कपडे फट गए थे।  दाढ़ी – मूंछ बढ़ गयी थी।  जो कुछ उसे मिल जाता था वह खा लेता था।

 

 

 

राजा ने जब अंशुमन को देखा तो उससे अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया और बोला देख इस राज्य में वही होता है जो मैं चाहता हूँ। राजकुमारी उसी पेड़ के नीचे राजकुमार के साथ रहने लगी।

 

 

 

शादी के दुसरे ही दिन जब राजकुमारी पानी लेकर वापस आई तो देखती है एक राजकुमार सोया हुआ था और उसके मुख पर एक सर्प बैठा हुआ था।

 

 

 

कुछ देर बाद उसकी परछाही अंशुमन के अन्दर समाने लगी।  राजकुमारी ने मौक़ा देखकर तेजी से उस सर्प के मुह पर एक लकड़ी से मारा।  घाव लगते ही वह सर्प घायल हो गया और राजकुमार के शरीर को छोड़कर बाहर आ गया।

 

 

 

बाहर आते ही उसका रूप बदलने लगा और वह परीलोक के युवक के रूप में परिवर्तित हो गया।  उसके बाद उसने कहा, ” राजकुमारी निशिता, आप धन्य हैं।  आज आपके वजह से मैं शापमुक्त हुआ हूँ।  मुझे इसी दिन का इन्तजार था।  मैं आपको ढेर सारा धन देता हूँ।  ”

 

 

 

उसके बाद वह परीलोक वापस चला गया और अंशुमन की भी नींद खुल गयी।  अंशुमन को काफी हल्का महसूस हो रहा था। तब राजकुमारी ने उसे सारी बात बता दी।

 

 

 

उसके बाद अंशुमन ने कहा कि वह भी राजकुमार है और राजकुमार राजकुमारी संग अपने राज्य लौट आया।  जब उसके पिता को यह समाचार मिला तो बहुत खुश हुए।

 

 

 

 

उनकी ख़ुशी तब और बढ़ गयी जब उन्हें पता चला कि सांप का साया अब हट गया है।  राजा ने राजकुमार को राज्य का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

 

 

 

 

जब यह बात राजकुमारी निशिता के पिता को पता चली तो वह भी मानने लगा कि जो कुछ होता है नसीब में लिखा होता है। मनुष्य केवल कर्म करता है और उसके बाद वह भी न्यायपूर्वक राज्य चलाने लगा।

 

 

 

 

 

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मित्रों यह Moral Stories in Hindi for Class 8 आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Moral Stories in Hindi Language for Class 8  की तरह की दूसरी कहानी के लिए इस  ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी जरूर करें।

 

 

 

 

 

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Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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6 Responses

  1. very nice, ek to apane isme jo picture add kri hai vo bhi bahut beautiful hai .

    ये भी पढ़े रोचक कहानियां

  2. Vikas mishra says:

    बहुत खूबसूरत लिखा है अपने,मैंने आपका बहुत सा पोस्ट पढ़ा है,जो मुझे बहुत पसंद आता है,मैं भी एक हिन्दी मोटिवटीऑनल ब्लॉगर हूँ ।
    धन्यवाद

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