Short Story On Naitik Shiksha in Hindi / हिंदी नैतिक शिक्षाप्रद की 5 कहानी

Short Story On Naitik Shiksha in Hindi

Short Story On Naitik Shiksha in Hindi मित्रों इस पोस्ट में Story On Naitik Shiksha in Hindi की कहानी दी गयी है।  यह नैतिक शिक्षा पर आधारित कहानी है। 

 

 

 

कोई छोटा नहीं होता है ( Short Story On Naitik Shiksha in Hindi Pdf ) 

 

 

 

 

1- इतने दिन से जंगल में भटक रहा हूँ...एक भी शिकार हाथ नहीं लग रहा है......किस्मत एकदम से रूठ गयी है......आज आख़िरी बार जाल डाल रहा हूँ, अगर कोई शिकार जाल में नहीं फँसा तो शिकार करना छोड़ दूंगा...जब पूरे दिन जंगल में भटकने पर भी हाथ में कुछ नहीं आएगा तो मेहनत करके क्या फ़ायदा.....चलो यह आख़िरी बार कोशिश करता हूँ....यह कहते हुए रामू बहेलिए ने जाल डाल दिया और सो गया.  

 

 

 

 

 

खिलाड़ी चूहा{जैसा नाम वैसा ही काम} अपने घर में बहुत बदमाशी करता था. उससे घरवालों के साथसाथ पूरा चूहों का मुहल्ला परेशान था. एक दिन एक बूढ़ा चूहा खाने के तलाश में कहीं जा रहा था तो खिलाड़ी चूहा ज़ोर से चिल्ला कर बोला दादा जी सामने से बिल्ली मौसी रही है...इतना कहकर वह खुद भी दौड़ कर भागने लगा.

 

 

 

 

 

यह देख बूढ़ा चूहा डर गया और बहुत ही तेज़ी से भगा.....वह इतनी तेज़ी से भागा कि उसके आगे उसैन बोल्ट भी पीछे पड़ जाये.....इस दौड़ में उस बूढ़े चूहे का चश्मा गिर कर टूट गया.....यह देख खिलाड़ी चूहा जोरजोर से हँसने लगा.

 

 

 

 

Long Story On Naitik Shiksha in Hindi

 

 

 

 

खिलाड़ी चूहा उस बूढ़े चूहे को बहुत परेशान करता था...एक दिन बूढ़ा चूहा सोया हुआ था....खिलाड़ी चूहे ने उसकी पूंछ में एक छोटा सा डंडा बाँध दिया और ज़ोर से चिल्लाया बिल्ली मौसी आई.....बिल्ली मौसी आई और बगल में छुप गया. 

 

 

 

 

उस दिन सच में बिल्ली गयी...यह देखकर खिलाड़ी चूहे की सिट्टीपिटी गुम हो गयी...वह डरने लगा..... वह बूढ़े चूहे से तो बच सकता था लेकिन अब बिल्ली से कैसे बचे....इतने में उसे एक युक्ति सूझी...मरता क्या ना करता...उसने झट से मरने का स्वांग किया और ज़मीन पर पेट के बल उलट गया.

 

 

 

 

लेकिन बिल्ली भी बड़ी सयानी थी..... वह हाथ में आए शिकार को ऐसे ही थोड़े छोड़ने वाली थी...वह उसे घूरकर देखी और हमले की तैयारी करने लगी.

 

 

 

इधर खिलाड़ी चूहे को लगा कि उसकी योजना सफल हो गयी.....बिल्ली मौसी भाग गयी...उसने अपनी एक आंख धीरे से खोलकर देखा तो उसे करेंट के जैसा लगा....और वह डर के मारे उछल गया और सीधे बूढ़े चूहे के पास गिरा.

 

 

 

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उसने आव देखा ना ताव बूढ़े चूहे की पूंछ से झट से डंडा छुड़ाया और बिल्ली केपर कूद गया......ऐसे में बिल्ली हड़बड़ा गयी...उसे इसकी ज़रा सी भी उम्मीद नहीं थी....भाग खिलाड़ी भाग कहते हुए खिलाड़ी चूहा सरपट भगा...उसके पीछे पीछे बूढ़ा चूहा भी गिरते पड़ते भाग निकला....बिल्ली सर खुजाते रह गयी.

 

 

 

 

 

इस घटना से खिलाड़ी चूहे को अपनी ग़लती का एहसास हुआ...उसने बूढ़े चूहे से माफी माँगी और दुबारा ऐसी हरकत नही करने की शपथ ली...कोई भी बुरी या अच्छी आदत इतनी जल्दी नहीं ख़त्म होती है...वही हाल खिलाड़ी चूहे का था...रात गयी..बात गयी, नयी सुबह और खिलाड़ी की बदमाशी शुरू.

 

 

 

एक दिन वह जंगल में उछल कूद कर रहा था....इतने में वह घूमते हुए एक गुफा तक पहुँच गया...उसने देखा कि यह शेर की गुफा है और शेर उसमे सोया हुआ है....सोए शेर को देख इसके अंदर का शैतान जाग गया.

 

 

 

 

वह गुफा में पहुँचा और शेर के ऊपर उछल कूद करने लगा....इससे शेर को गुदगुदी होने लगी वह और अच्छी नींद लेने लगा...इधर खिलाड़ी चूहे का या रोज का खेल हो गया...वह आता और शेर के बदन पर खूब उछल कूद करता और शेर के जागने से पहले ही भाग जाता. 

 

 

 

एक दिन वह कूदते कूदते शेर की नाक पर पहुंच गया...ऐसे में शेर को छींक गयी और उसकी नीद खुल गयी...शेर ने झट से खिलाड़ी को पकड़ लिया....वह गुस्से से बोला चुहे मैं तुझे सज़ा दूंगा

 

 

 

चूहा अपनी इस हरकत पर माफी मांगने लगा.....इस पर शेर को दया गयी...उसने दुबारा ऐसा नहीं करने की हिदायत देकर उसे छोड़ दिया.

 

 

जातेजाते खिलाड़ी चूहे ने कहा.... वनराज मैं आपका यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा...मौका आने पर इसे चुकता करूँगा

 

 

 

शेर को भूख लग रही थी...वह आज जल्दी उठ गया था...वह शिकार की तलाश में बाहर निकला और थोड़ी ही दूर पर बहेलिए द्वारा बिछाए जाल में वह फँस गया.

 

 

 

 

वह जितना छुड़ाने की कोशिश करता, उसमें और भी फँसता चला जाता...तभी उधर से खिलाड़ी चूहा गुजर रहा था...उसने शेर को देखते ही पहचान लिया...और शेर को चुप रहने का इशारा किया.

 

 

 

 

इसके बाद उसने तेजी से जाल को काटकर शेर को आज़ाद करा दिया...छूटने के बाद शेर ने चूहे को धन्यवाद कहा और दोनो दबे पांव चले गये....कुछ देर बाद जब शिकारी उठा तो यह नज़र देख माथा पीटने लगा...और उसके बाद उसने शिकार करना छोड़ मज़दूरी करने लगा. 

 

 

 

Moral Of This Story – किसी को भी कमजोर या छोटा नहीं मानना चाहिए, क्योंकि सबकी अपनी – अपनी अहमियत होती है। 

 

 

 

 

प्रेम की ताकत ( Short Story On Naitik Shiksha in Hindi Read )

 

 

 

 

 

2-  बहुत पुरानी बात है।  एक शहर के आसपास के जंगलों में  एक  भेड़िये का इतना आतंक छाया हुआ था कि कोई वहां भूल कर भी जाने का साहस नहीं करता।

 

 

 

वह न जाने कितने मनुष्य और जानवरों को मार चुका था।   अंत में उस शहर के एक महान संत ने उस भयानक जानवर का सामना करने का ठाना।

 

 

जब वे उस रास्ते पर चले  तो उनके पीछे  स्त्री पुरुषों की बहुत बड़ी संख्या चल रही थी। संत ने उन्हें कुछ दूर रुकने को कहा और वे आगे चल पड़े।

 

 

 

संत को अपनी तरफ आता देख भेड़िया उनकी तरफ झपटा लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वह संत के पास आकर लेट गया और पूंछ हिलाने लगा।  ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह कोई पालतू जानवर हो।

 

 

 

 

यह देखकर नगर के स्त्री – पुरुष हैरान रह गए।  तभी संत ने भेड़िये के तरफ इशारा करते हुए कहा, ” देख तूने इस शहर को बहुत हानि पहुंचाई है और बहुत उत्पात मचाया है।  इस वजह से बाकी अपराधियों की तरह दंड का अधिकारी है और इस शहर के लोग तुमसे बहुत घृणा करते हैं।  अगर तू चाहता है कि तेरी और इस शहर में रहने वालों  के बीच दोस्ती हो जाए तो मुझे खुशी होगी।  ”

 

 

 

 

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भेड़िए ने अपना सिर झुका लिया और पूंछ हिलाने लाने लगा।  उसके बाद संत ने फिर से कहा, ” अगर तू इन से दोस्ती करता है और शांतिपूर्वक रहना स्वीकार करता है तो अच्छा व्यवहार करेंगे और तुम्हारे लिए खाने का भी इंतजाम करेंगे . ”

 

 

 

इस पर  भेड़िया  पूरी तरह से नतमस्तक हो गया।  उसके बाद संत उसे शहर के बीचो बीच सबके सामने लेकर गए और फिर से वही बात कही।

 

 

 

इसके बाद एक व्यक्ति ने संत से पूछा, ” ऐसा कैसे संभव हो सकता है ? एक खूंखार भेड़िया इतना सरल स्वभाव कैसे हो गया ? ”

 

 

 

इसपर संत ने कहा, ” किसी भी बुरे इंसान को प्रेम से जीता जा सकता है।  अगर हम उसे अपमानित करेंगे तो वह और भी बुरा हो जाएगा।  मैंने उससे प्रेम पूर्वक बात की।  उसे अपमानित नहीं किया और इसी से उसका स्वभाव बदल गया।  “

 

 

 

 

 

 

सफलता का रहस्य  

 

 

 

3- एक बार एक नौजवान ने सुकरात से पूछा, ” सफलता का क्या रहस्य है ? “

 

 

 

इसपर सुकरात ने उस लडके से कहा, ” कल तुम मुझे नदी किनारे मिलो। ” इसके बाद अगले दिन वो दोनों नदी किनारे मिले। उसके बाद सुकरात और नौजवान नदी की तरफ बढ़ने लगे।

 

 

 

 

आगे बढ़ते – बढ़ते पानी उनके गले तक पहुँच गया, तभी अचानक से सुकरात ने उस लडके का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया।  नौजवान बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा।

 

 

 

लेकिन सुकरात ताकतवर थे।  उन्होंने उसे कुछ देर और भी डुबोये रखा और फिर उसे बाहर निकाल दिया।  बाहर निकलते ही वह हाँफते हुए तेजी से साँसे लेने लगा।

 

 

 

 

सुकरात ने पूछा, ” जब तुम पानी के अंदर थे तो सबसे ज्यादा क्या चाहते थे ? ”

 

 

इसपर लड़के ने कहा, ” सांस लेना। ”

 

 

सुकरात ने कहा, ” यही सफलता का रहस्य है। जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना कि तुम सांस चाहते थे तो वे तुम्हे जरूर मिल जायेगी।  यही सफलता का रहस्य है।

 

 

 

Moral Of This Story – मित्रों Success यही mystery है।  जब आप सफलता के पीछे भागेंगे तो आप जरूर उसे पाएंगे।  अगर आप चाहेंगे बैठे – बैठे सफलता मिल जाए तो ऐसा कभी नहीं हो सकता है। 

 

 

 

 

समय का चक्र

 

 

 

 

4- समय का चक्र हमेशा एक समान नहीं रहता है। वह हमेशा ही गतिशील रहता है। आम पेड़ के ऊपर रहता है और मछली पानी के भीतर लेकिन समय के प्रभाव से दोनों की मुलाकात संभव हो जाती है।

 

 

 

एक नामी गिरामी डॉक्टर का लड़का कबड्डी का उस्ताद था। वह जिस टीम की तरफ से खेलता उस टीम को सफलता अवश्य मिलती थी। डॉक्टर अपने फन का उस्ताद और उसका लड़का अपने फन का उस्ताद। डॉक्टर को गरीब और गरीबों से बहुत ही नफरत थी।

 

 

 

 

कबड्डी के खेल में एक खिलाड़ी को प्रायः चोट लगती ही रहती है। एक दिन कबड्डी के खेल में डॉक्टर का लड़का अपना हाथ तुड़वा बैठा। डॉक्टर के लाख प्रयास के बाद भी लड़के का हाथ ठीक नहीं हुआ। जहाँ महंगी दवा काम नहीं करती वहां सस्ती दवा बहुत ही कारगर होती है।

 

 

 

 

 

डॉक्टर की निराशा को देखकर लोगों ने उन्हें मनोहर काका के पास जाने की सलाह दी। न चाहते हुए भी डॉक्टर अपने लड़के को लेकर मनोहर काका के पास गया। जो गरीब थे लेकिन कर्तव्य निष्ठ थे। उनके अनुभव से और भगवान के आशीर्वाद से डॉक्टर के लड़के का हाथ कुछ ही दिनों में ठीक हो गया।

 

 

 

 

Moral Of The Story – इसी को कहते है आम और मछली का मुलाकात, हर किसी को हर किसी की मदद अपनी क्षमता के अनुसार करनी चाहिए।

 

 

 

 

 

 

सही सोच ( Short Story On Naitik Shiksha Writing )

 

 

 

 

5-  एक सरोवर में तीन  मछलियां रहती थीं। उस सरोवर की अन्य मछलियों की इन तीनों मछलियों के प्रति काफी श्रद्धा थी। एक मछली के पास ज्ञान का असीम भण्डार था। वह बहुत सारे शास्त्रों का ज्ञान रखती थी।  दूसरी मछली सिर्फ उतना ही सोचती थी जीतनी उसको आवश्यकता रहती थी।

 

 

 

 

तीसरी मछली ना तो ज्यादा ज्ञानी थी और ना ही अधिक सोचती थी।  वह जैसा मौक़ा होता था वैसा निर्णय लेती थी। एक दिन की बात है कुछ मछुआरे सरोवर के तट पर आये और उन्होंने देखा कि सरोवर में बहुत सारी मछलियां थीं। यह देखकर उन्होंने आपस में बात करते हुए कहा, ” इस सरोवर में बहुत सारी मछलियां हैं।  सुबह आकर  सरोवर में जाल डालेंगे। ”

 

 

 

 

 

यह कहकर तीनों चले गए।  उनकी बाते तीनों मछलियों ने भी सुनी। इस पर ज्ञानी मछली ने कहा, ”  हमें फ़ौरन यह तालाव छोड़कर और कहीं दूसरी जगह चले जाना चाहिए। “

 

 

 

दूसरी मछली ने कहा, ”   नहीं, हमें अभी नहीं जाना चाहिए।  हमारे पूर्वज ठण्ड के दिनों में यह जगह छोड़ते थे।  यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।  हमें इसका ध्यान रखना चाहिए। ”

 

 

 

 

तीसरी मछली हँसते हुए बोली, ” तुम लोग बेवजह चिंता कर रहे हो।  ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला  है।  गरजने वाले बादल बरसते नहीं हैं और अगर ऐसा हो भी गया और मछुआरे आ भी गए तो हम पानी के तलहटी में जा कर बैठ जाएंगे  या फिर पूंछ से जालों को फाड़ देंगे। इस समय अपना घर छोड़कर परदेश जाना उचित नहीं होगा। ”

 

 

 

 

इसपर पहली मछली ने कहा, ” ठीक है, जैसा आप लोग  उचित समझें।  मगर मेरा यह मानना है कि जब दुश्मन मजबूत हो और हम लड़ पाने में सक्षम ना हों तो वहाँ  से हट ही जाना उचित होता है। ”  यह कहकर वह  अनुयायियों को लेकर चली गयी।

 

 

 

दूसरी और तीसरी मछली वहीँ पर रुक गयी। अगले  दिन मछुआरे पूरी तैयारी से वहाँ पहुँच गए और उन्होंने सरोवर में जाल डाला और जाल में बहुत सारी मछलियाँ फंस गयी और उसमें वह दोनों मछलियां भी फंस गयी।

 

 

 

 

जब मछुआरे उन दोनों मछलियों को गाडी में डाल रहे थे तब पहली मछली दूर से उन्हें देख रही थी और उसने गहरी सांस लेते हुए कहा, ” इनकी सोच ने ही इनको धोका दिया।  अगर उन्होंने सही सोच राखी होती तो शायद वह जरूर बच जाती। ”

 

 

 

 

Moral Of This Story –  इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि मुसीबत का पता चलते ही हमें उसके बारे में  विस्तार से सोचना चाहिए और अपनी व्यवहारिक बुद्धि से परिस्थिति का सामना करना चाहिए। 

 

 

 

 

 

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1- Short story in Hindi

 

2- Naitik shiksha se Sambandhit Kahaniya

 

3- Moral Stories in Hindi

 

 

 

 

Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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