Top 10 Moral Stories in Hindi For Competition / हिंदी की प्रसिद्ध शिक्षाप्रद कहानी

Top 10 Moral Stories in Hindi

Top 10 Moral Stories in Hindi मित्रों इस पोस्ट Top 10 Moral Stories in Hindi Short की कहानी दी गई है। आप यह Moral Story in Hindi जरूर पढ़ें। 

 

 

 

 

खुद को कभी सर्वश्रेष्ठ मत समझो ( Top 10 Moral Stories in Hindi )

 

 

मित्रों जब आप यह समझते हैं कि मैं ही सबसे बड़ा हूँ, मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ, मुझसे आगे कोई नहीं है तो बस वहीँ से आपका पतन शुरू हो जाता है।  कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए।  घमंड पतन का कारक है।  I Am Best की भावना व्यक्ति को नीचे ही ले जाती है। मित्रों आज की यह Moral  Story इसी पर आधारित है।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

एक नगर में एक चित्रकार रहता था।  वह बहुत ही बढ़िया और कुशल चित्रकार था। उसके द्वारा बनाये गए चित्र बहुत ही महंगे भाव में बिकते थे।उसका बाजार में बहुत नाम हो चुका था।  जो भी उसकी दुकान  से चित्र ले जाता वह उसकी तारीफ़ किये बिना नहीं रहता।  वह चित्रकार एक ‘ ब्रांड ‘ बन चुका था।

 

 

 

 

उस चित्रकार का लड़का भी अपने पिता से Inspire होकर चित्रकारी के धंधे में कदम रखा। पिता ने उसे अपनी सारी खूबियां सिखा दीं और कुछ दिनों की मेहनत के बाद लड़का बहुत ही अच्छी पेंटिंग बनाने लगा।

 

 

 

 

Top 10 Moral Stories in Hindi

 

 

 

 

परन्तु लड़का चाहे कितनी भी अच्छी पेंटिंग्स बनाता, पिता उस चित्र में कोई ना कोई कमी निकाल ही देता था।  उसके बाद बेटा चुपचाप उसमें सुधार कर लेता था।

 

 

 

देखते ही देखते वह शहर का टॉप चित्रकार बन गया। उसके बनाये हुए चित्रों की खूब तारीफ़ होती थी और वे बहुत ही महंगे भाव में बिकते थे। तमाम न्यूज चैलनों और मैगजीन्स में उसके इंटरव्यू छपने लगे।

 

 

 

 

 

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लड़का बहुत ही खुश था, लेकिन अभी भी उसका पिता उसके द्वारा बनाये गए चित्रों में कमियां निकाल ही देता था। कुछ दिनों तक तो बेटा कुछ नहीं बोला, लेकिन एक दिन उसने कहा, ” पिताजी, मैं शहर का टॉप चित्रकार हूँ।  मेरे द्वारा बनाये हुए चित्रों की लोग कितनी तारीफ़ करते हैं और अब तो आपके चित्र भी मुझसे कम बिकते हैं, फिर भी आप मेरे चित्रों की तारीफ़ करने के बजाय उसमें कोई ना कोई कमी निकाल देते हैं।  मुझे लगता है आपकी चित्रों को समझने की परख कम हो चुकी है।  मेरे चित्र बेस्ट होते हैं बेस्ट। ”

 

 

 

 

यह बात सुनकर पिता को बहुत ही दुःख हुआ।  उन्होंने कुछ नहीं बोला और उसके बाद उन्होंने बेटे के द्वारा बनाये हुए चित्रों में कमियां निकालना बंद कर दिया।

 

 

 

कुछ महीने गुजरे।  बेटे ने देखा कि अब उसके चित्र कम बिकने लगे हैं और लोग उसकी तारीफ़ भी कम करते हैं।  वह बड़ा परेशान रहने लगा।  एक दिन वह अपने पिता के पास आया और उनसे इस बारे में बात की।

 

 

 

उसकी बात सुनकर पिता ने उसे समझाते हुए कहा, ” जब मैं तुम्हारे द्वारा बनाये हुए चित्रों में कमियां निकालता था तो तुम उसमें कुछ ना कुछ सुधार कर लेते थे, लेकिंन जब तुमने यह समझ लिया I Am The Best, उसी दिन से तुम्हारा पतन शुरू हो गया। कभी भी कोई आदमी पूर्ण नहीं होता।  वह हर समय कुछ ना कुछ सिखता रहता है और जिस दिन वह यह समझ लेता है कि अब मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूँ, उसी दिन से उसका पतन शुरू हो जाता है। ”

 

 

 

 

लडके को बात समझ में आ गयी।  अब वह और भी मेहनत और लगन से चित्र बनाने लगा और अपने पिता को उसे जरूर दिखाता और धीरे – धीरे वह फिर से शहर का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार बन गया।

 

 

 

 

Moral – इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी खुद को सर्वश्रेष्ठ नहीं समझना चाहिए और हमेशा कुछ ना कुछ सीखना चाहिए। 

 

 

 

Moral Of This Story –  Man should never think of himself as the best and should always learn something.

 

 

 

 

 

आचरण हिंदी कहानी ( Top 10 Moral Stories in Hindi Short )

 

 

 

2- आचरण मनुष्य का व्यक्तित्व होता है। आचरण से ही व्यक्ति की पहचान होती है।  अगर आपका आचरण अच्छा है तो सदैव आपका नाम ऊंचा रहेगा और अगर आचरण सही नहीं है तो हर जगह आपकी आलोचना ही होगी।  आज की यह Moral  Stories इसी पर आधारित है।

 

 

 

अपने गांव के प्रधान शिवपाल से मोहन ने सुलगता हुआ प्रश्न किया , ” मनुष्य जब जन्म लेता है तो वह अपने साथ कुछ भी लेकर नहीं आता है और मरने के बाद भी वह सब कुछ यही छोड़कर चला जाता है।मनुष्य के पास जो कुछ रहता है वह देश का दिया हुआ रहता है और जहां पर वह रहता है वह उसके गांव और घर का दिया हुआ रहता है, तो क्या मनुष्य का इतना भी फर्ज नहीं बनता  कि वह अपने प्रदेश और देश  के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का प्रयास करे ? तो फिर मनुष्य ऐसा क्यों नहीं करता ? मोहन का यह प्रश्न सुनकर शिवपाल आवेश से भर उठा।

 

 

 

 

 

मोहन ने शिवपाल से फिर कहा, ” देश की प्रधानी को लागू हुए पच्चास वर्ष हो गए। आपके पूर्व के प्रधान अगर थोड़ा थोड़ा भी विकास पर ध्यान दिया होता तो आप भी इसे आगे ले जाते, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। अब आप अपनी ही बात को लीजिए , आपकी प्रधानी में हमारे गांव का जो भी विकास हुआ, वह तो सर्व विदित है और आपलोग अपनी आने वाली पीढ़ियों को क्या दे रहे है ? यही न कि आप खाकर मरेंगे और तुम खाना जुटाने के लिए मरो।

 

 

 

 

यह सुनकर पुलकित ने कहा, ” मैं मोहन के बातों से पूरी तरह सहमत हूं। सरकार की तरफ से इतना सारा पैसा गांव के विकास के लिए मिलता है, लेकिन सब पैसा कहां जाता है ? ”

 

 

 

तभी सुनील वहां पहुँच गया था।  उसने कहा, “मैं बताता हूं पैसों का खेल।  पैसा ब्लाक  से लेकर बैंक तक आते – आते उस रूपए का सत्तर भाग शेष रहता है और उसमे से भी सिर्फ पचास प्रतिशत का काम होता है बाकि आप लोग खुद ही समझदार है। कोई इस भ्रष्टाचार की तरफ आवाज उठाने की जहमत नहीं उठाता और इसका फायदा सरकारी कर्मचारी उठाने का प्रयास करते है और सफल भी हो जाते है। ”

 

 

 

 

इन नौजवानो का क्रोध भविष्य में अनिष्ट का मात्र एक संकेत था। पुलकित ने कहा, ” मैं एक ऐसे व्यक्ति को जनता हूं , जो सभी कर्मचारियों से अलग है और उसने जो कुछ हासिल किया है ईमानदारी से हासिल किया है और वह जहां भी जाता है वहाँ भ्रष्टाचार कम हो जाता है, लेकिन इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ता है और उसका जल्द ही ट्रांसफर हो जाता है।

 

 

 

 

 

उनके बारे में देश के हर प्रसिद्ध अखबारों में छपा है कि उन्होंने किस तरह से ईमानदारी की मिसाल पेश की है । उनका नाम है पंचम चौधरी।

 

 

 

 

 

इसपर प्रधान शिवपाल ने कहा, ” उन  पंचम चौधरी को मैं भी जनता हूं। उनसे हमारी मुलाकात जिला के कोर्ट में हुई थी। चौधरी साहब किसी मुक़दमे की पैरवी करने आए थे और उन्होंने अपनी कुशलता का परिचय कोर्ट के हाल में ही दिया। फलतः उनके विपक्षी को कोर्ट के आदेशानुसार दो हजार रूपए का दंड भरना पड़ा और विपक्षी बहुत ही लज्जित हुआ। यह काम उन्होंने निःशुल्क ही किया था लेकिन ऐसे कर्मचारी देश में ऊँट के मुंह में जीरा के समान है। ”

 

 

 

 

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चौधरी साहब के किस्से तो आज हर जनता की जुबान पर है। इसलिए चलो आज हम भी संकल्प करते है, कि चौधरी साहब के आचरण का  हिस्सा अपने जीवन में उतारते है। इससे उनको बहुत बड़ा सम्मान मिलेगा।

 

 

 

Moral – सच्चा आचरण सदैव व्यक्ति को सम्मान दिलाता है। 

 

 

Moral Of The Story – True conduct always honors a person.

 

 

 

 

लालच बुरी बला है ( Top 10 Moral Stories in Hindi Written )

 

 

 

मित्रों कई बार ऐसा होता जब आपको कहीं से मदद मिलती है, लेकिन आपकी लापरवाही और संकोच तथा आपके अधिक विश्वास के कारण आप उस चीज को उस मदद को खो देते हैं।

 

 

 

 

मित्रों किसी पर विश्वास करना अच्छी बात है, लेकिन जब कोई आपके विश्वास का नाजायज फायदा उठाने लगे तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए, अन्यथा आपका नुक्सान सुनिश्चित है। आज की यह हिंदी कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

3- रामकृपाल महाराज बहुत ही निर्धन थे, कहने को उनका नाम रामकृपाल था लेकिन उनके ऊपर राम की कृपा जरा सी भी नहीं थी. वह निःसंतान थे.

 

 

 

 

पुश्तैनी थोड़ी सी ज़मीन थी उसी पर उन्होने फूलों की बगिया लगा रखी थी. उसी फूलों को बेचकर किसी तरह दोनों लोगों (पति-पत्नी) का गुज़ारा होता था.

 

 

 

 

रामकृपाल बहुत ही नेक दिल इंसान थे, भगवान के परम भक्त भी थे, इसीलिए लोग उन्हे प्यार से महाराज कहते थे. एक दिन रामकृपाल ने अपनी पत्नी से कहा कि ऐसे कैसे गुज़ारा होगा, फूलों को बेचकर तो खर्चा भी नहीं निकल पाता है, मैं सोच रहा था कि मुझे भी कमाने शहर में जाना चाहिये, देखों रामू शहर गया था और ६ महीने में ही कितना पैसा कमा लिया.
हमारे आगे-पीछे है कौन, जो कमाने जाओगे….कट जाएगी जिंदगी…उसकी पत्नी ने कहा. पूरी जिंदगी तो फांका-मस्ती में कट गयी….सोचता हूँ..इतना कुछ कर लूं कि मरने पर किसी से कफ़न मांगने की ज़रूरत ना पड़े…रामकृपाल ने कहा.
जैसी आपकी अच्छा…उनकी पत्नी ने कहा. उसके बाद उनकी पत्नी ने तीन रोटी, नमक, प्याज, मिर्च के साथ एक पोटली में बांधकर रामकृपाल को दे दिया और रामकृपाल भगवान का नाम लेकर शहर की ओर निकल पड़े.

चलते-चलते शाम हो गयी, रामकृपाल भूख से परेशान हो गये. तभी उन्हें सामने एक पीपल का पेड़ दिखा, जिसकी छाया बहुत ही आरामदायक थी और वहां एक कुआं भी था.
रामकृपाल वहीं पर रुक गये और लोटा डोरी के माध्यम कुएँ से पानी निकाला और हाथ -मुंह धोकर वहां बैठ गये, फिर उन्होने सोचा कि भूख भी बहुत लग रही है, रास्ता भी बहुत बाकी है, कुछ खाकर पानी पी लूं, फिर आगे की यात्रा करूंगा.
उन्होने खाने की पोटली खोली तो उसमें क़ायदे से तीन मोटी-मोटी रोटियाँ रखी हुई थीं. रामकृपाल ने कहा कि “एक खाऊं..दो खाऊं या तीनों खा जाऊं”..इस बात को उन्होने कई बार कहा.
उसी कुएँ के अंदर Teen Pret रहते थे.रामकृपाल की बात सुनकर वे बड़े ही असमंजस में पड़ गये कि यह बला कहां से आ गयी, जो हमें खाने की बात कर रहा है. पहले प्रेत ने कहा कि तुम दोनों यहीं रुको मैं देखता हूँ कि कौन है. अगर खायेगा तो मुझे ही खायेगा…तुम लोग भाग जाना.
नहीं…नहीं मरेंगे तो हम साथ ही मरेंगे…हम तुम्हें अकेले  नहीं जाने देंगे ..बाकी प्रेतों ने कहा. नहीं तुम लोग यहीं रहो…मैं देखता हूँ…पहले वाले pret ने कहा.
रामकृपाल अपनी ही धुन में वही रट लगाए जा रहे थे. तभी एक pret वहाँ पहुंचा और हाथ जोड़कर बोला…महाराज हमारी जान छोड़ दो…हमारे पास जो कुछ भी है हम आपको दे रहे हैं….महाराज कृपा करके हमें छोड़ दें.
अब रामकृपाल महाराज ने सोचा कि चलो ठीक है देख ही लेते हैं कि इनके पास क्या है…उसके बाद उन्होंने कहा ठीक है….हम आप सब को छोड़ देंगे लेकिन जो भी चीज आप लोग दोगे वह बहुत ही अच्छी होनी चाहिए…जिसका कुछ फायदा हो सके.
ठीक है ….उसके बाद pret ने उन्हें एक कड़ाही दी और कहा कि इस कड़ाही से आप जो कुछ मागोगे वह मिल जायेगा.
इसके बाद रामकृपाल जी अपने घर चल दिए..अब अँधेरा होने लगा था..रास्ते  में रामकृपाल जी के एक परिचित का घर था. अब उन्होंने सोचा कि क्यों न यहीं पर रात बिता ली जाए, फिर सुबह घर को चलेंगे….फिर रामकृपाल जी वहाँ आये, लेकिन उस घर की मालकिन बहुत ही चालाक थी उसने बातों ही बातों में सारा भेद पता कर लिया और उनकी कड़ाही को दूसरी कड़ाही से बदल दिया.
सुबह होने पर रामकृपाल जी अपने घर की ओर निकले और जब वे घर पहुंचे तो उनकी पत्नी ने कहा कि बहुत जल्द आ गए, कोई परेशानी तो नहीं हुइ न.
अरे नहीं-नहीं..कोई परेशानी नहीं हुई..बल्कि एक ऐसी चीज लाया हूँ…जिससे हमारे सारे दुःख खत्म हो जायेंगे…..जा जल्दी से चूल्हा तैयार कर…रामकृपाल खुश होते हुए बोले.
पंडिताइन ने फ़टाफ़ट चुल्हा तैयार किया…अब रामकृपाल ने भगवान् का नाम लेकर कड़ाही को चूल्हे पर रखा और उससे खाना माँगा..लेकिन कड़ाही ने कुछ नहीं दिया.
अब दे भी कैसे कड़ाही तो बदल चुकी थी…..रामकृपाल ने फिर से कोशिश की लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ…..अब पंडिताइन का धैर्य जवाब दे दिया…उन्होंने बुरा भला कहते हुए कड़ाही फेक दी.
ख़राब तो पंडित जी को भी लगा..वह गुस्से में फिर से  उसी कुए पर पहुंचे और फिर वही वाक्य दोहराया ..अब दूसरा प्रेत बाहर निकला..उसने कहा महाराज हमारी जान छोड़ो मेरे पास एक बटुआ है, जिससे आप जितना पैसा मागोगे वह देगा .
ठीक है..लेकिन धोका नहीं होना चाहिये नहीं तो इस बार मैं तीनों प्रेत को मार दूंगा कहकर रामकृपाल महाराज चले गए…लेकिन उन्होंने वही गलती फिर से दुहराई और नतीजा भी पहले जैसा हुआ.
इस बार भी उनका बटुआ बदल दिया गया….अब तो रामकृपाल जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया…उन्होने आव देखा न ताव…उसी क्षण कूए की तरफ निकले और कूए  पर आकर गुस्से में आवाज लगाई कि आज मैं तीनों  को खा जाऊंगा.
यह सुनकर तीसरा प्रेत बाहर निकला और पूछा गुरुदेव आप यहां से सीधे अपने घर जाते हैं या फिर रास्ते में कहीं विश्राम के लिए रुकते हैं. अब रामकृपाल जी ने सारी बात बता दी.
तब उस प्रेत उन्हें एक डंडा और रस्सी देकर सारी  बात समझा दी …अब रामकृपाल महाराज खुश होते  हुए फिर से अपने परिचित के घर पहुंचे. वहाँ उनका खूब सेवा-सत्कार हुआ.
तब मालकिन ने जानकारी लेनी चाही तो रामकृपाल ने  कहा कि इस बार कुछ खास नहीं है सुबह बता दूंगा…मालकिन ने भी जिद नहीं कि कहीं रामकृपाल गुस्से में अभी चले जाएँ तो नुक्सान हो जायेगा

 

 

 

सुबह हुई तो मालकिन ने फिर से वही बात याद दिलाई…..तो रामकृपाल ने रस्सी से कहा कि रस्सी तुम किसकी हो…तो रस्सी ने कहा कि जिसकी हाथ में उसकी.
तब ठीक है..इस मालकिन के घर के लोगों को बाँध लो…अब रस्सी ने सबको बांध लिया …..फिर उन्होंने डंडी से भी वैसे ही पूछा तो डंडे ने भी कहा कि जिसके हाथ में उसका…तो ठीक है…सबको ज़रा प्रसाद खिला दो…अब डंडे ने सबकी पिटाई शुरू कर दी.
मुझे क्षमा कर दो….मैं आपकी हर चीज वापस दे रही हूँ….मुझे माफ़ कर दो..उस घर कि मालकिन और अन्य लोग दर्द से कराहते हुए बोले. ठीक है जल्दी दो…..पंडित जी ने कहा. अब उनकी सारी चीजें मिल गयीं….उनका जीवन खुशियों से बितने लगा.

 

 

 

Moral Of The Story – 1- इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि कभी पर आप अत्यधिक विश्वास ना करें। 

 

२- एक बार ठगे जाने पर दुबारा वही गलती नहीं करनी चाहिए। 

 

३-  अधिक लालच बहुत बुरी बला है। 

 

 

 

 

 

हृदय परिवर्तन हिंदी कहानी ( Top 10 Moral Stories in Hindi Class 3 )

 

 

 

 

4- मित्रों आपने एक कहावत सुनी होगी ” देर आये दुरुस्त आये ” .  अगर आप कुछ गलत कर रहे हैं और इसका एहसास आपको हो जाता है और आप फिर से मुख्य धारा में परिवर्तित हो जाते है तो यह आपके जीवन के लिए बहुत ही अच्छा संकेत है।  आपने अंगुलिमाल और गौतम बुद्ध की कहानी जरूर पढ़ी होगी कि किस तरह से गौतम बुद्ध के उपदेश से उसमें परिवर्तन आ गया और वह मुख्य धारा में लौट आया।  आज की एक हिंदी मोरल स्टोरी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

गब्बर नाम का एक आखेटक था। उसके पास पांच प्रशिक्षित कुत्ते थे। एक दिन वह आखेट के लिए जा रहा था। रास्ते में उसे एक हिरनी अपने दूधमुहे शावक के साथ नजर आई। तभी उसके पांचो कुत्ते उसके ऊपर बाज की तरह झपट पड़े।

 

 

 

 

हिरनी तो भाग गई लेकिन वह दुधमुहा शावक उन शिकारी कुत्तो द्वारा बंदी बना लिया गया। कुत्ते प्रशिक्षित थे वह शावक को घेरकर गब्बर के पास लाए। तभी गब्बर की निगाह उस कातर हिरनी के ऊपर पड़ी जिसका बच्चा उसके चंगुल में फंस गया था।

 

 

 

 

गब्बर ने ध्यान से देखा उस हिरनी की आँखों में अपने बच्चे के लिए आंसू बह रहे थे। उन आंसुओ की धार में गब्बर आखेटक बह गया। जैसे हिरनी  गब्बर से कह रही हो, तुम हमारे बच्चे को छोड़ दो और हमें पकड़ लो। गब्बर ने उस शावक को आजाद कर दिया।

 

 

 

 

वह शावक कुलाचे मरता हुआ अपनी माँ के पास चला गया। यह दृश्य देखकर गब्बर को बहुत ही आनंद आया। गब्बर हिरनी के पास पहुंचकर उसकी पीठ को थपथपाया और हिरनी को अभयदान दे दिया। उसके बाद कभी भी आखेट न करने का प्रण लिया।

 

 

 

 

Moral Of The Story  – परिवर्तन संसार का नियम है और जैसे ही आपको अपराधबोध हो और परिवर्तन का मन करे तो निश्चय ही परिवर्तन कर लेना चाहिए। 

 

 

 

 

 

परोपकार ( Top 10 Moral Stories in Hindi Reading )

 

 

 

 

5- अगर आप सच्चे हैं और सच के साथ हैं तो भगवान किसी ना किसी रूप में आपकी मदद अवश्य ही करते हैं।  महाभारत के समय पांडव सत्य के राह पर थे। तो भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी मदद की और अर्जुन के सारथी बने।

 

 

 

 

मित्रों अगर आप सच की राह पर चलेंगे तो भगवान आपकी राह में आने वाली हर रोक, अड़चन को दूर अवश्य ही कर देंगे।  आज की यह Best Moral Story in Hindi इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

मोहन और सोहन दोनो सगे भाई थे। वे  रामनगर के बहुत बड़े व्यपारी थे। सभी व्यापारियों के मध्य दोनों भाइयों की अच्छी इज्जत थी। एक बार दोनों भाई व्यापार करने की इच्छा से अपने अपने घोड़े पर सवार होकर जाने की तैयारी करने लगे, लेकिन सोहन की पांच वर्षीय पुत्री (रोशनी )आकर जिद करने लगी कि मैं भी आप लोगो साथ चलूंगी।

 

 

 

सोहन ने अपनी पुत्री से पूछा, ” तुम हमारे साथ क्यों चलना चाहती हो ? रास्ते में बहुत परेशानी होगी। ”

 

 

 

इसपर रोशनी ने कहा,  “मैं शहर देखना चाहती हूँ।  मेरे दोस्त कहते हैं कि शहर बहुत ही खूबसूरत होता है। ”

 

 

 

दोनों की बातें सुनकर मोहन ने सोहन से कहा, ” रोशनी को लेकर चलना है तो जल्दी करो, अन्यथा हमें विलम्ब हो जाएगा। ”

 

 

 

सोहन ने कहा, “ठीक है भैया ! हम इसे साथ ही लेकर चलते हैं। ”

 

 

 

दोनों भाईयों ने व्यापार के लिए प्रस्थान किया। कुछ समय चलने के पश्चात् अँधेरा होने लगा।  दोनों भाइयों ने नजर दौड़ाई तो थोड़ी दूर पर उन्हें एक झोपड़ी दिखाई पड़ी। दोनों भाई उस झोपड़ी की तरफ गए। झोपड़ी के नजदीक पहुँचने पर मोहन ने सोहन से कहा, “यह तो किसी जानवर का घर दिख रहा है ?”

 

 

 

 

 

” वह देखो पिताजी बगल में एक कुआं भी है।  हमें यहाँ पीने के लिए पानी की परेशानी नहीं होगी। ” रोशनी ने अपने पिता सोहन से कहा। फिर दोनों भाइयों ने अपनी पुत्री रोशनी के साथ अपने लाए हुए भोजन से उदर की क्षुधा को शांत किया, और उस झोपड़ी में विश्राम करने लगे। लेटते ही सभी निद्रा देवी के आगोश में चले गए।

 

 

 

 

अकस्मात ही किसी की आवाज उन तीनों के कानों से टकराई। “सुबह होने वाली है, क्या तुम लोग घोड़े बेचकर सो रहे हो ?” और तीनों मोहन, सोहन, रोशनी हड़बड़ा कर उठ बैठे। सामने देखा तो एक बुजुर्ग नजर आया। मोहन और सोहन ने उस बुजुर्ग को धन्यवाद किया और जाने की आज्ञा मांगी।

 

 

 

 

मोहन और सोहन ने उस बुजुर्ग से कहा, “आपने इस वृक्ष के नीचे यह झोपड़ी बनाकर पथिकों के श्रम का निवारण करने के लिए और उनकी तृष्णा को शांत करने के लिए यह कुआं खुदवाकर बहुत ही परोपकारी का कार्य किए है।” यह कहते हुए दोनों ने रोशनी के साथ चलने की तैयारी करने लगे।

 

 

 

 

तभी बुजुर्ग ने उन लोगों से कहा, ” आप लोग थोड़ा हमारी बातों को सुनो, फिर प्रस्थान करना। यहाँ से आप लोग उत्तर दिशा में जाइए, जगदीशपुर रियासत के राजा मानिकचंद के पास। वह हर रोज प्रत्येक मनुष्य से कुछ प्रश्न करते है।  जो उनके प्रश्नों का सही उत्तर बताता है उसे राजा बहुत सारा इनाम देते है। ”

 

 

 

 

मोहन ने उस बुजुर्ग से कहा, “अगर हमें राजा से इनाम मिला तो हम आपके इस उपकार का बदला अवश्य चुकाएंगे। ” यह कहकर सभी उत्तर दिशा की तरफ चल दिए।

 

 

 

 

जगदीशपुर पहुंचने के पश्चात् तीनों ने एक वृक्ष के निचे विश्राम किया, फिर राज दरबार की तरफ चले। रोशनी ने सोहन से कहा, ” पिताजी, यह नगर तो बहुत ही सुन्दर है।  ”

 

 

 

 

” हां बेटी, इसलिए तो हम यहाँ आए है कि कुछ व्यापार करके फायदा कमाया जा सके। ” सोहन ने रोशनी से कहा। उसके बाद वे राज दरबार में पहुँचने के उपरांत उचित जगह पर आसन ग्रहण किए।

 

 

 

 

 

राज दरबार में राजा का प्रश्न था, ” सबसे तेज चलने वाला क्या है और सबसे कोमल क्या है ? ”  राजा का यह प्रश्न सुनकर दरबार में सन्नाटा छा गया।

 

 

 

 

किसी को कोई उत्तर नहीं सूझ रहा था। चारो तरफ सन्नाटा देख सोहन ने राजा से कहा, “महाराज, अगर आपकी आज्ञा हो तो हमारी पुत्री आपके प्रश्नों का उत्तर देना चाहती है ? ”

 

 

 

 

 

राजा खुश हुए और बोले , ” हमारे प्रश्नों का उत्तर कोई भी दे सकता है, इसमें उम्र का कोई बंधन नहीं है।”

 

 

 

 

सोहन की पुत्री ने कहा, “राजन ! हवा से भी गतिमान वाणी से तेज मन है और मन से कोमल माता का हृदय है जहां अच्छे और बदमाश बालक को आश्रय मिलता है। ”

 

 

 

 

रोशनी का उत्तर सुनकर राजा बहुत ही खुश हुए उसे एक हजार स्वर्ण मुद्राएं देते हुए उसकी शिक्षा का खर्च उठाने का भी वचन दिया। मोहन और सोहन रोशनी के साथ पुनः झोपड़ी में आए जहाँ पर वे तीनों रात गुजारे थे। सोहन झोंपड़ी के इधर उधर देखने के पश्चात् कहा, ” यहाँ तो कोई नहीं है ? ”

 

 

 

” मैं यहाँ हूं।  “उस बुजुर्ग आदमी ने कहा जो एक वृक्ष की छाया में बैठा था। सोहन ने पूरी बात बताई और एक सौ स्वर्ण मुद्राए देते हुए उस बुजुर्ग से कहा, ” यह हमारी ओर से आपको धन्यवाद स्वरूप है। ”

 

 

 

 

बुजुर्ग ने सोहन से कहा, ” हमें इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। यह स्वर्ण मुद्राए तुम्हारी लड़की ने प्रश्नों के उत्तर देकर जीता था। अगर देना ही चाहते हो तो यह एक सौ स्वर्ण मुद्राए गरीबों में दान कर देना। हमारा जीवन परोपकार के लिए ही है। तुम लोगों को जब भी हमारी आवश्यकता हो यहाँ चले आना। मैं अवश्य ही मिलूंगा। ”

 

 

 

 

वह परोपकारी वन देवता थे।  वे सच्चे लोगों की हमेशा मदद करते थे। मोहन और सोहन रोशनी के साथ रामनगर को लौट आए और उस बुजुर्ग को मन ही मन धन्यवाद किया।

 

 

 

 

Moral- मित्रों अगर आप दूसरों की मदद करेंगे, अच्छी सोच रखेंगे तो भगवान आपकी मदद अवश्य करेंगे। 

 

 

 

Moral Of The Story – Friends, if you help others, keep a good mind, God will help you.

 

 

 

 

 

क्षमता के हिसाब से मदद जरूर करें ( Top 10 Moral Stories in Hindi )

 

 

 

 

6- मित्रों घमंडी इंसान हमेशा स्वयं का नाश करता है, इसलिए कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए।  अगर आप घमंड करेंगे तो स्वयं को ही मुसीबत में डालेंगे और घमंड किस बात का ?

 

 

 

 

जो आज आपके पास है, हो सकता है कल आपके पास ना हो और यदि आप घमंड करेंगे, मुसीबत के समय किसी की मदद नहीं करेंगे तो जब आप मुसीबत में पड़ेंगे तो आपकी मदद कौन करेगा ? आज की यह हिंदी कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

किसी जंगल में आम का एक वृक्ष था और उसके बगल में ही एक घना पीपल का वृक्ष था। वह अपनी शीतल घनी छाया के कारण हमेशा अहंकार में रहता था।

 

 

 

 

थके होने के कारण वह लोग पीपल की शीतल छाया में आराम करने लगे। पीपल की ठंडी हवा और घनी छाया होने के कारण उन लोगो का वहां से जाने का मन नहीं कर रहा था।

 

 

 

 

एक बार मधुमक्खियों का एक समूह कहीं जा रहा था। मधुमक्खियों के सरदार ने पीपल से निवेदन किया, “अगर आपकी आज्ञा हो तो हम यहाँ अपना बसेरा बना लें।  ”

 

 

 

 

पीपल ने घमंड से मधुमक्खियों के सरदार से कहा, “आप यहाँ से चले जाओ क्योंकि आपके यहाँ रहने से कोई भी पथिक यहाँ विश्राम नहीं करना चाहेगा ?”

 

 

 

 

पीपल की बात सुनकर सरदार सभी मधुमक्खियों को लेकर दूसरी जगह जाने लगा तो आम के वृक्ष ने मधुमक्खियों के सरदार से पूछा, “आप लोग कहाँ जा रहे है ?”

 

 

 

 

 

 

सरदार ने आम के वृक्ष से कहा, “हमने पीपल से आश्रय की मांग की तो पीपल ने मना कर दिया इसलिए हम दूसरी जगह जा रहे है।” इसपर आम के वृक्ष ने मधुमक्खियों के सरदार से कहा, “अगर आप लोगो को उचित लगे तो हमारे यहाँ आप लोगो का स्वागत है। ”

 

 

 

 

 

मधुमक्खियों के सरदार ने सभी मधुमक्खियों को आदेश दिया और आम की डाल पर मधुमक्खी छत्ता बनाकर रहने लगे। एक दिन दो किसानों को लकड़ियों की आवश्यकता पड़ी तो दोनों किसानों ने जंगल का रुख किया।

 

 

 

 

जंगल में वृक्ष तो बहुतायत थे लेकिन उन्होंने आम के वृक्ष का चयन किया। आम के वृक्ष के समीप पहुंचे तो उन्हें आम की डाल पर मधुछत्ता नजर आया और आम के वृक्ष में लकड़ियां भी कम दिखी। परिणाम स्वरूप उन लोगो ने आपस में विचार किया कि पीपल के वृक्ष को काटना चाहिए, क्योंकि वह मोटा होने के साथ -साथ उसमे डालियाँ भी बहुत है।

 

 

 

 

 

 

फिर उन दोनों ने पीपल के पेड़ को काटना शुरू किया। यह दृश्य देखकर आम का वृक्ष बहुत व्यथित हुआ। उसने मधुमक्खियों के सरदार से कहा, “इस संकट की घड़ी में हमें पीपल के वृक्ष की सहायता करनी चाहिए।” आम के वृक्ष की यह बात सुनकर मधुमक्खियों ने दोनों किसानों पर आक्रमण कर दिया और पीपल का वृक्ष काटने से बच गया।

 

 

 

पीपल के वृक्ष ने मधुमक्खियों का धन्यवाद किया और आम के वृक्ष से भी क्षमा  याचना की। पीपल को अपने किए पर बहुत ग्लानि हुई।

 

 

 

Moral -अपनी क्षमता के अनुसार हर किसी की सहायता करनी चाहिए।

 

 

 

Moral Of This Story – Everyone should help according to their ability.

 

 

 

 

हिंदी प्रेरणादायक कहानी 

 

 

 

 

 

7- यह एक Top 10 Moral Stories in Hindi है।  मित्रों हम इंसान है।  हमें अच्छे और बुरे का ज्ञान है, लेकिन मदद एक ऐसी चीज है जिसका एहसान पशु – पक्षी भी नहीं भूलते। आज की यह प्रेरणादायक कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

करमपुर गांव में परमारथ नाम का किसान रहता था। उसके दो पुत्र थे, रवि और कवि। किसान का बड़ा लड़का रवि बड़ा ही उदण्ड स्वभाव का था और छोटा लड़का कवि अच्छी सोच वाला था।

 

 

 

 

कुछ समय के उपरांत परमारथ की तबियत ख़राब रहने लगी और वह अपने बड़े लड़के के को लेकर बहुत चिंतित था, क्योंकि उसका बड़ा लड़का बहुत उदण्ड स्वभाव का था।

 

 

 

 

एक दिन परमारथ ने अपने दोनों लड़कों को बुलाकर कहा, ” तूफान के समय जो पेड़ अकड़कर खड़ा रहता है, वह जल्दी ही टूटकर जमीन पर गिर जाता है और जो पेड़ तूफान के समय झुक जाता है, उसका कुछ भी नुकसान नहीं होता। ” फिर भी बड़े लड़के को कुछ भी समझ नहीं आया।

 

 

 

 

 

एक दिन किसान ने अपने दोनों लड़कों को बगीचे से फल लाने के लिए अलग – अलग रास्ते पर भेज दिया। रास्ते में कुछ लोग समूह बनाकर वार्तालाप कर रहे थे।

 

 

 

 

रास्ता संकरा होने के कारण अवरुद्ध हो गया था। रवि उन लोगों को बुरा भला कहते हुए फल लाने के लिए चला गया। किसी के रास्ते में कुछ लोगों को अवरोध उतपन्न करना आत्मसंतोष देता है।

 

 

 

 

कवि के सामने पुनः उन लोगो के द्वारा अवरोध बनाया गया था, जिसे छोटे लड़के ने उन लोगो से अनुनय- विनय करके अपना रास्ता प्रसस्त किया।

 

 

 

 

किसान के दोनों लड़के रवि और कवि फल लेकर घर आए। किसान परमारथ जीर्ण अवस्था में पहुँच चुके थे। रवि  ने अपने पिता से कहा, ” मैंने फल लाकर रख दिया है आप लेकर खा लो।”

 

 

 

 

जबकि कवि ने रवि के विपरीत किया।  उसने फल धोकर अपने पिता के सामने रखा और उन्हें फल खाने को कह किसी काम से जंगल की तरफ चला गया।

 

 

 

 

जंगल में पहुँचने के उपरांत वह एक वृक्ष के नीचे रुका हुआ था। तभी उसे वृक्ष के ऊपर से कुछ ध्वनि का आभास हुआ। ऊपर देखने पर उसे एक भयानक दृश्य दिखाई दिया। एक सांप एक साथ चिड़िया के बच्चों को अपना आहार बनाने जा रहा था।

 

 

 

 

जिसके डर से चिड़िया के सभी बच्चे उड़ गए लेकिन एक बच्चा अपंग होने के कारण भाग नहीं पाया और वह ऊपर से गिर गया। कवि का सरल स्वभाव था। उसने उस चिड़िया के बच्चे की मरहम पट्टी की जिससे वह पुनः स्वस्थ होकर नीले गगन की सैर करने लगा।

 

 

 

 

मनुष्य अगर किसी की मनुष्य की भलाई करे तो वह उसे जल्द ही भूल जाता है, लेकिन पशु – पक्षी किसी के उपकार को भूल जाए ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।

 

 

 

 

परमारथ जीर्ण अवस्था में होने के कारण वह भी ईश्वर को प्यारे हो गए। फलतः रवि और कवि में परमारथ की जायदाद को लेकर तनाव बढ़ गया। परिणाम स्वरूप दोनों भाइयों में बंटवारा हो गया।

 

 

 

 

कवि एक दिन अपने खेत में कुछ कार्य कर रहा था। तभी उसने देखा एक चिड़िया अपने पैरों में तरबूज के बीज लाकर उसके खेतों में बिखेर गई।

 

 

 

 

 

समय आने पर तरबूज के पौधे बड़े हो गए। उनमे ढेर सारे फल आए लेकिन दो फल बहुत बड़े थे। कवि ने उन बड़े फलों को सबसे पहले घर में लाया और दोनों फलों को बारी – बारी से काटा तो उसके ख़ुशी का ठिकाना न रहा। कारण कि उसमे से सोने चांदी, हीरे मोती निकल रहे थे। कवि की परिस्थिति बहुत ही सुखद हो गई।

 

 

 

 

 

यह बात रवि को किसी तरह ज्ञात हुई तो उसने भी कवि जैसा बनने की चेष्टा की, लेकिन सब उसके विपरीत हो गया। परिणाम स्वरूप वह बहुत ही दयनीय अवस्था में पहुंच गया। लेकिन कवि से अपने भाई रवि का दुःख देखा नहीं गया। वह रवि को पुनः अपने साथ रखा और दोनों भाई ख़ुशी ख़ुशी जीवन यापन करने लगे।

 

 

 

 

Moral – किसी के प्रति हमको ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए और परमार्थ के कार्य अवश्य करने चाहिए।

 

 

 

 

Moral Of This Story – We should not be jealous of anyone and must do acts of charity.

 

 

 

 

 

सफलता की कहानी 

 

 

 

 

8- यह Top 10 Moral Stories in Hindi की बेहतरीन हिंदी कहानी है। मित्रों हमें जिंदगी में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।  हर मुसीबत से पूरी ताकत के साथ मुकाबला करना चाहिए।  आपको सफलता अवश्य ही मिलेगी, अगर आप हार मानकर बैठ जाएंगे तो सफलता के पैर नहीं होते जो आपके पास चल कर आये।  हमें खुद उसके पास जाना होता है।  आज की यह  शिक्षाप्रद हिंदी कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

दो राजाओ के बीच भयंकर युद्ध हुआ। विजयी राजा ने हारे हुए राजा के घर को घेर लिया और उसके विश्वासपात्र अधिकारियों को बंधक बनाकर जेल में डाल दिया।

 

 

 

 

उन कैदियों में हारे हुए राजा का युवा मंत्री और उसकी पत्नी भी थी। दोनों को किले के एक विशेष हिस्से में कैद करके रखा गया था। कैदखाने में जेलर ने आकर उन्हें समझाया, ” हमारे राजा की गुलामी स्वीकार कर लो तो तुम्हे बहुत सारी सुविधाएँ  मिलेगी, नहीं तो भूखे ऐसे ही तड़पकर मर जाओगे। ”

 

 

 

 

लेकिन वह युवा मंत्री चुप रहा।  वह भी स्वाभिमानी था।  वह दरोगा बहुत कोशिश किया, लेकिन अंत में वह वहाँ से चला गया। उन दोनों को जिस विशेष कक्ष में रखा गया था उसमें १०० दरवाजे थे और उन सभी पर बड़े – बड़े ताले लगे थे।

 

 

 

 

भूख के कारण मंत्री की पत्नी का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था और वह बहुत घबरा गयी थी, लेकिन वह मंत्री शांत रहा। मंत्री ने पत्नी को दिलासा देते हुए कहा, ” चिंता मत करो।  भगवान् सब सही करेंगे। गहरे अंधकार में भी रोशनी की किरण जरूर होती है। ”

 

 

 

 

इसके बाद वह हर दरवाजे को अपनी पूरी शक्ति से ढकेलने लगा।  लगभग ३० – ४० दरवाजों तक कोशिश करने पर भी कोई दरवाजा नहीं खुला। मंत्री बेहद थक गया।

 

 

 

उसकी पत्नी गुस्से से बोली, ” आपका दिमाग तो ठीक है।  हर दरवाजे में इतने बड़े – बड़े ताले लगे हुए हैं और तुम सोच रहे हो कि ये तुम्हारे ढकेलने से खुल जाएंगे। ”

 

 

 

परन्तु मंत्री हताश नहीं हुआ।  कुछ समय बाद वह फिर उठा और पूरी ताकत से फिर से दरवाजों को ढकेलने में लग गया। इस तरह से उसने ९९ दरवाजे ढकेले, लेकिन कोई दरवाजा नहीं खुला।

 

 

 

वह बुरी तरह से थक गया था।  पत्नी ने चिढ़कर उसे बैठा दिया। परन्तु उस मंत्री ने हार नहीं मानी और कुछ समय बाद वह फिर से उठा और अपनी पूरी ताकत से उसने अंतिम दरवाजे को धक्का दिया।

 

 

 

 

धक्का  देते ही वह दरवाजा हल्का सा हिला। उसकी आँखों में आशा की किरण दिखाई दी। उसने फिर से ताकत लगाईं और इस बार उसकी पत्नी ने भी साथ दिया और दरवाजा खुल गया।

 

 

 

दरवाजा खुलने पर दोनों बड़े खुश हुए।  उसके बाद मंत्री ने अपने पत्नी से कहा, ” ज़िन्दगी में कभी भी सभी दरवाजे बंद नहीं होते।  भगवान् कहीं ना कहीं रास्ता जरूर छोड़ देता है, जरूररत होती है पूरी मेहनत से उस रास्ते को खोजने की। ”

 

 

 

 

Moral Of The Story — इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि जब सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं तो भगवान कोई ना कोई रास्ता खोल ही देता है।  इसलिए कभी हार नहीं मानना चाहिए, हमेशा पूरी लगन और मेहनत से उस दरवाजे को ढूंढना चाहिए, जिससे आपको सफलता मिलनी रहती है। 

 

 

 

Moral Of This Story – Never give up, always find the door with all your hard work and hard work, which leads you to success.

 

 

 

 

मित्रता की कहानी 

 

 

 

 

9- यह Top 10 Moral Stories in Hindi की बेस्ट हिंदी  कहानी है। मित्रों यह मित्रता की कहानी है।  दोस्तों के बीच किसी बात को लेकर कभी थोड़ी बहुत अनबन हो जाती है, लेकिन हमें उसे भुला देना चाहिए।  अगर हम उसे दिल पर रखेंगे तो दोस्ती नहीं वह दुश्मनी में तब्दील हो जाती है।  आज की यह कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

आप यह मित्रता की कहानी जरूर पढ़ें। बहुत समय पहले की बात है।  दो दोस्त शहर जा रहे थे।  गर्मी बहुत थी।  वे थक जाने पर बीच – बीच में रुकते और आराम करते।  चलते – चलते दोपहर हो गयी।  उन्हे भूख भी लगी हुई थी।

 

 

 

 

उन्होंने एक जगह छाँव देखकर भोजन करने की सोची। खाना खाते – खाते दोनों में किसी बात को लेकर बहस छिड़ गयी और बात इतनी बढ़ गयी कि एक दोस्त दूसरे को थप्पड़ मार दिया।

 

 

 

 

लेकिन थप्पड़ खाने के बाद भी दूसरा दोस्त चुप रहा और उसने कोई विरोध नहीं किया, बस उसने पेड़ की एक टहनी उठाई और उसने मिट्टी पर लिख दिया, ” आज  मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे  थप्पड़  मारा। ”

 

 

 

 

थोड़ी देर बाद दोनों ने पुनः यात्रा शुरू की।  दोनों एक – दूसरे से बात नहीं कर रहे थे।  तभी अचानक से थप्पड़ खाने वाला दोस्त चीखा।  दूसरे दोस्त ने देखा तो चीखने वाला दोस्त दलदल में फंस गया था। दूसरे दोस्त ने तेजी दिखाते हुए उसे दलदल से निकाल दिया।

 

 

 

 

इस बार दोस्त कुछ नहीं बोला और उसने एक नुकीले पत्थर से एक बड़े पेड़ के तने पर लिखा, ”  आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई। ”

 

 

 

इस बार दूसरे दोस्त से रहा नहीं गया और उसने पहले वाले दोस्त से पूछा, ” जब मैंने तुम्हे थप्पड़ मारा तो तुमने  मिट्टी पर लिखा और  जब  मैंने  तुम्हारी जान बचाई तो तुमने पेड़ के तने पर लिखा, ऐसा क्यों ? ”

 

 

 

 

इसपर दोस्त बोला, ” जब कोई अपना तकलीफ दे तो उसे मन में नहीं रखना चाहिए और इसीलिए मैंने उसे मिट्टी पर लिखा।  जिससे वह बहुत ही जल्द मिट जायेगी और   जब  कोई  हमारे  लिए  कुछ  अच्छा  करे  तो उसे इतनी गहराई से अपने मन में बसा लेने चाहिए कि वो कभी हमारे जेहन से मिट ना सके और इसीलिए मैंने उसे तने पर लिखा। “दूसरे दोस्त को बात समझ में आ गयी।  उसने थप्पड़ मारने के लिए माफ़ी मांगी।

 

 

 

 

जैसी जिसकी सोच ( Top 10 Moral Stories in Hindi )

 

 

 

 

10- मित्रों आपने एक बात पर गौर किया होगा कि आप जैसा सोचते हैं आपके मन में जैसे विचार आते हैं आपके वैसे ही लोगों से मेल – जोल बढ़ जाते हैं।

 

 

 

 

आपको उसी लाइन के लोग मिलने लगते हैं और आप सफल भी जरूर होते हैं, लेकिन इस सफलता में आपकी अच्छी और ऊँची सोच जरूर शामिल होती है।

 

 

आपकी अगर सोच ही ऊँची नहीं रहेगी तो आप उस स्तर को पाने की कोशिश ही नहीं करेंगे।  इसीलिए कहा गया है ” ख्वाब ऊँचे देखने चाहिए।  ” आज की यह Top 10 Moral Stories in Hindi की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

गोपी और किशन दोनों ही बहुत गहरे दोस्त थे। उनकी मित्रता की मिशाल लोग दिया करते, लेकिन दोनों ही गरीब थे। गोपी एक मस्त रहने वाला लड़का था। जबकि किशन एक कागजी कीड़ा था। स्कूल से छूटने के बाद से ही गोपी की शरारत चालू रहती और किशन हमेशा पढ़ाई के बारे में ही सोचता था।

 

 

 

 

किशन ने रास्ते में गिरा हुआ एक पेपर का टुकड़ा देखा, तो वह उसे उठाकर पढ़ने लगा। उसमे एक डॉक्टर का फोटो छपा था, और उसके नीचे सम्मान में कुछ शब्द लिखे हुए थे। कि डॉक्टर की निःस्वार्थ प्रयास से कई मरीजों की जान बची थी। गोपी को पेपर दिखाते हुए किशन बोला, “हमें भी उस डॉक्टर के जैसा बनना है।”

 

 

 

 

 

गोपी खीझ कर बोला, “चुप रे किताबी कीड़े, हरदम पढ़ाई की ही बात करता रहता है। हमें तो देश के लिए गोल्ड मेडल लाना है। मैं कुस्ती का बादशाह बनूँगा।”दोनों घर आ गए। कालांतर में किशन पढ़ाई करते हुए आगे बढ़ता चला गया और गोपी की मेहनत भी रंग लाई।

 

 

 

 

 

वह भी एक के बाद एक सीढियाँ चढ़ता हुआ आज प्रदेश स्तर का नामी पहलवान बन गया था। किशन और गोपी के इस प्रयास में बहुत सारी बाधाए आई, लेकिन उसके बुलंद हौसले के सामने टिक नहीं पाई। किशन बहुत बड़ा सर्जन बन चुका था।

 

 

 

 

लेकिन वह उस पेपर वाले डॉक्टर को नहीं भूला था और उसी का अनुकरण करने का प्रयास कर रहा था। वह अपने क्लिनिक में आए हुए लोगो से एक भी रूपया शुल्क नहीं लेता था।

 

 

 

आज उसकी मुलाकात एक ऐसे मरीज से हुई जो प्रदेश स्तर का पहलवान था। एक मुकाबले में उसे गोल्ड तो मिला लेकिन पैर में फैक्चर की वजह से उसे किशन के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 

 

 

 

किशन के प्रयास से मरीज का पैर ठीक हो गया। दोनों आपस में बातें भी कर रहे थे। बातों से किशन को पता चला कि वह उसका दोस्त गोपी है। दोनों बहुत खुश हुए। दोनों अपनी अच्छी सोच होने के कारण ही सफलता के सुनहरे शिखर पर बैठे थे।

 

 

 

Moral  – अपनी सोच को सदैव अच्छी और ऊँची रखनी चाहिए।

 

 

Moral Of This Story – Your thinking should always be good and high.

 

 

 

 

मित्रों यह Top 10 Moral Stories in Hindi आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Top 10 Moral Stories in Hindi Pdf की तरह की दूसरी कहानी के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और Top 10 Moral Stories in Hindi की  तरह की दूसरी कहानी नीचे की लिंक पर क्लिक करें।

 

 

 

1- Moral Stories in Hindi For Class 3 Pdf / बच्चों की खूबसूरत कहानी जरूर पढ़ें

 

2- Short Moral Stories in Hindi For Class 7 / भरोसा करिये यह हैंडपैंप चलता है

 

3- Story for Kids in Hindi

 

 

 

 

 

Abhishek

नमस्कार पाठकगणों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं मुंबई में रहता हूँ। मुझे हिंदी कहानियां लिखना और पढ़ना बहुत ही पसंद है। मैं कई तरह की हिंदी कहानियां लिखता हूँ। इसमें प्रेरणादायक कहानियां दी गयी है। मुझे उम्मीद है कि यह आपको जरूर पसंद आएगी। धन्यवाद।

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2 Responses

  1. sahil says:

    wow very nice article sir, i really enjoyed this article, thanks again for this article.

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